कौन हैं मुर्मू, जिन्हें सौंपा गया कश्मीरियों को ‘मोदी का मर्म’ समझाने का उत्तरदायित्व ?

* पृथक जम्मू-कश्मीर में अब तीसरे ‘गुजराती’ की परीक्षा

आलेख : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 26 अक्टूबर, 2019 (युवाPRESS)। गिरीश चंद्र मुर्मू (G. C. MURMU) भारतीय संघ के 31 अक्टूबर, 2019 से अस्तित्व में आने वाले नए केन्द्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के प्रथम उप राज्यपाल बनाए गए हैं। इसके साथ ही पृथक जम्मू-कश्मीर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के बाद तीसरे ‘गुजराती’ की परीक्षा होने वाली है, क्योंकि पृथक जम्मू-कश्मीर में कोई निर्वाचित राज्य सरकार नहीं है। वहाँ राष्ट्रपति शासन है। ऐसे में नए केन्द्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के शासन-प्रशासन का उत्तरदायित्व केन्द्रीय स्तर पर सीधे मोदी और शाह के हाथों में होगा, वहीं राज्य स्तर पर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी जी. सी. मुर्मू उप राज्यपाल (Lieutenant Governor) यानी LG के रूप में जम्मू-कश्मीर का शासन-प्रशासन चलाएँगे। इसके

अब आपके मन में प्रश्न उठ रहा होगा कि हमने मुर्मू को ‘गुजराती’ क्यों कहा ? उत्तर यह है कि जी. सी. मुर्मू 1985 की बैच के गुजरात कैडर के आईएएस अधिकारी हैं और उन्होंने 2004 से 2014 यानी 10 वर्षों तक गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी व उनकी टीम के साथ सफलतापूर्वक कार्य किया है। मोदी मुर्मू के कार्यों से न केवल परिचित हैं, अपितु प्रभावित भी हैं। इस तरह मुर्मू नए मोदी-शाह के बाद पृथक केन्द्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के प्रथम उप राज्यपाल के रूप में ऐसे ‘तीसरे’ महत्वपूर्ण गुजराती हैं, जिन्हें अब मोदी सरकार के विकास के मर्म यानी एजेंडा को आगे बढ़ाने की अग्नि परीक्षा से गुज़रना होगा।

मोदी के सर्वाधिक विश्वसनीय हैं मुर्मू

जी. सी. मुर्मू का जन्म 21 नवम्बर, 1959 को तत्कालीन उड़ीसा (अब ओडिशा) के मयूरगंज में हुआ था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के साथ मुर्मू का संबंध वर्षों पुराना है। गुजरात कैडर के अधिकारी होने के कारण मुर्मू ने कई पदों पर सेवाएँ दीं, परंतु जब 7 अक्टूबर, 2001 को नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने, तो उन्होंने 2004 में मुर्मू की प्रतिभा को पहचाना और अपनी टीम में महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व सौंपे। मुर्मू के कौशल को देखते हुए मोदी ने गुजरात में न केवल मुर्मू को अपना सचिव बनाया, अपितु गृह सचिव का उत्तरदायित्व भी सौंपा। मोदी के मुख्यमंत्रित्वकाल में मुर्मू गुजरात के उच्चतर प्रशासनिक पद यानी प्रधान सचिव के रूप में भी कार्यरत् रहे। मोदी और मुर्मू की केमिस्ट्री जबर्दश्त मिलती है। यही कारण है कि नरेन्द्र मोदी ने 2014 में प्रधानमंत्री बनते ही मुर्मू को दिल्ली बुलवा लिया और उन्हें 2015 में आर्थिक भ्रष्टाचारों से निपटने वाले देश के सबसे बड़े संस्थान प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) यानी ED का निदेशक नियुक्त कर दिया। इसके बाद भी मोदी ने मुर्मू को कार्य कौशल्य का लाभ उठाने के लिए वित्त मंत्रालय में सचिव (व्यय) यानी Secretary(Expenditure) के रूप में नियुक्त किया। मुर्मू वर्तमान में भी इसी पद पर यानी वित्त सचिव (व्यय) पर कार्यरत् हैं और इस पद पर रहते हुए मुर्मू सरकारी खर्चों में कटौती में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

कश्मीरियों को ‘मर्म’ समझाने की कसौटी

अब तक गुजरात सरकार और केन्द्र सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर सेवा दे चुके जी. सी. मुर्मू आयुसीमा के अनुसार 1 नवम्बर, 2019 को सेवानिवृत्त हो जाएँगे। इसी कारण मोदी सरकार ने उन्हें सेवानिवृत्ति से एक दिन पहले से यानी 31 अक्टूबर, 2019 से ही नया उत्तरदायित्व सौंप दिया है। आईएएस अधिकारी के रूप में सेवानिवृत्त होने से पहले ही जी. सी. मुर्मू 31 अक्टूबर को नया इतिहास रचेंगे, जब वे धारा 370 हटाए जाने के बाद नवोदित पृथक केन्द्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के प्रथम उप राज्यपाल के रूप में नया उत्तरदायित्व संभालेंगे। मुर्मू के लिए यह उत्तरदायित्व कोई साधारण उत्तरदायित्व नहीं होगा, क्योंकि उन्हें कश्मीरियों को धारा 370 हटाने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व उनकी सरकार के निर्णय के पीछे छिपे विकास के मर्म को समझाने की अग्नि परीक्षा से गुज़रना होगा। 5 अगस्त, 2019 को धारा 370 हटाए जाने के बाद पृथक केन्द्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और केन्द्र शासित प्रदेश लद्दाख 31 अक्टूबर, 2019 सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती से अस्तित्व में आने वाले हैं। 5 अगस्त के बाद संवेदनशील कश्मीर में सरकार ने स्थिति को सामान्य बनाए रखने के लिए जहाँ एक ओर कई नियंत्रणकारी कदम उठाए, वहीं अब मुर्मू को अपने समर्थ नेतृत्व के माध्यम से कश्मीर की जनता को मोदी सरकार के धारा 370 हटाने के निर्णय के पीछे छिपे विकास के मर्म को समझाने का प्रयास करना होगा। मुर्मू पर पृथक जम्मू-कश्मीर में नए परिसीमन, नई विधानसभा के लिए चुनाव और नई सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त करने का भी कार्य करना होगा। साथ ही मुर्मू को आतंकवाद से निपटने में सेना और स्थानीय पुलिस के बीच समन्वय भी स्थापित करना होगा।

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