VIDEO : ज़िद के आगे जीत है : इस ‘भागीरथी’ ने 105 वर्ष की आयु में बहाई ज्ञान की ‘गंगा’…

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रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 20 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। भागीरथ शब्द सुनते ही हमें पौराणिक ऋषि भागीरथ स्मरण हो आते हैं, जिन्होंने शिव की जटा से गंगा को धरती पर प्रवाहित किया था और इसीलिए गंगा नदी का एक नाम भागीरथी भी है, परंतु आज हम एक ऐसी कन्या, ऐसी पुत्री, ऐसी बहन, ऐसी पत्नी, ऐसी माता और ऐसी दादी-नानी की बात करने जा रहे हैं, जिसने हर रूप में संघर्षों से जूझने के पश्चात् भी ज्ञान प्राप्ति की ज्योति को बुझने नहीं दिया और 105 वर्ष की आयु में ज्ञान की गंगा बहाने में सफलता प्राप्त की।

जी हाँ ! यह सत्य घटना है। कहते हैं कि मानव जीवन में सीखने या शिक्षा या ज्ञान प्राप्ति की आयु नहीं होती है। जीवन यापन के दौरान व्यक्ति जहाँ पद्धतिपूर्ण शिक्षा प्राप्त करता है, वहीं व्यावहारिक शिक्षा भी उसे समाज से मिलती रहती है। हम केरल की जिस 105 वर्षीय भागीरथी अम्मा की बात करने जा रहे हैं, उन्होंने एक नारी के हर रूप में अपने उत्तरदायित्वों का निर्वहन किया, जिसके कारण मन में शिक्षा की जो ललक थी, वह पूरी नहीं हो सकी, परंतु अब 105 वर्ष की हो चुकीं भागीरथी अम्मा ने केरल राज्य साक्षरता मिशन के अंतर्गत चौथी कक्षा के समकक्ष परीक्षा उत्तीर्ण की है। भागीरथी ने जब से होश संभाला, तब से पढ़ना चाहती थीं, परंतु प्रारब्ध व कर्तव्य कर्म सदैव उनकी इस इच्छा के आड़े आते रहे। यद्यपि अब जब अवसर मिला, तो उन्होंने आयु को आड़े नहीं आने दिया और चौथी कक्षा की परीक्षा उत्तीर्ण करके दिखाई।

कौन हैं भागीरथी और क्या है उनकी कहानी ?

भागीरथी अम्मा बचपन से पढ़ाई करना चाहती थीं, परंतु माता की मौत और निर्धनता के चलते भाई-बहनों का उत्तरदायित्व उन पर आन पड़ा। भागीरथी तीसरी कक्षा तक ही पढ़ाई कर सकीं। इसके बाद विवाह हुआ, तो गृहस्थ जीवन की ज़िम्मेदारियों में उलझ गईं, परंतु पढ़ाई की इच्छा अभी भी जीवंत थी। वे इस इच्छा को पूरा करने का प्रयास करतीं, उससे पहले उनके पति 6 संतानों को छोड़ कर दुनिया से अलविदा हो गए। उस समय भागीरथी की आयु 30 वर्ष की थी। अब भागीरथी पर बच्चों के लालन-पालन का उत्तरदायित्व आन पड़ा। उन्होंने पढ़ाई की प्रतीक्षा नहीं छोड़ी। अब जबकि भागीरथी तमाम उत्तरदायित्वों से निर्मुक्त हो चुकी थीं, तब उन्होंने केरल राज्य साक्षरता मिशन की चौथी कक्षा समकक्ष परीक्षा में भाग लिया। मिशन के निदेशक पी. एस. श्रीकला ने बताया कि भागीरथी केरल साक्षरता मिशन के अब तक के इतिहास में सबसे वयोवृद्ध समकक्ष शिक्षा हासिल करने वाली व्यक्ति बन गई हैं। मिशन के विशेषज्ञ वसंत कुमार के अनुसार भागीरथी अम्मा को लिखने में दिक्कत होती है इसलिए उन्होंने पर्यावरण, गणित और मलयालम के तीन प्रश्नपत्रों का हल तीन दिन में लिखा है और इसमें उनकी छोटी बेटी ने सहायता की है। इस उम्र में भी उनकी याद्दाश्त तेज है और न तो उन्हें देखने में कोई समस्या आती है और अब भी बहुत अच्छे से गा लेती हैं। उन्होंने बताया कि अम्मा परीक्षा में हिस्सा लेकर बहुत खुश हैं। अम्मा जब नौ साल की थीं, तो वह तीसरी कक्षा में पढ़ती थीं और इसके बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। इतनी मेहनत और लगन से पढ़ाई करने वाली अम्मा के पास आधार कार्ड नहीं है, इसलिए उन्हें न तो विधवा पेंशन मिलती है और न ही वृद्धा पेंशन मिलती है। वसंत कुमार ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि अधिकारी अम्मा को पेंशन दिलाने के लिए कदम उठाएँगे। यहाँ स्मरण दिलाना चाहेंगे कि केरल में पिछले वर्ष 96 साल की कार्तिय्यानी अम्मा ने साक्षरता परीक्षा में सबसे अधिक यानी 100 अंक में से 98 अंक प्राप्त किए थे। केरल के इस साक्षरता मिशन का लक्ष्य अगले चार वर्षों में राज्य को पूरी तरह से साक्षर बनाना है।

सही कहते हैं युवाPRESS के मुख्य सम्पादक आई. के. शर्मा कि ज़िंदगी में संघर्ष कितना है, ये सब जानता हूँ… आप भी सुनिए :

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