ख़बर काम की : INCOME TAX से बचने के लिए अंधाधुंध निवेश नहीं, अपनाएँ ये आसान तरीके !

अहमदाबाद, 8 जून, 2019 (युवाप्रेस डॉट कॉम)। अगर आप वेतनभोगी हैं और अपनी आय को इन्कम टैक्स से बचाना चाहते हैं तो जरूरी नहीं कि आप बिना सोचे-समझे इन्वेस्टमेंट करने लगें। आप अपने बूढ़े माता-पिता यानी 60 साल से अधिक उम्र के सीनियर सिटीजन के लिये स्वास्थ्य बीमा लेकर उसका प्रीमियम भरें तो आपको अपने बूढ़े माता-पिता का आशीर्वाद तो मिलेगा ही, साथ ही आप इन्कम टैक्स के सेक्शन 80D के तहत 30,000 रुपये तक की छूट भी पा सकते हैं। इसी प्रकार आप अपने लिये, अपने पार्टनर (पति या पत्नी) अथवा बच्चों के लिये भी प्रीमियम भरकर 25,000 रुपये तक टैक्स बचा सकते हैं।

डेढ़ से दो लाख तक की आय पर होगी कर बचत

सामान्यतः करदाता अपनी आय को आयकर से बचाना चाहते हैं अथवा कम से कम आयकर चुकाने के उपाय ढूंढते हैं। इसको लेकर वह असमंजस में रहते हैं और सही ज्ञान न होने से जैसा अन्य लोग बताते हैं, वैसा मार्ग अपनाकर अंधाधुंध निवेश करने लगते हैं। हालाँकि अपनी आय को आयकर मुक्त रखना इतना मुश्किल भी नहीं है। बस, जरूरत है आयकर के विविध प्रावधानों की जानकारी प्राप्त करने की। अगर आप करदाता हैं तो आयकर अधिनियम के सेक्शन 80C, 80CC, 80CCD, के तहत अधिक से अधिक डेढ़ लाख रुपये तक आयकर छूट प्राप्त कर सकते हैं। इसी प्रकार इन्कम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80CCD (1B) और सेक्शन 80CCD (1B) के तहत कुल 2 लाख रुपये तक की आय को आयकर से बचाया जा सकता है। इसमें रिटायरमेंट फंड बनाने में भी मदद मिलती है।

पीपीएफ हो सकता है कर बचत का अच्छा विकल्प

करदाता आयकर के सेक्शन 80C के तहत जीवन बीमा प्रीमियम, बैंक की फिक्स्ड डिपॉज़िट, ट्यूशन फीस, सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र (NSC), ELSS, पेंशन फंड्स आदि में निवेश करके आयकर छूट का लाभ प्राप्त कर सकते हैं। पब्लिक प्रोविडंड फंड (PPF) का अकाउंट खुलवाया जा सकता है, जिसका मैच्युरिटी पीरियड 15 साल का होता है। इस अकाउंट में मिलने वाला ब्याज करमुक्त होता है। सरकार ने अप्रैल से जून तक की तिमाही के लिये इसकी ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है और ब्याज दर 8 प्रतिशत ही रखी है। इस अकाउंट के लिये ब्याज दर को हर तीन माह में रिवाइज़ किया जाता है।

एनपीएस से होगी कर बचत

नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) अकाउंट दो प्रकार के होते हैं। एनपीएस टायर-1 अकाउंट प्राइमरी अकाउंट होता है, जो लॉक-इन पीरियड से लैस होता है, जबकि एनपीएस टायर-2 अकाउंट बिना किसी लॉक-इन पीरियड वाला ऑप्शनल अकाउंट होता है। सब्सक्राइबर्स इन्कम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80CCD (1B) और सेक्शन 80CCD (1B) के तहत कुल 2 लाख रुपये तक की आय को आयकर से बचाया जा सकता है। इसमें रिटायरमेंट फंड बनाने में भी मदद मिलती है।

बीमा प्रीमियम और म्युच्युअल फंड्स भी हैं अच्छे विकल्प

इस प्रकार आयकर के सेक्शन 80C के अलावा भी कई दूसरे अलाउंस हैं, जिनके माध्यम से वेतनभोगी व्यक्ति आयकर को कम कर सकते हैं। इनमें इन्कम टैक्स एक्ट-1961 के तहत बीमा प्रीमियम, एनपीएस, मेडिकल इंश्योरेंस, टैक्स सेविंग्स म्युच्युअल फंड्स आदि शामिल हैं।

करदाता किराये के घर में रहता है तो सेक्शन 80GG के तहत अधिकतम 60,000 रुपये की छूट पा सकता है। हालाँकि करदाता यह छूट तब ही पा सकता है जब उसे कंपनी से HRA न मिलता हो। सेक्शन 80G के तहत 2,000 रुपये से अधिक के सभी डिमांड ड्राफ्ट, बैंक ट्रांसफर, क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड से दिये जाने वाले डोनेशन पर आयकर छूट पाई जा सकती है।

सेक्शन 80TTA के तहत बचत अकाउंट से मिलने वाले ब्याज पर भी छूट मिलती है। हालाँकि इस सेक्शन के तहत बैंक की फिक्स्ड डिपॉज़िट या टाइम डिपॉज़िट से मिलने वाले ब्याज पर कोई टैक्स छूट नहीं मिलती है। मोदी सरकार-2 के बजट में मध्यम वर्ग के लिये इन्कम टैक्स स्लैब में बदलाव किया जा सकता है। इन्कम टैक्स निवेश छूट की सीमा 1.50 लाख से बढ़ाई जा सकती है। 50 साल से चले आ रहे इन्कम टैक्स कानून में भी बदलाव किया जा सकता है। इसके लिये सरकार ने अलग से टास्क फोर्स बनाई है।

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