लाल चौक : नेहरू का ‘उलझाया’ तिरंगा 71 साल बाद ‘सुलझाएँगे’ शाह ?

* नेहरू ने 1948 में कश्मीरियों से किया जनमत संग्रह का वादा

* 71 वर्षों में भारत के किसी प्रधानमंत्री या मंत्री ने नहीं फहराया तिरंगा

* 1992 में डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने पाबंदियों के बीच फहराया था तिरंगा

विशेष टिप्पणी : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 13 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। भारत का 73वाँ स्वतंत्रता दिवस पिछले 72 स्वतंत्रता दिवसों से कई मायनों में अलग और महत्वपूर्ण होने वाला है। 15 अगस्त, 1947 को देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने जिस भारत में दिल्ली के लाल किले पर तिरंगा फरहाराया था, वह भारत स्वतंत्रता के हर्षोल्लास के साथ-साथ विभाजन के दर्द और पीड़ा से कराह भी रहा था। इसके बाद लगातार 72 वर्षों तक भारत हर वर्ष 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाता रहा, परंतु इन सब पर भारी पड़ने वाला है इस बार 15 अगस्त को मनाया जाने वाला 73वाँ स्वतंत्रता दिवस, क्योंकि नेहरू का जो भारत कराहते हुए पहला स्वतंत्रता दिवस मना रहा था, मोदी का वही भारत दहाड़ते हुए 73वाँ स्वतंत्रता दिवस मनाने वाला है।

पूरे भारत के लिए विशेष 73वाँ स्वतंत्रता दिवस

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लगातार छठी बार 15 अगस्त, 2019 गुरुवार को लाल किले पर तिरंगा फहराएँगे और लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र के नाम संबोधन देंगे, परंतु मोदी के भाषण को लेकर इस बार आम जनता में जबर्दश्त उत्सुकता है, क्योंकि 15 अगस्त, 2018 और 15 अगस्त, 2019 में बहुत अंतर है। पिछले साल के स्वतंत्रता दिवस पर जम्मू-कश्मीर धारा 370 की बेड़ियों में जकड़ा हुआ था, जबकि इस बार के स्वतंत्रता दिवस पर मोदी धारा 370 की बेड़ियों से मुक्त जम्मू-कश्मीर युक्त भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए देश की जनता को संबोधित करेंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, उनकी सरकार और गृह मंत्री अमित शाह ने अगस्त क्रांति करते हुए इस बार के स्वतंत्रता दिवस को क्रांतिकारी बना दिया है और प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा कश्मीर को लेकर की गई ऐतिहासिक भूल को सुधार दिया है। इसीलिए इस बार का स्वतंत्रता दिवस कई मायनों विशेषकर कश्मीर के मुद्दे पर अत्यंत विशेष बन चुका है।

लाल चौक पर तिरंगा फहराने का रिकॉर्ड सिर्फ नेहरू के नाम

इधर दिल्ली में लाल किले से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दहाड़ेंगे, तो उधर गृह मंत्री अमित शाह को लेकर ख़बरें आ रही हैं कि वे स्वतंत्रता दिवस पर जम्मू-कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर के उसी लाल चौक में तिरंगा फहराने की तैयारी कर रहे हैं, जहाँ 1948 में देश के पहले प्रधानमंत्री नेहरू ने तिरंगा फहराया था। नेहरू के बाद भारत सरकार का कोई प्रतिनिधि यहाँ तिरंगा फहराने का साहस नहीं कर सका। देश ने नेहरू के बाद देश ने 13 प्रधानमंत्री देखे, परंतु इनमें से कई प्रधानमंत्री श्रीनगर के लाल चौक में न केवल तिरंगा फहराने का साहस न सका, अपितु उसने ऐसा करने का प्रयास करने वाले राष्ट्र भक्तों को भी पाबंदियों की बेड़ियों में जकड़ने का काम किया। बात करें, अटल बिहारी वाजपेयी और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की, तो धारा 370 के नियंत्रणों ने एक संवैधानिक पद पर रहते हुए दोनों को ऐसा साहस करने की अनुमति नहीं दी, परंतु अब जबकि मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने धारा 370 हटा दी है, जम्मू-कश्मीर राष्ट्रपति-राज्यपाल के शासन में यानी केन्द्र सरकार के शासन में है, तब गृह मंत्री अमित शाह ने उसी लाल चौक पर तिरंगा फहराने की इच्छा व्यक्त की है, जहाँ 71 साल पहले नेहरू ने पहली बार तिरंगा फहराया था। यद्यपि आपको याद दिला दें कि नेहरू ने प्रत्यक्ष रूप से लाल चौक पर तिरंगा फहराया था, परंतु इसके साथ उन्होंने वहाँ मौजूद कश्मीरियों से जनमत संग्रह का वादा कर वास्तव में लाल चौक पर तिरंगे को ऐसा उलझा दिया कि फिर कभी कोई भारतीय प्रधानमंत्री या मंत्री इस लाल चौक पर तिरंगा नहीं फहरा सका।

