EXCLUSIVE : ‘नौबीसिए’ रूपाणी के समक्ष स्वयं को ‘नवीन’ सिद्ध करेने की चुनौती !

विश्लेषण : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 12 जून 2019। विजय रूपाणी गुजरात के 16वें मुख्यमंत्री हैं। 7 अगस्त 2016 को पूर्वाधिकारी आनंदीबेन पटेल के स्थान पर पद एवं गोपनीयता की शपथ लेने वाले रूपाणी के कार्यकाल के 920 दिन पूरे हुए हैं। वे गुजरात के 10वें सीनियर मुख्यमंत्री बन चुके हैं और ठीक 318 दिन बाद वे गुजरात के प्रथम मुख्यमंत्री जीवराज मेहता के 1238 दिनों के शासन के रिकॉर्ड को तोड़ कर 9वें सीनियर मुख्यमंत्री बन जाएँगे। कहने का तात्पर्य यह है कि फिलहाल विजय रूपाणी अनुभव के मामले में गुजरात के 9 पूर्व मुख्यमंत्रियों से पीछे हैं, जिनमें सर्वाधिक शासन करने वाले नरेन्द्र मोदी, बाबुभाई पटेल, माधवसिंह सोलंकी, चिमनभाई पटेल और केशूभाई पटेल आदि शामिल हैं।

आप सोच रहे होंगे कि एक तरफ गुजरात पर वायु चक्रवात का संकट मंडरा रहा है, तब हम विजय रूपाणी और पूर्व मुख्यमंत्रियों का उल्लेख करने क्यों कर रहे हैं ? आपका सोचना सही है, परंतु एक मुख्यमंत्री के रूप में अनुभव का उल्लेख करने के लिए भी हमें वायु ने ही विवश किया है, क्योंकि गुजरात में 9 अनुभवी मुख्यमंत्री ऐसे हैं, जिनके शासनकाल में राज्य पर चक्रवाती संकट आया। चक्रवाती संकट से निपटने के मामले में जहाँ बाबूभाई पटेल की आज भी प्रशंसा होती है, वहीं केशूभाई पटेल जैसे मुख्यमंत्री कई बार विपक्ष और अपनी ही पार्टी की आलोचनाओं के शिकार हो चुके हैं।

अब बात करते हैं विजय रूपाणी की। रूपाणी 7 अगस्त, 2016 को मुख्यमंत्री बने हैं। उनके अब तक के कार्यकाल में वायु दूसरा चक्रवाती संकट है। इससे पहले 2017 में ओखी चक्रवात आया था, जिससे सफलतापूर्वक निपटने का अनुभव रूपाणी और उनकी सरकार के पास है। ओखी उत्त्तर हिन्द महासागर में उत्पन्न हुआ था, जबकि वायु अरब सागर में उत्पन्न हुआ है। रूपाणी सरकार ने ओखी से निपटने के लिए भी प्रभावी तैयारी की थी, जिसके चलते यह चक्रवात जान-माल का भारी नुकसान नहीं पहुँचा सका।

ओडिशा मॉडल अपने की आवश्यकता

गुजरात पर अब वायु चक्रवाती संकट मंडरा रहा है। वायु के गुरुवार को गुजरात के सौराष्ट्र तट से टकराने की संभावना है। वायु के प्रभाव से सौराष्ट्र तथा दक्षिण गुजरात के कई क्षेत्रों में बिजली की गर्जना के साथ बारिश और आंधी का कहर जारी है। मौसम विभाग के अनुसार वायु के सौराष्ट्र तट से टकराने के बाद 120 किलोमीटर प्रतिघण्टा की गति से हवाएँ चलेंगी, जिससे तटवर्ती इलाकों में नुकसान होने की आशंका है। एक तरफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह सहित पूरी केन्द्र सरकार ने स्थिति से निपटने की तैयारी कर ली है, वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री विजय रूपाणी, उनकी सरकार और पूरा प्रशासन भी तटवर्ती इलाकों को खाली कराने में जुट गया है। यह प्रश्न यह उठता है कि क्या ‘नौबीसिए’ यानी 920 दिनों के शासन का अनुभव रखने वाले नौसीखिए विजय रूपाणी वायु चक्रवाती संकट का सामना करने में अपने आपको ‘नवीन’ सिद्ध कर पाएँगे। जी हाँ, हम ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की बात कर रहे हैं, जिनके पास 19 वर्ष से अधिक यानी 7,026 दिनों के शासन का अनुभव है और जिन्होंने अभी हाल ही में 26 अप्रैल से 7 मई के दौरान कहर बरपाने वाले फानी चक्रवात का सफलतापूर्वक सामना किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जहाँ एक तरफ चुनाव प्रचार की व्यवस्तता के बीच भी फानी से निपटने में ओडिशा के सीए नवीन की भरपूर मदद की, वहीं नवीन बाबू ने फानी का इस तरह सामना किया कि कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने नवीन सरकार व प्रशासन के आपदा प्रबंधन की प्रशंसा की और उसे प्रेरक बताया। ऐसे में रूपाणी के समक्ष भी स्वयं को नवीन सिद्ध करने की चुनौती है।

मोदी से विरासत में मिला आपदा प्रबंधन

वैसे रूपाणी को गुजरात में आपदा प्रबंधन का सुदृढ़ ढाँचा नरेन्द्र मोदी से विरासत में मिला है। नरेन्द्र मोदी ने मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही सर्वाधिक ध्यान आपदा प्रबंधन पर दिया था, क्योंकि 10 में से 7 साल सूखे और अकाल का सामना करने वाले गुजरात के तटवर्ती इलाकों को समय-समय पर आने वाले चक्रवातों के संकट भी झेलने पड़ते थे। इसीलिए मुख्यमंत्री के रूप में नरेन्द्र मोदी ने मजबूत आपदा प्रबंधन व्यवस्था स्थापित की, जिसके दम पर गुजरात में पिछले 15 वर्षों के दौरान आए सभी प्राकृतिक संकटों का कम से कम जान-माल के नुकसान के साथ सामना करने में सफलता मिली। ऐसे में रूपाणी सरकार और प्रशासन ने भी मोदी से मिली विरासत का लाभ उठाते हुए एनडीआरएफ सहित तमाम प्रकार के बलों और प्रशासनिक टीमों को तटवर्ती इलाकों में उतार दिया है, ताकि वायु से कम से कम नुकसान हो।

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