क्या भारत में राजनीति एक ‘खज़ाना’ है, जो दिन दूना-रात चौगुना बढ़ता जाता है ?

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* ‘करप्ट कल्चर’ का एक और नमूना हैं कुलदीप बिश्नोई !

* जब गोडाउन में ही गड़बड़ है, तो शोरूम तो ऐसा ही होगा न !

विशेष टिप्पणी : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद, 29 जुलाई, 2019 (युवाPRESS)। क्या भारतीय राजनीति कोई ख़जाना है, जो दिन दूना-रात चौगुना बढ़ता जाता है ? क्या कुलदीप बिश्नोई कांग्रेस के तथाकथित ‘करप्ट कल्चर’ का एक और नमूना हैं ? कुलदीप बिश्नोई उस दिग्गज अवसरवादी हरियाणवी नेता भजन लाल के पुत्र हैं, जिनको किसी एक पार्टी का नेता नहीं कहा जा सकता। ऐसे में हिन्दी फिल्म ‘हंगामा’ में अभिनेता परेश रावल का वह डायलॉग अनायास ही याद आजाता है, ‘जब गोडाउन में ही गड़बड़ है, तो शोरूम तो ऐसा ही होगा न !’ यानी कि जब पिता भजन लाल का राजनीतिक इतिहास ही विवादों, भ्रष्टाचार और अवसरवाद से सना हुआ हो, तो पुत्र कुलदीप से प्रामाणिकता के उच्च आदर्शों की अपेक्षा कैसे की जा सकती है।

जी हाँ। हम हरियाणा के एक कांग्रेस विधायक कुलदीप बिश्नोई की बात कर रहे हैं, जिनके यहाँ आयकर विभाग (IT) ने पिछले छह दिनों से छापामारी अभियान छेड़ रखा था और इस अभियान से जो रहस्योद्घाटन हुआ है, उसने यही सवाल पैदा किया है कि क्या भारत में लोगों ने राजनीति को काली कमाई का धंधा समझ लिया है ? यदि ऐसा न होता, तो आईटी छापों में एक मामूली विधायक के पास से 200 करोड़ की विदेश में जमा संपत्ति का खुलासा कैसा होता ? आईटी विभाग के अनुसार छह दिन चली छापेमारी में कुलदीप बिश्नोई के दिल्ली, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में 13 ठिकानों पर जाँच-पड़ताल की गई। इस छापेमारी में 200 करोड़ की विदेशी काले धन के अलावा 30 करोड़ की कर चोरी का भी खुलासा हुआ है। आईटी की कई सालों से बिश्नोई पर नज़र थी। आईटी विभाग को ब्रिटेन, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), पनामा, बीवीआई, जर्सी में कुलदीप बिश्नोई की संपत्ति का पता चला है, जिसे उन्होंने अलग-अलग नामों से जमा कर रखा था। इनमें से एक आदमी ने कैरेबियाई द्वीप में नागरिकता लेने का भी प्रयास किया था। जाँच में यह भी पता चला कि कुलदीप बिश्नोई का हीरों का व्यवसाय है और भगौड़े नीरव मोदी तथा मेहुल चोकसी के साथ भी बिश्नोई के संबंध हैं। संभव है कि पंजाब नेशनल बैंक घोटाले (PNB SCAM) में भी कुलदीप का हाथ हो।

कौन हैं कुलदीप बिश्नोई ?

अब आपको बताते हैं कि कुलदीप बिश्नोई कौन हैं ? वर्तमान में हरियाणा के आदमपुर से विधायक कुलदीप बिश्नोई 1998 में पहली बार विधायक बने थे। वैसे 1968 से आदमपुर सीट पर बिश्नोई परिवार का कब्जा है। लोकसभा चुनाव 2004 में बिश्नोई ने हरियाणा के ददो पूर्व मुख्यमंत्रियों ओम प्रकाश चौटाला और बंशीलाल के पु्रों को भिवानी सीट से हराया था। दरअसल कुलदीप बिश्नोई हरियाणा के दिग्गज नेता भजनलाल के पुत्र हैं। पिता से विरासत में मिली राजनीति में कुलदीप बिश्नोई ने जम कर काली कमाई का गोरखधंधा चलाया। पत्नी रेणुका बिश्नोई हाँसी से विधायक हैं। कुलदीप और रेणुका दोनों ही 2016 से कांग्रेस पार्टी में हैं, परंतु इनकी तथाकथित भ्रष्ट संस्कृति की जड़ में पिता भजनलाल की कुटिल राजनीति है। 6 अक्टूबर, 1930 को जन्मे भजनलाल ने 3 जून, 2011 को अपने निधन से पहले कई राजनीतिक दलों में चक्कर लगाए। कांग्रेस से राजनीति शुरू करने वाले भजनलाल ने जहाँ जब अवसर मिला, तब राजनीतिक पल्टी मारी। उन्हीं के कार्यकाल में भारतीय राजनीति में ‘आयाराम-गयाराम’ के नारे का आविष्कार हुआ।

