भारत सहित पूरे विश्व को दीमक की तरह खोखला कर रहा यह असाध्य रोग

* युवा वर्ग को तेजी से चपेट में ले रहा मधुमेह

* फास्ट फूड और कोल्ड ड्रिंक बन रहे माध्यम

रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद, 14 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। अमेरिका में मृत्यु का आठवाँ और अंधेपन का तीसरा सबसे बड़ा कारण यानी मधुमेह (DIABETES) भारत में भी तेजी से बढ़ता जा रहा है। जनवरी 2004 में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान द्वारा दिल्ली में आयोजित “डायबिटीज़ और रिह्यूमेटोलोजी” पर आधारित एक सेमिनार के अनुसार 14 से 25 वर्ष की उम्र के लोगों में यह बीमारी तेजी से बढ़ रही है, जिसका मुख्य कारण है मोटापा और आरामपसंद लाइफ स्टाइल। स्कूलों में पिज्जा, चिप्स, कोल्ड ड्रिंक्स के ज्यादा प्रयोग के साथ आम खान-पान में रिफाइंड खाना, पॉलिश किए गए खाद्य पदार्थ और खाने में फाइबर की कमी से डायबीटीज की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ रही है। मधुमेह से उपजी समस्या के बारे में बढ़ती चिंताओं के प्रत्युत्तर स्वरूप 1991 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) WHO द्वारा अंतरराष्ट्रीय मधुमेह संघ (International Diabetes Federation ) यानी IDF का गठन किया गया था, जिसमें 160 से अधिक देशों को विश्व के सबसे बड़े मधुमेह जागरूकता अभियान में शामिल किया गया और इसके साथ ही 14 नवंबर, 2006 को विश्व मधुमेह दिवस (World Diabetes Day) की शुरुआत की गई, जो संयुक्त राष्ट्र (UN) का आधिकारिक दिवस भी है। विश्व मधुमेह दिवस का उद्देश्य मधुमेह के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाना है। इसे एक वैश्विक प्रतीक के रूप में नीले वृत्त अर्थात आर्कटिक क्षेत्र के लोगों ने प्रस्तुत किया था, जो कि मधुमेह की महामारी के उत्तर में वैश्विक मधुमेह समुदाय की एकता का प्रतीक है। विश्व मधुमेह दिवस और विश्व मधुमेह माह वर्ष 2019 का विषय “परिवार और मधुमेह” है। इसका उद्देश्य परिवार में मधुमेह से होने वाले प्रभाव के बारे में जागरूकता उत्पन्न करना और प्रभावित लोगों के समूह को सहयोग करना है साथ ही मधुमेह के बारे में शिक्षा, रोकथाम, देखभाल और प्रबंधन में परिवार की भूमिका को बढ़ावा देना भी शामिल है। आइए जानते हैं मधुमेह होता क्या है और इसकी खोज किसने की ?

मधुमेह को वैज्ञानिक शब्दावली में डायबिटीज़ मेलाइट्स के नाम से जाना जाता है। डायबिटीज़ मेलाइट्स यूनानी भाषा के शब्द ‘डाइबिटीज़’ और लैटिन भाषा के शब्द ‘मेलाइट्स’ से मिल कर बना है। ‘डाइबिटीज़’ का अर्थ है, होकर निकलना या प्रवाहित होना तथा ‘मेलाइट्स’ का अर्थ है मधु। इस प्रकार डायबिटीज़ मेलाइट्स का अर्थ हुआ मधु का प्रवाहित होना। यह रोग शरीर की कार्यरिकी में हुई गड़बड़ियों के परिणाम स्वरुप उत्पन्न होता है, इसे शरीर के चयापचय से संबंधित एक रोग के रूप में जाना जाता है जो अग्नाशय में स्थित विशेष लैंगरहैंस द्विपिकाओं द्वारा एक विशिष्ट हारमोन इन्सुलिन का पर्याप्त मात्रा में निर्माण न कर पाने के कारण होता है। यह हार्मोन शरीर को शर्करा के सामान्य प्रयोग के लिए समर्थ बनाता है। इसकी कमी के फलस्वरूप रक्त में शर्करा की मात्रा बढ़ जाती है। वर्तमान में 33 अरब 34 करोड़ 51 लाख 67 हज़ार (463 million) से भी अधिक लोग मधुमेह से पीड़ित हैं।

