OMG ! जिसने भारत का पहला ‘वास्तविक’ बैंक खोला, उसके प्रपौत्र को उसी बैंक ने DEFAULTER घोषित कर दिया !

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद, 16 जून, 2019 (युवाप्रेस.कॉम)। शीर्षक पढ़ कर आश्चर्य हुआ न ! आश्चर्य तो होगा ही। युगों-युगों से यह रीति चली आई है कि कोई भी व्यक्ति किसी काम का आरंभ करता है, तो आने वाली 7 पीढ़ियों की भलाई के बारे में सोचता है। स्वाभाविक रूप से 76 वर्ष पहले पराधीन भारत में भारत का अपना वास्तविक बैंक स्थापित करने की जिस व्यक्ति ने पहल की थी, उस व्यक्ति ने भले ही राष्ट्र की वित्तीय सेवा करने के उद्देश्य से यह पहल की होगी, परंतु क्या उसने सपने में भी सोचा होगा कि वे जिस बैंक की स्थापना करने जा रहे हैं, 76 वर्षों के बाद वही बैंक उनके प्रपौत्र को विलफुल डिफॉल्टर घोषित कर देगा ?

निश्चित रूप से आपका उत्तर होगा, ‘नहीं’, परंतु ऐसा हुआ है। जी हाँ। आप जिसे यूको बैंक के नाम से जानते हैं, उसने यश बिड़ला ग्रुप के मालिक यशोवर्धन बिड़ला को विलफुल डिफॉल्टर घोषित कर दिया है, क्योंकि ग्रुप की एक कंपनी बिड़ला सूर्या लिमिटेड ने 67 करोड़ रुपए बकाया ऋण लौटाया नहीं है। यूको बैंक का कहना है कि बिड़ला सूर्या लिमिटेड के पास 100 करोड़ रुपए की क्रेडिट लिमिट थी, जिसका 67 करोड़ रुपए से अधिक ब्याज बकाया था। इस ऋण को वर्ष 2013 में नॉन-परफॉर्मिंग एसेट् (NPA) में वर्गीकृत किया गया था। अब यूको बैंक ने यशोवरद्धन बिड़ला को विलफुल डिफॉल्टर घोषित कर दिया है, जिसका अर्थ है कि उनके वर्तमान बिज़नेस और वे जिन-जिन कंपनियों में निदेशक हैं, उन्हें फंडिंग नहीं मिल सकेगी।

कौन हैं यशोवर्धन बिड़ला ?

कहते हैं समय बड़ा बलवान होता है। यशोवर्धन बिड़ला को उस यूको बैंक-कोलकाता ने डिफॉल्टर घोषित किया है, जिसकी स्थापना उनके पूर्वज घनश्याम दास बिड़ला (जी. डी. बिड़ला) ने की थी। यशोवर्धन जी. डी. बिड़ला के प्रपौत्र हैं। बिड़ला परिवार वटवृक्ष पर दृष्टि डालें, तो इसके आरंभ का इतिहास शिव नारायण बिड़ला (1838-1910) से मिलता है। शिव नारायण के पुत्र थे बलदेव दास बिड़ला (1863-1956)। बलदेव दास के चार पुत्र थे जुगल किशोर बिड़ला, रामेश्वर दास बिड़ला, घनश्याम दास बिड़ला और ब्रज मोहन बिड़ला। इनमें रामेश्वर दास के दो पुत्र गजानन व माधव प्रसाद बिड़ला हुए। इनमें गजानन बिड़ला के पुत्र अशोक और अशोक बिड़ला के पुत्र यशोवर्धन हुए, जिन्हें यूको बैंक ने डिफॉल्टर घोषित किया है। इसे उल्टी दिशा में देखा जाए, तो यशोवर्धन के पिता अशोक बिड़ला थे, सगे दादा गजानन थे, पारिवारिक दादा माधव प्रसाद हुए। इसी क्रम में यशोवर्धन बिड़ला के सगे परदादा रामेश्वर दास बिड़ला थे, जबकि जुगल किशोर, घनश्याम दास और ब्रज मोहन पारिवारिक परदादाता थे। इस तरह महत्वपूर्ण बात यह है कि यशोवर्धन उस यूको बैंक की ओर से डिफॉल्टर घोषित किए गए हैं, जिसे उनके पारिवारिक परदादा यानी पूर्वज घनश्याम दास बिड़ला ने स्थापित किया था। इस बिड़ला परिवार में ही आदित्य बिड़ला जैसे उद्योगपति भी शामिल हैं।