‘रिश्वत’ में घी और स्वर्ण ऊँट भेजते थे भजनलाल

हरियाणा की राजनीति में भजनलाल वह शख्सियत थे, जिन्होंने सत्ता के लिए हर समझौते किए और कदाचित उनके पुत्र कुलदीप बिश्नोई पिता की ही विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं, क्योंकि जिस पिता ने तो 2007 में कांग्रेस से अलग होकर हरियाणा जनहित कांग्रेस – भजनलाल (HJC-BL) का गठन किया था, कुलदीप बिश्नोई ने पिता के निधन के बाद 2016 में सत्ता के लिए पिता की तर्ज पर उसी कांग्रेस का दामन दोबारा थाम लिया। देश को भजनलाल की राजनीतिक तिकड़मबाजी की महारात का 1979 में तब पता चला, जब उन्होंने हरियाणा की चौधरी देवीलाल सरकार में डेयरी मंत्री रहते हुए तख्तापलट कर अपनी सरकार बना ली। भजनलाल ने 42 विधायकों को तेजाखेड़ा स्थित अपने घर में बंदूक की नोंक पर कैद करके रखा। भजनलाल अच्छे वक्ता नहीं थे और न ही देवीलाल जितने लोकप्रिय। इसके बावजूद वे मुख्यमंत्री पद पर पहुँच गए। राजनीतिक कैरियर शुरू करने के बाद 8 वर्षों में ही वे हरियाणा के मुख्यमंत्री बन गए। कांग्रेस से राजनीति शुरू करने वाले भजनलाल ने 1977 में इंदिरा-कांग्रेस विरोधी लहर भाँप ली और जनता पार्टी में शामिल होने के लिए मोरारजी देसाई के घर 18 किलो घी के तीन पीपे भिजवाए। जब 1980 में कांग्रेस का पुन: उभार हुआ, तो भजनलाल ने कांग्रेस में वापसी के लिए संजय गांधी के नवजात शिशु वरुण गांधी को सोने की परत चढ़ा ऊँट भिजवाया। इसके बाद जनता पार्टी से चुन कर मुख्यमंत्री बने भजनलाल 40 विधायकों सहित कांग्रेस में शामिल हो गए। 1979 से 1999 तक हरियाणा में भजनलाल और देवीलाल के बीच शह-मात का खेल चला। जब कांग्रेस में भूपिंदर सिंह हुड्डा का उदय हुा, तो भजनलाल को एहसास हो गया कि अब कांग्रेस में उनकी दाल नहीं गलेगी। इसीलिए उन्होंने 2007 में एचजेसी-बीएल बना ली और 78 वर्ष की आयु में भी ‘अभी तो मैं जवान हूँ’ कहते हुए हरियाणा के दो बड़े नेताओं संपत सिंह व जय प्रकाश को हरा कर सांसद बने। 2011 में भजनलाल का निधन हो गया। उनकी राजनीतिक विरासत दो पुत्र चंद्र मोहन बिश्नोई, कुलदीप बिश्नोई और एक पुत्री रोशनी के हाथों में है। इनमें से चंद्र मोहन तो उप मुख्यमंत्री रह चुके हैं। वे वही चंद्र मोहन हैं, जिन्हें 2008 में पद से हटा दिया गया और इसके बाद वे दूसरी पत्नी अनुराधा बाली के साथ सामने आए। दूसरी शादी के जायज बनाने के लिए दोनों ने इस्लाम कबूल कर लिया और चंद्र मोहन चांद मोहम्मद हो गए तथा अनुराधा फिज़ा हो गईं। बाद में फिज़ा की रहस्यमय मौत हुई और 2018 में चंद्र मोहन ने फिर से राजनीतिक किस्मत चमकाने की कोशिश की, परंतु सफलता नहीं मिली।

पत्नी MLA, एक बेटा नेता, दूसरा क्रिकेटर, बेटी अमेरिका में

भजनलाल की विरासत फिलहाल कुलदीप बिश्नोई संभाल रहे हैं। वे आदमपुर से तीसरी बार विधायक बने हैं। पत्नी रेणुका हाँसी से विधायक हैं। तीन बच्चे हैं। इनमें भव्य बिश्नोई भावी लीडर बनने की राह पर है। दूसरा बेटा चैतन्य बिश्नोई क्रिकेटर है, जो चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के लिए इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में खेल चुका है। बेटी अमेरिका में पढ़ाई कर रही है।

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