कल्चर बदलने की तैयारी में सिल्चर : रॉय के रुआब और मोदी के मैजिक से प्रियंका की इस चहेती और महिला कांग्रेस अध्यक्ष सुष्मिता की शामत निश्चित ?

विश्लेषण : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद, 21 मई, 2019। लोकसभा चुनाव 2019 की हॉट सीटों में शामिल असम की सिल्चर लोकसभा सीट पर इस बार मुकाबला अत्यंत रोचक और काँटे का रहा है। वैसे सिल्चर लोकसभा सीट के लिए मतदान दूसरे चरण में 18 अप्रैल को ही सम्पन्न हो चुका है, परंतु एग्ज़िट पोल के रुझानों से लगता है कि सिल्चर ने अबकी बार कांग्रेस कल्चर से छुटकारा पाने की ठान ली थी।

सिल्चर लोकसभा सीट पर कुल चार उम्मीदवार मैदान में थे, परंतु मुख्य मुकाबला कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा की चहेती, महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष और निवर्तमान सांसद (2014 की विजेता) सुष्मिता देव और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा-BJP) के डॉ. राजदीप रॉय के बीच था। रॉय अपनी जीत को लेकर मतदान से पहले और मतदान के बाद भी आश्वस्त थे, परंतु एग्ज़िट पोल आने के बाद रॉय ने दावा किया है कि सिल्चर का कल्चर अब बदलने वाला है और वे यह लोकसभा सीट कांग्रेस से छीन लेंगे।

सिल्चर में भी चलेगी मोदी सुनामी ?

एग्ज़िट पोल 2019 के जो निष्कर्ष आए हैं, उसमें असम में भाजपा को 14 में से 9 से 12 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है। ऐसे में यह निश्चित है कि पूरे देश में चली मोदी सुनामी ने असम और सिल्चर में भी असर दिखाया है। इसके अलावा भाजपा प्रत्याशी राजदीप रॉय ने भी सिल्चर में चुनावी पैर जमाने के लिए कई महीनों से तैयारी की थी, जिसके फलस्वरूप सिल्चर में वे सुष्मिता देव को काँटे की टक्कर दे रहे थे। एग्ज़िट पोल के रुझानों के बाद लगता है कि सिल्चर में रॉय के रुआब और मोदी के मैजिक के चलते कांग्रेस की इस दिग्गज नेता सुष्मिता देव की शामत आना निश्चित है।

पाँच वर्षों में बदले हालात

सिल्चर में भाजपा प्रत्याशी डॉ. राजदीप रॉय को अपनी जीत का भरोसा है, तो इसके पीछे का कारण असम में पिछले पाँच वर्षों में आया बदलाव भी है। सुष्मिता देव ने लोकसभा चुनाव 2014 में मोदी लहर के बावजूद सिल्चर सीट से जीत हासिल की थी, परंतु असम विधानसभा चुनाव 2015 में भाजपा को पहली बार अकेले दम पर बहुमत मिला और असम की राजनीति में कांग्रेस की कश्ती डोलने लगी। ऐसे में सुष्मिता के लिए इस बार सिल्चर सीट बचा पाना लोहे के चने चबाने समान बन गया है।

प्रियंका को भनक लग गई थी हार की ?

कांग्रेस महासचिव और पूर्वी उत्तर प्रदेश की बागडोर संभाल रहीं प्रियंका गांधी वाड्रा के अचानक उत्तर प्रदेश से ऐन मौके पर प्रचार के लिए सिल्चर आने के बाद ही राजनीतिक हलकों में यह चर्चा शुरू हो गई थी कि सिल्चर में इस बार कांग्रेस और प्रियंका की चहेती सुष्मिता देव की स्थिति डाँवाडोल है। इसीलिए जब राहुल गांधी असम पहुँचे, तो सुष्मिता ने उनसे आग्रह किया कि वे प्रियंका को प्रचार के लिए सिल्चर भेजें। प्रियंका ने यूपी में मचे चुनावी घमासान के बीच 18 अप्रैल के मतदान से ऐन चार दिन पहले 14 अप्रैल को सिल्चर पहुँच कर रोड शो किया। प्रियंका के यूँ यूपी छोड़ कर सिल्चर आने को ही सुष्मिता देव और कांग्रेस की संभावित हार के परिचायक के रूप में देखा जा रहा था।

कांग्रेसी गढ़ में भाजपा की कई सेंध

सिल्चर मूलतः कांग्रेस का गढ़ रहा है। सिल्चर लोकसभा सीट के लिए हुए 1977 में हुए पहले, 1980 में हुए दूसरे और 1984 में हुए तीसरे चुनाव में जीत दर्ज कर कांग्रेस ने हैट्रिक लगाई थी, परंतु 1991 में भाजपा ने कांग्रेस के इस गढ़ में पहली बार सेंध लगाई, तो 1996 में फिर कांग्रेस को जीत मिली, परंतु 1998 में भाजपा ने दोबारा यह सीट कांग्रेस से छीन ली। बाद के वर्षों में भाजपा पूरे देश में कमज़ोर पड़ी और इसका असर सिल्चर पर भी हुआ। यही कारण था कि 1999 और 2004 के चुनाव में लगातार दो बार कांग्रेस ने यह सीट जीत ली, परंतु 2009 में फिर एक बार भाजपा ने कांग्रेस से सिल्चर सीट छीन कर कब्जा जमाया। 2014 में सुष्मिता देव नया चेहरा बन कर सामने आईं और मोदी लहर के बावजूद वे भाजपा से यह सीट छीनने में सफल रहीं, परंतु डॉ. राजदीप रॉय के अनुसार और एग्ज़िट पोल के रुझानों के बाद ऐसा लगता है कि सिल्चर अब अपना राजनीतिक कलेवर और कल्चर बदलने जा रहा है।

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