EXCLUSIVE ANALYSIS : हे मानव, सावधान ! तेरे ‘भार’ से भरभरा कर ध्वस्त हो जाएगी धरती !

* पृथ्वी की भार वहन क्षमता 1600 करोड़ मानव

*2050 तक पृथ्वी की जनसंख्या 970 करोड़ होगी

* भारत तो 2027 में ही चीन को पछाड़ बन जाएगा नंबर 1

* प्रत्येक मानव का औसत वज़न 62 KG होता है

* 2050 में 60.14 लाख टन हो जाएगा मानव भार

विश्लेषण : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद, 18 जून, 2019 (युवाप्रेस.कॉम)। संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) की एक अद्यतन रिपोर्ट ने यह लेख लिखने पर विवश किया है। वैसे यूएन पहले ही यह अनुमान व्यक्त कर चुका है कि वर्ष 2050 तक विश्व की जनसंख्या 970 करोड़ तक पहुँच जाएगी, परंतु इस बीच यूएन के आर्थिक एवं सामाजिक मामलों के विभाग पॉपुलेशन डिवीज़न ने द वर्ल्ड पॉपुलेशन प्रोस्पेक्ट 2019 हाईलाइट्स (विश्व जनसंख्या संभावना) प्रकाशित किया है। इस ताज़ा रिपोर्ट ने मुझे धरती पर विचरण करने वाली 84 लाख योनियों में सर्वश्रेष्ठ और विवेकयुक्त योनि यानी मानव को सावधान करने के लिए प्रेरित किया है। यदि मानव ने अपने निरंतर विस्तार को यूँ ही ज़ारी रखा, उसे रोका नहीं, तो यह धरती मानव भार से भरभरा कर ध्वस्त हो जाएगी।

सबसे पहले बात इस लेटेस्ट रिपोर्ट की कर लेते हैं, जिसके अनुसार विश्व की आबादी 2050 तक 970 करोड़ हो जाएगी, जिसमें सबसे अधिक लोग भारत में रहते होंगे। यह रिपोर्ट भारत के लिए इसलिए भी चिंताजनक है, क्योंकि भारत में जनसंख्या वृद्धि की जो दर है, उसे देखते हुए भारत आगामी 8 वर्षों में ही यानी 2027 तक ही विश्व में नंबर 1 बन जाएगा।

चीन से आगे निकल जाएगा भारत

रिपोर्ट के अनुसार भारत 2027 तक भारत की जनसंख्या वर्तमान में नंबर 1 चीन से अधिक हो जाएगी और जनसंख्या के मामले में भारत नंबर 1 बन जाएगा। वर्तमान में भारत की जनसंख्या 136 करोड़, जबकि चीन की 142 करोड़ है। populationpyramid.net की मानें, तो 2027 में भारत की जनसंख्या 1,488,943,044 (148 करोड़) हो जाएगी, जबकि चीन की जनसंख्या बढ़ने की बजाए घट कर 1,416,294,130 (141 करोड़) रह जाएगी। अगले 30 वर्षों में भारत की जनसंख्या 27.3 करोड़ बढ़ कर 250 तक 164 करोड़ तक पहुँच सकती है। 2100 में भारत की आबादी 150 करोड़, चीन की जनसंख्या 110 करोड़, नाइज़ीरिया की 73.3 करोड़, अमेरिका की 43.4 करोड़ और पाकिस्तान की 40.3 करोड़ हो जाएगी।

