16 दिसंबर 1971 के ऐतिहासिक भारत-पाक युद्ध की पूरी कहानी

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16 दिसंबर 1971 (विजय दिवस) का दिन भारतीय इतिहास का ऐसा गौरवशाली पल है, जिसे हमेशा याद रखा जाएगा। बता दें कि इसी दिन पाकिस्तान ने भारत की सेना के आगे घुटने टेके, जिसके बाद बांग्लादेश को आजादी मिली। आइए जानते हैं इसका पूरा इतिहास-

 

कैसे हुई शुरुआत

 

जैसा कि सभी जानते हैं कि 1947 में आजादी के साथ ही भारत-पाक का धर्म के आधार पर बंटवारा हुआ। चूंकि बंगाल की बड़ी आबादी मुस्लिम थी, इसलिए यह हिस्सा भी पाकिस्तान के खाते में गया। लेकिन भौगोलिक तौर पर यह हिस्सा पाकिस्तान से जुड़ा नहीं था। इस तरह से पाकिस्तान, वेस्ट पाकिस्तान और ईस्ट पाकिस्तान के रुप में जाना गया। ईस्ट पाकिस्तान वाला हिस्सा बंगाल का हिस्सा था, वहीं वेस्ट पाकिस्तान का हिस्सा पंजाब वाला हिस्सा या कहें कि आज वाला पाकिस्तान था। कम ही लोग जानते होंगे कि ईस्ट पाकिस्तान और वेस्ट पाकिस्तान को जोड़ने के लिए मोहम्मद अली जिन्ना ने भारत के बीचों-बीच से गुजरने वाले एक कोरिडोर की मांग की थी, जिसे पंडित जवाहर लाल नेहरु ने ठुकरा दिया था।

16 December

 

East Pakistan हुआ भेदभाव का शिकार

 

ईस्ट वाला हिस्सा पाकिस्तान का पिछड़ा इलाका था, वहीं वेस्ट वाला इलाका संपन्न माना जाता था। यहां तक कि पाकिस्तान की पूरी सरकार वेस्ट पाकिस्तान से ही चलायी जाती थी। दोनों हिस्सों के बीच भेदभाव यहीं खत्म नहीं हुआ। ईस्ट पाकिस्तान की जनसंख्या वेस्ट पाकिस्तान के मुकाबले ज्यादा थी, इसके बावजूद यहां कुल बजट का सिर्फ 30 प्रतिशत हिस्सा ही खर्च किया जाता था। सांस्कृतिक तौर पर दोनों हिस्से अलग थे। वेस्ट पाकिस्तान में जहां ऊर्दू और पंजाबी भाषा बोली जाती थी, वहीं ईस्ट में बंगाली। यही कारण था ईस्ट पाकिस्तान और वेस्ट पाकिस्तान के बीच दूरियां आनी शुरु हो गई।

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इसी भेदभाव का नतीजा था कि ईस्ट पाकिस्तान में स्वायत्ता (Autonomy) की मांग उठने लगी। इस दौरान ईस्ट पाकिस्तान की बंगाली नेशनल पार्टी के अध्यक्ष शेख मुजीब-उर-रहमान ईस्ट पाकिस्तान के नेता बनकर उभरे। जिनके नेतृत्व में ईस्ट पाकिस्तान में आजादी की मांग जोर पकड़ने लगी आखिरकार 26 मार्च 1971 में ईस्ट पाकिस्तान ने आजादी की घोषणा कर दी और इस तरह से बांग्लादेश का निर्माण हुआ।

इसके बाद पाकिस्तानी सेना ने इस विद्रोह को दबाने के लिए “ऑपरेशन सर्चलाइट” की शुरुआत की। बता दें कि ऑपरेशन सर्चलाइट के तहत पाकिस्तानी सेना ने ईस्ट पाकिस्तान में नरसंहार शुरु कर दिया। इस ऑपरेशन के तहत ईस्ट पाकिस्तान के बुद्धिजीवियों, लेखकों, नेताओं आदि को मारा गया। बताया जाता है कि इस दौरान पाकिस्तानी सेना ने ईस्ट पाकिस्तान में करीब 3-5 लाख महिलाओं के साथ बलात्कार किया।

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भारत लड़ाई में कूदा

 

ईस्ट पाकिस्तान में हुए नरसंहार के कारण करीब 1 करोड़ लोग पलायन कर भारत पहुंच गए। जिससे भारत पर काफी आर्थिक दबाव पड़ा। इसके बाद भारत ने पाकिस्तान पर ईस्ट पाकिस्तान की समस्या को सुलझाने का दबाव बनाया जिससे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया। यह बात साल 1971 के अक्टूबर-नवंबर महीने की है, जब भारत-पाकिस्तान के बीच लड़ाई का तनाव चरम पर पहुंच गया। इसके बाद 3 दिसंबर 1971 को पाकिस्तानी सेना ने भारत पर हवाई और समुद्री हमला कर दिया। इसके बाद भारत ने भी कड़ा जवाब दिया। 4 दिसंबर को भारतीय नौसेना ने “ऑपरेशन ट्राइडेंट” चलाया और पाकिस्तान के कराची बंदरगाह पर कई जहाजों को डूबोकर उसे बड़ा झटका दिया।

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कुल 13 दिन चली इस लड़ाई में भारत ने पाकिस्तान को काफी नुकसान पहुंचाया। जिसके बाद पाकिस्तानी सेना के जनरल एएके नियाजी ने अपने 90000 सैनिकों के साथ ढाका में 16 दिसंबर 1971 के दिन आत्मसमर्पण कर दिया। इस लड़ाई के बाद ही भारत और पाकिस्तान के बीच 2 जुलाई 1972 को ऐतिहासिक शिमला समझौता हुआ। इस समझौते के तहत ही कश्मीर पर भारत की पकड़ कह सकते हैं कि और मजबूत हुई और इस तरह 1971 की लड़ाई इतिहास के पन्नों में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गई।

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