पहली बार गंगा के पानी में दिखे विदेशी पक्षी

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आम तौर पर Arctic क्षेत्र के समुद्र तटों पर रहने वाले ‘ग्रे प्लॉवर’ पहली बार इस साल गंगा के पानी पर अठखेलियाँ करते हुये देखे गए। करीब 11-12 इंच लंबा यह पक्षी आर्कटिक द्वीप और Alaska , Canada तथा Russia  के तटीय क्षेत्रों में रहता है। जब इन इलाकों में ठंड काफी बढ़ जाती है तो यह दुनिया के कई अपेक्षाकृत गर्म देशों के समुद्र तटों पर प्रवास के लिए आते हैं।

सुबह-शाम पक्षियों की मौजूदगी भी खुद प्रकृति के सौंदर्य का श्रृंगार कर रही है। इसके अलावा हसनपुर तहसील क्षेत्र के गांव महरपुर गुर्जर में भी गंगा तट पर प्रवासी पक्षियों का डेरा बसा है।

गंगा में 22 नालों के जरिए बहाए जाने वाले अपशिष्ट पदार्थ फिलहाल लॉकडाउन के चलते सील हैं, जिसके बाद यह परिणाम निकलकर आया है कि गंगा के पानी में एमपीएन/ 100 मिलीलीटर के नमूने में कोई Bacteria नहीं है। 3 मिलीग्राम/लीटर से नीचे जैव रासायनिक ऑक्सीजन का स्तर भी कम है

गंगा जल को निर्मल बनाने के लिए करोड़ों रुपयों की योजनाएं शुरू की गई। हजारों करोड़ों रुपये खर्च भी किए गए, लेकिन गंगा का जल साफ होने के बजाए और प्रदूषित हो गया, लेकिन इस बार गंगा को साफ करने के लिए न तो करोड़ों रुपये खर्च करने पड़े और न ही कोई मेहनत। Coronavirus  के कारण हुए Lockdown  ने नदी को स्वतः ही निर्मल बना दिया। इससे गंगा का पानी हरिद्वार और ऋषिकेश में ही नहीं, बल्कि भारत के अनेकों स्थानों पर नहाने योग्य हो गया है।

ऐसे में Uttarakhand ही नहीं, बल्कि Uttar Pradesh , Bihar , Jharkhand और West Bengal तक, या यूं कहें की गोमुख से लेकर गंगा सागर तक गंगा नदी का जल निर्मल हो गया है। CPCB ( Central Pollution Control Board) की Report में गंगा जल को फिलहाल नहाने योग्य बताया है।

ऐसे में Lockdown  ने हमे बता दिया कि नदी को साफ करने के लिए करोड़ों रुपयो की जरूरत ही नहीं है। जरूरत सिर्फ नदी को गंदा न करने की है, क्योंकि नदी तो साफ ही है। इसलिए Coronavirus  ने हमे भविष्य की राह दिखाई है। अब देखना ये होगा कि कैसे सरकार नदियों को साफ करने की योजना बनाती है।

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