शाह फहराएँगे तिरंगा, पूरा होगा मोदी का सपना

यदि वास्तव में गृह मंत्री अमित शाह श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा फहराते हैं, तो यह अपने आप में भारत के लिए एक ऐतिहासिक क्षण और घटना होगी। नेहरू ने तो तिरंगा फहरा कर उसे उलझा दिया था, परंतु शाह शान से जो तिरंगा फहराएँगे, वह धारा 370 की उलझनों से पूरी तरह मुक्त एक सुलझा हुआ तिरंगा होगा। इसके साथ ही शाह लाल चौक पर तिरंगा फहराने वाले दूसरे भाजपा नेता बन जाएँगे। इससे पहले डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने 26 जनवरी, 1992 को गणतंत्र दिवस के मौके पर केन्द्र की पी. वी. नरसिंह राव के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार और राज्य की फारूक़ अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) सरकार की पाबंदियों के बीच लाल चौक पर तिरंगा फहराया था। जोशी के साथ वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी मौजूद थे। दरअसल 1993 में अलगाववादियों और आतंकवादियों ने लाल चौक पर पाकिस्तानी ध्वज फहरा कर भारतीय नेताओं को चुनौती दी थी कि अगर किसी में हिम्मत हो, तो वह 26 जनवरी को लाल चौक में तिरंगा फहरा कर दिखाए। तत्कालीन विपक्षी दल भाजपा के युवा मोर्चा (BJYM) ने इस चुनौती को स्वीकार किया था और भाजपा अध्यक्ष डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने 11 दिसम्बर, 1991 को कोलकाता-पश्चिम बंगाल से श्रीनगर के लाल चौक तक एकता यात्रा निकाली थी। यद्यपि सरकार ने सुषमा स्वराज, अरुण जेटली सहित सभी बड़े नेताओं को 25 जनवरी, 1992 को ही पंजाब से जम्मू-कश्मीर को जोड़ने वाले रावी नदी के पुल पर ही गिरफ्तार कर लिया, तो भाजयुमो के कार्यकर्ताओं को कश्मीर में प्रवेश करने से पहले ही हिरासत में ले लिया गया। हालाँकि जोशी और मोदी सहित कई बड़े नेता 26 जनवरी, 1992 को श्रीनगर के लाल चौक पहुँचे और उन्होंने शान से तिरंगा लहराया। मोदी उस समय भाजपा संगठन में अत्यंत महत्वपूर्ण नेता थे और ऐसे में उस समय उन्होंने भी सपना संजोया होगा कि एक दिन कश्मीर दारा 370 से मुक्त होगा और यहाँ भारत पूरी शान से तिरंगा फहराएगा। मोदी का यह सपना शाह लाल चौक पर तिरंगा फहरा कर पूरा कर सकते हैं।

क्या है लाल चौक का इतिहास ?

श्रीनगर का लाल चौक जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक गतिविधियों का प्रमुख केन्द्र रहा है। 1917 से 1923 के बीच वामपंथियों द्वारा की गई रूसी क्रांति से प्रेरित होकर महाराजा हरि सिंह ने इस जगह का नाम लाल चौक रखा था। नेहरू से लेकर शेख अब्दुल्ला और उसके बाद कई कश्मीरी नेताओं ने यहाँ से कश्मीरियों को संबोधित किया। जब नेहरू ने प्रधानमंत्री के रूप में 1948 में पहली बार लाल चौक पर तिरंगा फहराया और जनमत संग्रह का वादा किया, तब तत्कालीन जम्मू-कश्मीर के प्रधानमंत्री शेख अब्दुल्ला बहुत ही खुश हुए थे। शेर-ए-कश्मीर कहलाने वाले शेख अब्दुल्ला ने नेहरू के प्रति अपना प्रेम प्रकट करते हुए अमीर खुशरो का शेर सुनाया, जिसका अर्थ है, ‘मैं आपका हुआ, आप मेरे हुए, अत: कोई नहीं कह सकता कि हम अलग हैं।’ परंतु नेहरू के तिरंगा फहराने के बाद जम्मू-कश्मीर दिन-ब-दिन और साल-दर-साल भारत की मुख्य धारा से दूर होता गया और धारा 370 ने यहाँ अलगाववाद, परिवारवाद और आतंकवाद को ख़ूब पनपाया। स्थिति यह हो गई कि लाल चौक पर तिरंगा नहीं, बल्कि कई बार पाकिस्तानी झंडे, तो कई बार आतंकवादी संगठनों के झंडे फहराए जाने लगे।

ट्विटर पर ट्रेंड कर रहा “Srinagar’s Lal Chowk”

अमित शाह के लाल चौक पर 15 अगस्त को तिरंगा फहराने की संभावनाओं की ख़बर के बाद ट्विटर पर “Srinagar’s Lal Chowk” ट्रेंड करने लगा। अनेक लोगों ने खुद भी इच्छा जताई कि वे शाह तो लाल चौक पर तिरंगा फहरा कर अलागववादियों, आतंकवादियों, पाकिस्तानपरस्तों और पाकिस्तानियों को ललकारते हुए देखना चाहते हैं। कई यूज़र्स कह रहे हैं कि यदि शाह लाल चौक पर तिरंगा फहराएँगे, तो उन्हें इस बात का गर्व होगा। कई लोग 1993 की वह तसवीर भी शेयर कर रहे हैं, जिसमें वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एकता यात्रा के साथ श्रीनगर के लाल चौक पहुँचे थे। कई यूज़र्स तो लाल चौक का नाम बदल कर धारा 370 को लेकर बलिदान देने वाले डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी के नाम पर मुखर्जी चौक रखने की सलाह दे रहे हैं।

लाल चौक का नाम मुखर्जी चौक करने की मांग

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