भारत का ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ कसौटी पर, इन 19,56,936 लोगों के हाथों में है लाज ! जानिए कैसे ?

वसुधैव कुटुम्बकम् अर्थात् पूरा विश्व हमारा परिवार है। यह अवधारणा एकमात्र भारत की सनातन संस्कृति की है। इस संस्कृति के लोगों को भले ही आज का युग हिन्दू धर्मावलंबियों के रूप में जानता हो, परंतु वास्तव में हिन्दू नाम का कोई धर्म इस पृथ्वी पर है ही नहीं, क्योंकि हिन्दू धर्म की सीमित व्याख्या में समेट दी गई भारतीय संस्कृति और भारत के करोड़ों हिन्दुओं का वास्तविक धर्म तो सनातन धर्म है, जिसका न कोई आरंभ है और न ही कोई अंत होगा।

जिस सनातन धर्म में पूरे विश्व को परिवार माना जाता है, वह धर्म भला किसी को हानि कैसे पहुँचा सकता है। उसकी विशाल अवधारणा और विचारधारा में संकीर्णता को कोई जगह नहीं है, परंतु आज के भारत में राजनीतिक द्वंद्वयुद्ध में एक समय ऐसा भी आया, जब हिन्दू धर्म के रूप में विख्यात सनातम धर्म पर ‘भगवा आतंकवाद’ का लांछन लगाया गया। पूरे विश्व को परिवार मानने वाले सनातन धर्म पर ऐसा कलंक लगाने वालों की सूची तो बहुत लम्बी है, परंतु आज हम जिसकी बात कर रहे हैं, वह हैं मध्य प्रदेश में दिग्गी राजा के रूप में विख्यात और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की। इस सूची में दिग्विजय का नाम भी शामिल है, जिन्होंने केवल दो आतंकवादी हमलों को आधार बना कर पूरे हिन्दू धर्म पर भगवा आतंकवाद का लांछन लगाया था।

भारत के वसुधैव कुटुम्बकम् की अवधारणा पर भगवा आतंकवाद रूपी लांछन लगा राजनीति के मैदान में और अब जनता के बीच इसकी कसौटी का समय भी आ गया है, क्योंकि भगवा आतंकवाद का आरोप लगाने वाले दिग्विजय सिंह और जिनके कारण उन्हें भगवा आतंकवाद का लांछन लगाना पड़ा, वे साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर मध्य प्रदेश की भोपाल लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में हैं।

भोपाल लोकसभा सीट पर कुल 19 लाख 56 हजार 936 मतदाता हैं और भारत की वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना की लाज इन 19 लाख 56 हजार 946 मतदाताओं के हाथों में है। अब यह भोपाल के मतदाताओं को तय करना है कि वसुधैव कुटुम्बकम् की अवधारणा लिए सनातन धर्म पर भगवा आतंकवाद के छींटे उड़ाने वाले दिग्विजय सिंह को जिताना है या फिर उन्हें हरा कर हमारी अवधारणा को बरकरार रखना है।

भोपाल, भाजपा और भगवा

मध्य प्रदेश की राजनीति पर नज़र डालें, तो दिग्विजय सिंह का किसी भगवा धारी साध्वी से दूसरी बार आमना-सामना हो रहा है। 1993 लगातार 10 साल तक मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह के विरुद्ध 2003 में भाजपा की फायर ब्रांड नेता भगवा धारी उमा भारती ने ऐसा अभियान छेड़ा कि दिग्विजय की 10 साल की सत्ता छिन गई और उमा भारती मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं। अब दिग्विजय सिंह का फिर एक बार भगवा धारी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर से सामना हो रहा है। ऐसे में देखना यह होगा कि एक भगवा धारी उमा भारती के सामने दिग्विजय सिंह पहली बार विफल रहे, क्या वे भोपाल से दूसरी भगवा धारी प्रज्ञा सिंह ठाकुर का सफलतापूर्वक सामना कर पाएँगे ?

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