सदी के अंत तक होगा जनसंख्या विस्फोट

जनसंख्या वृद्धि में निःसंकोच भारत का बड़ा योगदान रहेगा, परंतु भारत अकेला दोषी नहीं है। लेटेस्ट रिपोर्ट के अनुसार 21वीं शताब्दी के अंत तक दुनिया की जनसंख्या 1100 करोड़ तक पहुँच जाएगी। 2050 में विश्व की कुल जनसंख्या 970 करोड़ में से आधी यानी 485 करोड़ जनसंख्या विश्व के केवल 9 देशों में होगी। इनमें भारत, नाइज़ीरिया, पाकिस्तान, कांगो, इथोपिया, तंज़ानिया, इंडोनेशिय, मिस्र और अमेरिका शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार विश्व की जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है। पिछले 69 वर्षों में इसमें तीन गुना वृद्धि हुई है। यूएन के इस विभाग के निदेशक जॉन विल्मोथ ने तो यहाँ तक कह दिया कि रिपोर्ट से इतर हमारा अनुमान है कि 2050 में वैश्विक जनसंख्या 1010 करोड़ और वर्ष 2100 के अंत तक 1270 करोड़ तक पहुँच सकती है।

जनसंख्या वृद्धि से बढ़ेगा धरती पर भार

एक अनुमान के अनुसार एक व्यक्ति का औसत वज़न 62 किलोग्राम होता है। इस हिसाब से हाल में धरती पर 770 करोड़ लोग रह रहे हैं यानी धरती पर मानव जाति का कुल वज़न 47.74 लाख टन है। यदि भारत की बात करें, तो भारत की वर्तमान जनसंख्या 131 करोड़ है। प्रतिव्यक्ति 62 किलो वज़न के हिसाब से भारत की धरती पर मानव जाति का वजन 8.18 लाख टन है। यूएन के अनुसार 2050 में यदि मानव जनसंख्या 970 करोड़ हो जाती है, तो इस धरती पर मानव भार 60.14 लाख टन हो जाएगा। माना जाता है कि पृथ्वी पर 400 करोड़ लोग ही बेहतर जीवन जी सकते हैं और पृथ्वी अधिकतम भार वहन क्षमता 1600 करोड़ लोगों की है। यदि इससे अधिक मानव जनसंख्या हुई, तो कदाचित यह धरती मनुष्य का भार वहन नहीं कर पाएगी। थॉमस माल्थोस जैसे विद्वान ने भी कहा था कि पृथ्वी के संसाधन सीमित हैं, परंतु मनुष्य इसकी चिंता किए बिना अपनी संख्या का निरंतर विस्तार कर रहा है। जिस दिन जनसंख्या का आँकड़ा विस्फोटक स्थिति पर पहुँचेगा, उस दिन पृथ्वी की अंतिम भारधारक क्षमता कभी भी ध्वस्त हो सकती है।

असंतुलित धरती लेगी करवट और फिर होगा कहर

वैसे भी भारतीय दर्शन और अध्यात्म में तो कहा ही गया है कि जब-जब धरती पर अधर्म का विस्तार होता है, तब-तब धरती करवट लेती है। यदि जनसंख्या इसी गति से बढ़ेगी और संसाधन सीमित रहेंगे, तो स्वाभाविक है कि पृथ्वी और प्रकृति का दोहन बढ़ेगा, जिससे पर्यावरण के साथ-साथ प्रकृति का भी असंतुलन होगा। अरे होगा क्या, हो चुका है। यही तो कारण है कि न मौसम समय पर आते-जाते हैं, न विकसित विज्ञान के बावजूद आपदाएँ रुक रही हैं। जब धरती पर असंतुलन अनियंत्रित मात्रा तक बढ़ जाएगा, तो सीधी बात है कि धरती करवट लेगी। कहीं भूकंप, कहीं चक्रवात, कहीं बाढ़, कहीं बर्फबारी, कहीं सूखा और कहीं अकाल जैसी प्राकृतिक आपदाएँ आकर मनुष्य का भक्षण करेंगी और धरती पर मानव जनसंख्या को संतुलित करने का प्रयत्न करेंगी। यदि ऐसा नहीं हुआ, तो धरती पर विनाश का सिलसिला चलेगा, जो मानव जाति के अस्तित्व को संकट में डाल देगा।

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