क्या था जी. डी. बिड़ला का सपना ?

9 अगस्त, 1942 को महात्मा गांधी ने भारत छोड़ो आंदोलन आरंभ कर दिया था। एक तरफ देश अब अंग्रेजों के शासन को और सहन करने को तैयार नहीं था और स्वतंत्रता संग्राम के ताबूत में आख़िरी कील लगाने की ओर अग्रसर था, उसी दौरान भारतीय औद्योगिक पुनर्जागरण के प्रखर पुरोधा घनश्याम दास बिड़ला यानी जी. डी. बिड़ला ने एक वास्तविक भारतीय बैंक की परिकल्पना की और 6 जनवरी, 1943 को अपनी इस नवोदित परिकल्पना को मूर्त देते हुए द युनाइटेड कॉमर्शियल बैंक लिमिटेड की स्थापना की। स्वतंत्रता से पूर्व बिड़ला द्वारा स्थापित यह बैंक पहला वास्तविक भारतीय बैंक था। यद्यपि भारत में बैंकिंग प्रणाली का आरंभ तो 1770 से हो गया, जब ब्रिटिश हुक़ूमत ने बैंक ऑफ हिन्दुस्तान की स्थापना की। भारत में आधुनिक बैंकिंग प्रणाली ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने 2 जून, 1806 में बैंक ऑफ कलकत्ता की स्थापना के साथ आरंभ की। इसके बाद अंग्रेजों ने ही 2 जून, 1809 को इस बैंक ऑफ बंगाल के नाम से पुनर्गठित किया। 1840 में बैंक ऑफ बॉम्बे और 1843 में बैंक ऑफ मद्रास की स्थापना की। 28 जनवरी, 1921 को बैंक ऑफ बंगाल, बैंक ऑफ बॉम्बे और बैंक ऑफ मद्रास का विलय कर इम्पीरियल बैंक ऑफ इंडिया (भारतीय शाही बैंक) स्थापित किया गया। अब तक भारत में स्थित सारे बैंक ब्रिटिश शासन द्वारा स्थापित बैंक थे। 1 जुलाई, 1994 को इम्पीरियल बैंक ऑफ इंडिया को भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के रूप में स्थापित किया गया।

जी. डी. बिड़ला का बैंक यूँ बन गया यूको बैंक

जी. डी. बिड़ला ने 6 जनवरी, 1943 को द यूनाइटेड कॉमर्शियल बैंक लिमिटेड की स्थापना कर उसका पंजीकृत व प्रधान कार्यालय कलकत्ता में रखा। स्वतंत्रता के बाद इंदिरा गांधी की ओर से आरंभ किए गए बैंकों के राष्ट्रीयकरण अभियान के तहत 19 जुलाई, 1969 को बिड़ला का यह बैंक भी सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक बन गया। वर्ष 1985 में इस बैंक का नाम बदल कर यूको बैंक रखा गया। इसका मुख्यालय आज भी कोलकाता में है। इस तरह बिड़ला द्वारा स्थापित यह बैंक अब सरकारी उपपक्रम बन चुका है और इसीलिए बैंक ने बिड़ला परिवार के वंशज होने के बावजूद यशोवर्धन बिड़ला को विलफुल डिफॉल्टर घोषित कर दिया है।

Leave a Reply

You may have missed