गुजरात की जनता राष्ट्रवाद के नाम पर वोट देगी या जातिवाद के नाम पर ? भाजपा-कांग्रेस दोनों ने लगाया ओबीसी-पाटीदारों पर दाव

गुजरात में एक समय था जब चुनाव का मुख्य आधार जातिवाद ही रहता था। आज भी राजनीतिक दल अपने प्रत्याशी चुनते समय जातिवाद पर विशेष ध्यान देते हैं, परंतु गुजरात एक ऐसा राज्य है, जिसने समय-समय पर जातिवाद से ऊपर उठ कर धर्म-सम्प्रदाय और राष्ट्रवाद के नाम पर वोट दिया है। 1984 तक गुजरात में भले ही जातिवाद का बोलबाला रहा हो, परंतु 1989 के बाद गुजरात में कई चुनावों में धर्म-सम्प्रदाय और राष्ट्रवाद के नाम पर मतदाताओं का एक विशेष पक्ष में ध्रुवीकरण हुआ, जहाँ जातिवाद के चिथड़े उड़ गए।

लोकसभा चुनाव 2019 में भी भाजपा और कांग्रेस ने गुजरात की सभी 26 लोकसभा सीटों अपने-अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है और दोनों ही पार्टियों ने प्रत्याशियों के चयन में संबंधित मत क्षेत्र में जातिवादी गणित को ध्यान में रखा है, क्योंकि 2015 में पाटीदार आरक्षण आंदोलन और उसके बाद ओबीसी तथा दलितों के लामबंद होने के कारण राज्य में फिर एक बार जातिवाद मुखर हो गया है और इसका प्रभाव गुजरात विधानसभा चुनाव 2017 में भी देखने को मिला। राज्य में सबसे बड़ा यानी 52 प्रतिशत आबादी वाला समुदाय ओबीसी समुदाय है। इसलिये दोनों ही राजनीतिक दलों ने इस समुदाय के उम्मीदवारों को दोनों हाथों से टिकट बाँटे हैं। दूसरा बड़ा समुदाय पाटीदार यानी पटेल समुदाय माना जाता है। इसलिये इस समुदाय पर भी दोनों दलों ने खूब दाव खेला है। इसी को देखते हुए गुजरात में दोनों ही मुख्य पार्टियों ने इस बार पाटीदार और ओबीसी प्रत्याशियों पर दाव लगाया है।

राज्य में 26 लोकसभा सीटों में से 20 सामान्य सीटें हैं, जबकि चार सीटें दाहोद, छोटा उदेपुर, बारडोली और वलसाड आदिवासियों के लिये सुरक्षित सीटें हैं तथा कच्छ व अहमदाबाद पश्चिम की दो सीटें अनुसूचित जाति के लिये आरक्षित हैं।

भाजपा-कांग्रेस के 18 ओबीसी व 14 पाटीदार उम्मीदवार

सत्तारूढ़ भाजपा ने 20 सामान्य लोकसभा सीटों में से 10 सीटों पर अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और 6 सीटों पर पाटीदार समुदाय के उम्मीदवारों को टिकट दिये हैं। भाजपा के ओबीसी उम्मीदवारों में कोली समुदाय के 4, चार ठाकोर, एक चौधरी, एक आहिर और एक दर्जी समुदाय का उम्मीदवार है। इसी प्रकार भाजपा के 6 पाटीदार उम्मीदवारों में मोहन कुंडारिया-राजकोट, नारण काछड़िया-अमरेली, शारदा पटेल-मेहसाणा, एच. एस. पटेल-अहमदाबाद पूर्व, रमेश धड़ुक-पोरबंदर और मितेश पटेल-आणंद शामिल हैं।

उधर मुख्य विपक्ष कांग्रेस भी इस मामले में पीछे नहीं रही। उसने भी 8 ओबीसी और 8 पाटीदारों को टिकट देकर भाजपा को कड़ी टक्कर देने की रणनीति तैयार की है। 8 ओबीसी प्रत्याशियों में धर्मेश पटेल-नवसारी, पुंजा वंश-जूनागढ़ और सोमा पटेल-सुरेन्द्रनगर कोली समुदाय के हैं। पंचमहाल के वी. के. खांट क्षत्रिय (पिछड़ा वर्ग) से हैं। मुलु कंडोरिया-जामनगर (आहिर), परथी भटोळ-बनासकांठा (चौधरी), जगदीश ठाकोर-पाटण व राजेन्द्र ठाकोर-साबरकांठा (दोनों ठाकोर) भी ओबीसी समुदाय से हैं। कांग्रेस के पाटीदार उम्मीदवारों की बात करें, तो ललित वसोया-पोरबंदर, ललित कथगरा-राजकोट, गीता पटेल-अहमदाबाद पूर्व, प्रशांत पटेल-वडोदरा, ए. जे. पटेल-मेहसाणा, अशोक अधेवडा-सूरत और मनहर पटेल-भावनगर शामिल हैं।

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