क्या बिटकॉइन को करंसी का दर्जा नहीं देगी सरकार

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संसद का शीत सत्र शुरू हो गया है. किसानों के मुद्दे के अलावा कई और मसले हैं जिन पर चर्चा होनी है. इसी में एक अहम मुद्दा cryptocurrency का है. लोग जानना चाहते हैं कि सरकार का आखिर Bitcoin, Ether or Dogecoin जैसी Cryptocurrency को लेकर क्या विचार है. इस बारे में Finance Ministry ने सोमवार को एक लिखित जवाब में स्पष्ट कर दिया कि देश में Bitcoin को करंसी का दर्जा देने का कोई प्रस्ताव नहीं है. सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि वह Bitcoin के ट्रांजेक्शन के आंकड़े नहीं रखती.

सोमवार को दो MP Sumalatha Ambareesh and DK Suresh ने Union Finance Minister से cryptocurrency को लेकर सवाल पूछा. दोनों MP Finance Minister Nirmala Sitharaman से जानना चाह रहे थे कि क्या सरकार के पास Bitcoin के ट्रांजेक्शन से जुड़ी कोई जानकारी है या सरकार को ये बात जानकारी में है कि भारत में चुपके से Bitcoin का ट्रांजेक्शन कितनी तेजी से बढ़ रहा है.

गला सवाल यह पूछा गया कि क्या सरकार की ऐसी कोई योजना है जिसमें देश में बिटकॉइन को करंसी की पहचान या दर्जा देने की तैयारी है. इसी के साथ सांसदों ने केंद्रीय मंत्री से कहा कि अगर बिटकॉइन को लेकर ऐसी कोई जानकारी है तो उसे संसद के पटल पर रखा जाए. सरकार इन सवालों के जवाब लिखित में दिए जिसे संसद पटल पर रखा गया.

Bitcoin एक डिजिटल करंसी है जो लोगों को सामान और सेवा दोनों की खरीदारी की सुविधा देती है. रुपये-पैसे का भी एक्सचेंज होता है जिसमें किसी बैंक के शामिल होने की जरूरत नहीं. यानी, बिटकॉइन से ट्रांजेक्शन करने या खरीदारी करने के लिए किसी बैंक में खाता होना जरूरी नहीं. इसमें किसी Debit, credit card या अन्य थर्ड पार्टी की भी जरूरत नहीं होती.

क्या है सरकार की तैयारी

बिटकॉइन को 2008 में प्रोग्रामरों के एक अज्ञात समूह ने एक वर्चुअल करंसी के साथ-साथ एक इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट सिस्टम के रूप में पेश किया था. यह कथित तौर पर पहली डी-सेंट्रलाइज्ड डिजिटल करंसी है जहां पीयर-टू-पीयर लेनदेन बिना किसी मध्यस्थ के होते हैं.

इस बीच, सरकार की योजना संसद के चल रहे शीतकालीन सत्र में आधिकारिक Digital Currency Bill 2021 पेश करने की है. यह बिल क्रिप्टोकरंसी के रेगुलेशन से जुड़ा है. बिल में डिजिटल करंसी से जुड़ी टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने के लिए कुछ निजी क्रिप्टोकरंसी को छोड़कर सभी पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास किया गया है, जबकि आरबीआई द्वारा आधिकारिक डिजिटल करंसी की अनुमति दी गई है.

रिजर्व बैंक पूर्व में क्रिप्टोकरंसी पर अपनी असहमति जाहिर कर चुका है. उसका मानना है कि इससे देश की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ सकता है. माना जा रहा है कि रिजर्व बैंक ने इसे पूरी तरह प्रतिबंधित करने की इच्छा जताई थी लेकिन वित्तीय मामलों की स्टैंडिंग कमेटी इसके पक्ष में नहीं है. समिति चाहती है कि एक बीच का रास्ता निकाला जाए ताकि लाखों निवेशकों का हित सध जाए जिन्होंने करोड़ों रुपये बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरंसी में लगाया है. कहा जा रहा है कि सरकार बिटकॉइन को सोने-चांदी, शेयर या बॉन्ड की तरह फाइनेंशियल एसेट का दर्जा दे सकती है जिससे निवेशक ट्रेडिंग करने में सक्षम होंगे. इसकी निगरानी सेबी के पास जा सकती है.

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