EXIT POLL 2019 : क्या टुकड़े-टुकड़े हो जाएगा ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ ?

मोदी विरोध का एजेंडा डुबोएगा कन्हैया की कश्ती और शत्रुघ्न को करेगा ख़ामोश ?

पटना साहिब में रवि के उदय के संकेत, तो बेगूसराय में गिरिराज का बजेगा बिगुल ?

विश्लेष्ण : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 20 मई, 2019। महाभारत काल में कन्हैया ने अपनी अंगुली पर गिरि यानी पर्वत को उठा लिया था, जिसके बाद वह गिरधारी कहलाए, परंतु वर्तमान काल की बात करें तो लोकसभा चुनाव 2019 के राजनीतिक अखाड़े में ‘कन्हैया’ ‘गिरि’ के सामने घुटने टेकता दिखाई दे रहा है। लोकसभा चुनाव के बाद सामने आये एक्जिट पोल के नतीजों के अनुसार बिहार की बेगूसराय लोकसभा सीट पर भाजपा के नवादा के निवर्तमान सांसद गिरिराज सिंह चुनाव जीत रहे हैं, वहीं उनके विरुद्ध चुनाव लड़ रहे देश द्रोह के आरोपी तथा सीपीआई के उम्मीदवार कन्हैया कुमार यह चुनावी जंग हारते दिखाई दे रहे हैं।

इसी प्रकार बिहार की एक और हॉट सीट पटना साहिब की बात करें तो एक्जिट पोल का आंकलन बता रहा है कि लगभग 28 साल तक भाजपा के साथ रहने के बाद 2019 में कांग्रेस में शामिल होने वाले फिल्म अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा भी पटना साहिब सीट से चुनाव हारने वाले हैं। वह यहाँ से तीन बार भाजपा के सांसद रहे हैं। इस सीट से मतदाता अब नये सांसद के रूप में केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद का नवोदय करने जा रहे हैं।

इसके अलावा पाटलिपुत्र लोकसभा सीट पर महा गठबंधन की ओर से आरजेडी की प्रत्याशी तथा बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालूप्रसाद यादव की बेटी मीसा भारती भी चुनाव हारती दिखाई दे रही हैं।

एबीपी न्यूज और नीलसन के एक्जिट पोल के अनुसार इन तीनों सीटों पर इन तीनों दिग्गजों के विरुद्ध वोटिंग हुई है, जिसका लाभ भाजपा और एनडीए को हो रहा है।

यदि एक्जिट पोल का यह अनुमान सही सिद्ध होता है तो यह मोदी विरोध का एक मात्र एजेंडा लेकर चलने वालों की करारी शिकस्त होगी और उनका राजनीतिक भविष्य भी अंधकार में डूब जाएगा।

आपको बता दें कि कन्हैया कुमार वह व्यक्ति है जो पीएम मोदी और उनकी सरकार की नीतियों का विरोध करने वाले दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्व विद्यालय के मुट्ठी भर छात्रों का नेता बनकर उभरा था। मोदी विरोध को लेकर ही वह चर्चा में आया था और उस पर देश द्रोह का आरोप लगा था। लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान भी उसने विवादास्पद बयान देकर लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने का प्रयास किया।

इसी प्रकार अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री रहे शत्रुघ्न सिन्हा की भी 2014 में चुनाव जीतने के बाद मोदी मंत्रिमंडल में जगह पाने की महत्वाकांक्षा फलीभूत नहीं हुई तो वह भी पीएम मोदी का विरोध करने का कोई मौका नहीं चूकते थे और जब 2015 में बिहार के विधानसभा चुनाव में भाजपा को नुकसान हुआ तो उन्हें भी मोदी विरोध का एजेंडा मिल गया और वह समय-समय पर पीएम मोदी के विरुद्ध अपना गुस्सा जाहिर करने लगे। इतना ही नहीं, उन्होंने मोदी का विरोध करने वाली टोलियों का भी समर्थन करना शुरू कर दिया तो पीएम मोदी ने उनका पटना साहिब सीट से टिकट ही काट दिया। मगर राजनीतिक महत्वाकांक्षा को पूरी करने के लिये वह कांग्रेस के पाले में जा बैठे और दो नावों पर पैर रखने के लिये उन्होंने अपनी पत्नी पूनम सिन्हा को समाजवादी पार्टी में शामिल कर दिया, परंतु इसके बावजूद उनका राजनीतिक भविष्य अंधेरे में दिखाई दे रहा है। क्योंकि एक्जिट पोल के अनुसार पटनासाहिब में मतदाताओं ने उन्हें नकार दिया है और उधर उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी का गठबंधन भी कुछ खास प्रदर्शन नहीं कर पाया है।

उल्लेखनीय है कि इसी प्रकार गुजरात में भी मोदी विरोध का एजेंडा लेकर तीन चेहरे उभरे थे। पटेल समुदाय से हार्दिक पटेल, ओबीसी समुदाय से अल्पेश ठाकोर और दलित समुदाय से जिग्नेश मेवाणी, परंतु अपने-अपने समाज के मुखर नेता के रूप में उभरने के बाद इन तीनों में भी राजनीतिक महत्वाकांक्षा जागृत हुई, जिससे हार्दिक पटेल और अल्पेश ठाकोर को उनके ही समुदाय से नकार दिया गया। हार्दिक पटेल और अल्पेश ठाकोर की लोकसभा चुनाव लड़ने की मंशा भी पूरी नही हुई और उनका समुदाय भी उनसे नाराज चल रहा है। इस प्रकार टुकड़े-टुकड़े गैंग ने मोदी विरोध के एक मात्र एजेंडे के आधार पर राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने का प्रयास किया, परंतु अब उनके मंसूबे ही टुकड़े-टुकड़े होते दिखाई दे रहे हैं। शत्रुघ्न सिन्हा और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी ऐसी ही कश्तियों पर सवार होकर चुनाव गंगा को पार करना चाहते थे, परंतु उनके मंसूबे भी चूर-चूर होते दिखाई दे रहे हैं।

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