अब अत्याधुनिक राफेल के साथ लक्ष्य भेदेगा ‘स्वर्णिम बाण’, जिसने कारगिल से पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़ा था

* 8 अक्टूबर, 2019 बनेगा भारतीय वायुसेना के लिए ऐतिहासिक दिन

* 68 वर्ष पुराना है ‘Golden Arrows’ Squadron का इतिहास

* 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में राजधानी दिल्ली की ‘रक्षा कवच’ बनी

* 1999 के कारगिल युद्ध में पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़ा

* 2016 में मिग 21 हटाने के कारण बंद पड़ी स्क्वॉड्रन पुन: हुई सक्रिय

आलेख : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 11 सितंबर, 2019 (युवाPRESS)। भारतीय वायुसेना (INDIAN AIR FORCE) यानी IAF के लिए 8 अक्टूबर, 2019 का दिन सामरिक और राष्ट्र रक्षा की दृष्टि से ऐतिहासिक बनने जा रहा है। इस दिन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक पर्व दशहर (विजयादशमी) है और साथ ही वायुसेना दिवस भी है। 8 अक्टूबर, 2019 को दो महत्वपूर्ण अवसरों के साथ भारतीय वायुसेना में एक नया अध्याय भी जुड़ने वाला है, क्योंकि इसी दिन फ्रांस के लड़ाकू विमानों की पहली खेप भारत को मिलेगी, जो भारतीय वायुसेना में शामिल हो जाएगी।

महत्वपूर्ण बात यह है कि फ्रांस से मिलने वाले कुल 36 में से जो 16 राफेल लड़ाकू विमान 8 अक्टूबर को भारत को मिलने वाले हैं, वे वायुसेना की No. 17 Squadron को सौंपे जाने वाले हैं। नंबर 17 स्क्वॉड्रन को वायुसेना में Golden Arrows के नाम से भी जाना जाता है। यह वही गोल्डन एरोस स्क्वॉड्रन है, जिसने वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान तत्कालीन स्क्वॉड्रन लीडर और वर्तमान वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बी. एस. धनोआ के नेतृत्व में मिग 21 विमानों के जरिए पाकिस्तानी घुसपैठियों को मार भगाया था। कारगिल पर तिरंगा फहराने के लिए चलाए गए ऑपरेशन विजय के दौरान गोल्डन एरोस हीरो बन कर उभरी थी।

अंबाला बनेगा राफेल का ठिकाना

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने पिछले 3 वर्षों से बंद पड़ी नंबर 17 स्क्वॉड्रन गोल्डन एरोस को अब राफेल के साथ सुसज्ज कर पुन: सक्रिय करने का निर्णय किया है। 8 अक्टूबर को जब गोल्डन एरोस को राफेल विमान सौंपे जाएँगे, तब वायुसेना की यह इकाई फ्रेंच लड़ाकू विमानों को संचालित करने वाली देश की पहली वायुसैनिक इकाई बन जाएगी। इससे पहले धनोआ ने मंगलवार को 2016 से बंद पड़ी गोल्डन एरोस स्क्वॉड्रन को पुन: सक्रिय करने के लिए मोर्चा संभाल लिया। अंबाला में मंगलवार को आयोजित एक समरोह में धनोआ ने नंबर 17 स्क्वॉड्रन यानी गोल्डन एरोस को पुन: सक्रिय कर दिया। भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से 220 किलोमीटर दूर स्थित हरियाणा के अंबाला एयरबेस पर पहले ही जगुआर और मिग 21 बाइसन तैनात है। अब धनोआ ने मंगलवार को नंबर 17 स्क्वॉड्रन गोल्डन एरोस को पुन: सक्रिय कर दिया है। इसके साथ ही फ्रांस से आने वाले राफेल लड़ाकू विमानों का ठिकाना अंबाला एयरबेस बनने जा रहा है।

ब्रिटिश हैविलैंड वैम्पायर से राफेल तक की यात्रा

भारतीय वायुसेना ने नंबर 17 स्क्वॉड्रन यानी गोल्डन एरोस की स्थापना 1 अक्टूबर, 1951 को की थी। यह स्क्वॉड्रन भारतीय वायुसेना के वेस्टर्न एयर कमांड बठिंडा वायुसैनिक अड्डे पर स्थापित की गई थी। इस स्क्वॉड्रन ने अपनी स्थापना के साथ ब्रिटिश लड़ाकू विमान डि हैविलैंड वैम्पायर एफ एमके 52 को संचालित किया था। जब 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध छिड़ा, तो राजधानी दिल्ली को सुरक्षा कवच देने के लिए गोल्डन एरोस को पूर्व से दिल्ली स्थानांतरित कर दिया गया। गोल्डन एरोस स्क्वॉड्रन ने ब्रिटिश लड़ाकू विमानों के बाद भारतीय लड़ाकू विमान मिग 21 संचालित किए और कारगिल युद्ध में इन्हीं विमानों के जरिए पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़ा, परंतु 2011 से भारत सरकार ने वायुसेना से मिग 21 विमानों को हटाने की प्रक्रिया आरंभ की। इसी प्रक्रिया के अंतर्गत वर्ष 2016 में नंबर 17 स्क्वॉड्रन गोल्डन एरोस को बंद कर दिया गया। यद्यपि इससे पहले 8 नवंबर, 1988 को इस स्क्वॉड्रन को पालम में उसके ‘प्रिसेडेंट’स स्टैण्डर्ड’ के लिए पुरस्कृत किया गया। अब 3 वर्षों से बंद पड़ी इस साहसी और शौर्य की प्रतीक स्क्वॉड्रन को अत्याधुनिक राफेल विमान सौंपे जाने वाले हैं।

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