इंटरनेशनल डायबिटीज़ फेडरेशन यानी IDF के डायबिटीज़ एटलस के 9वें संस्करण के अनुसार चीन में मधुमेह के मामलों की संख्या लगभग 11 करोड़ है और भारत में लगभग 7 करोड़ लोग मधुमेह से पाड़ित हैं। भारत में 1995 में मधुमेह रोगियों की संख्या 1 करोड़ 90 लाख थी, जो 2019 में बढ़कर 7 करोड़ हो गई है। अनुमान है कि 2030 में मधुमेह रोगियों की संख्या 8 करोड़ के आसपास हो जाएगी। इस रोग के परिणामस्वरूप शरीर के निचले हिस्से के अंगों में विच्छेदन की संख्या बढ़ी है। मधुमेह (डायबिटीज़) के कारण ही किडनी की ख़राबी, हृदय आघात, पैरों का गैन्ग्रीन और आंखों का अन्धापन अब भारत की मुख्य स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है।

इंसुलिन की खोज

मधुमेह रोग के कारण एवं इसके विभिन्न पहलुओं को समझने हेतु कई लोग प्रयासरत थे। इनमें से एक जोड़ी फ्रेडरिक बैटिंग एवं चार्ल्स बेस्ट की भी थी, जो पैंक्रियाज़ ग्रन्थि द्वारा स्रावित तत्व के रासायनिक संरचना की खोज में लगे हुए थे। इस तत्व को अलग कर उन्होंने अक्टूबर, 1921 में प्रदर्शित किया कि यह तत्व शरीर में ग्लूकोज़ का निस्तारण करने में अहम भूमिका निभाता है और इसकी कमी होने से मधुमेह रोग हो जाता है। इस तत्व को इंसुलिन का नाम दिया गया। इसकी खोज मधुमेह के इतिहास में एक मील का पत्थर सिद्ध हुआ, जिसके लिए फ्रेडरिक बैटिंग एवं चार्ल्स बेस्ट को नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 14 नवंबर को फ्रेडरिक बैटिंग का जन्म दिवस है। अतः विश्व मधुमेह दिवस हेतु इस तिथि का चयन किया गया। फ्रेडरिक बेटिंग के योगदान को याद रखने के लिए इंटरनेशनल डायबेटिक फेडरेशन द्वारा 14 नवंबर को दुनिया के 140 देशों में मधुमेह दिवस मनाया जाता है। प्रारम्भ में “विश्व मधुमेह दिवस” हेतु “यिन और यांग” को प्रतीक चिह्न के लिये चुना गया था।

मधुमेह के प्रकार और लक्षण

मधुमेह मुख्यत: 3 प्रकार के होते हैं। 1: शरीर पर्याप्त इंसुलिन पैदा नहीं करता है। 2: शरीर इंसुलिन पैदा करता है, लेकिन इसे अच्छी तरह से उपयोग नहीं करता है। 3: गर्भावस्था में अस्थायी स्थिति होती है। आनुवंशिकी, उम्र और मधुमेह का पारिवारिक इतिहास में मधुमेह होने की संभावना बढ़ती है तथा इसे बदला नहीं जा सकता है, परंतु अस्वास्थ्यकर भोजन और व्यायाम से इसे संतिलुत किया जा सकता है। मधुमेह होने पर बार-बार मूत्र करने जाना, अत्यधिक प्यास लगना, भार में कमी आना और दृष्टि का धुंधला होना शामिल है।

मधुमेह की रोकथाम और नियंत्रण

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार (एमओएचएफडब्ल्यू) ने मधुमेह की रोकथाम और देखभाल के लिए पहल करते हुए एक मोबाइल एप ‘एम-डायबिटीज़’ की शुरूआत की है। मधुमेह के पीड़ितों को आहार की विशिष्ट सलाह दी जाती है। यह विकार आजीवन रहने वाला है। अतः समय-समय पर रक्त जाँच कराते रहें। नियमित शुगर स्तर की जाँच कराना चाहिए। यदि आपको किसी भी प्रकार का घाव हुआ हो, तो उसे खुला ना छोड़ें। फलों का रस लेने के बजाय, फल खायें। व्यायाम करें और अपना वज़न नियंत्रित रखें। ग्लूकोज़, चीनी, जैम, गुड़, मिठाईयाँ, तले हुए आहार, अल्कोहल का सेवन, सूखे मेवे, बादाम, मूँगफली, आलू, शकरकंद, मटर, सेम जैसी सब्जियाँ, केला, शरीफा, चीकू, अन्जीर, खजूर जैसे फल से परहेज करें। सलाद, कच्ची सब्जि़याँ, सब्जि़यों के सूप, चाय, कॉफ़ी या नीबू पानी आदि पर्याप्त मात्रा में ले सकते हैं।

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