156 साल पुराने बांके बिहारी मंदिर के नवनिर्माण की बन सकती है रूपरेखा

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एक निजी संस्था द्वारा कराई गयी बांके बिहारी मंदिर, वृन्दावन की Geological Investigation Report के अनुसार, मंदिर के दीवारों में कई जगह दरार आ गई है। इसके अलावा गर्भगृह की जमीन धंस रही है। नींव भी कमजोर हो चुकी है। इन बातों ने मंदिर प्रबंधन को चिंतित कर दिया है। अब मंदिर प्रबंधन आईआईटी दिल्ली के सर्वे रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है।

वृंदावन स्थित ठाकुर श्री बांके बिहारी मंदिर में तीन माह पूर्व अचानक मुख्य परिसर का फर्श धंस गया था। इसके बाद मंदिर प्रबंधन ने तत्काल रिसीवर मथुरा मुंसिफ की अनुमति के उपरांत IIT Delhi, केंद्रीय पुरातत्व विभाग व अन्य निजी निर्माण एजेंसियों के सहयोग से सम्पूर्ण परिसर की भूगर्भीय व तकनीकी जांच करवाई। इसके अलावा निजी संस्था द्वारा भी मन्दिर का GPR (Ground Penetrating Radar) तकनीक से परीक्षण किया गया। साथ ही भूगर्भीय जांच के दौरान मिट्टी के नमूने भी लैब में भेजे गए। लंबी तकनीकी जांच प्रक्रिया के बाद निजी एजेंसियों की जो रिपोर्ट सामने आई है, वो बेहद चौंकाने वाली है।

 श्री बांके बिहारी मंदिर के सेवायत अनंत गोस्वामी जी ने बताया कि रिपोर्ट के अनुसार मन्दिर के कई हिस्सों में दरार आ चुकी है। नींव में पानी का लगातार रिसाव होने से मन्दिर का एक हिस्सा गेट नम्बर 4 के समीप करीब डेढ़ इंच तक धंस चुका है। खास बात यह है कि करीब डेढ़ सौ वर्ष पूर्व सन् 1864 में निर्मित मन्दिर की इमारत भूकंप रोधी भी नहीं है। तेज भूकम्प की स्थिति में मन्दिर की इमारत को भारी नुकसान हो सकता था। अब मंदिर को भविष्य में होने वाले नुकसान से बचाने के लिए विस्तृत रूपरेखा  तैयार की जा रही है।

कुछ काम शुरू भी हो चुका है। इसमें मुख्य परिसर में करीब 12 से 15 मीटर तक 450 एमएम के 65 कंक्रीट के खंभे डाले जा रहे हैं। जिसमें से 45 खंभों को डालने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इसके बाद अलग अलग तरीके की 7 परत बनाई जाएगी। जिससे मन्दिर को भविष्य के लिए मजबूती दी जा सके।

श्री अनंत गोस्वामी जी ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रशासन को मंदिर की तरफ ध्यान देना चाहिए क्यूंकि हर दिन मंदिर में लाखों की तादाद में श्रद्धालु अपने प्रिये बांके बिहारी के दर्शन करने पहुँच जाते हैं और अभी तो Lockdown के कारण श्रदालुओं के मंदिर में प्रवेश पर पाबन्दी है।

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