92 वर्ष पुराना है टेलीविज़न का इतिहास : जानिए कैसे छोटा पर्दा बन गया अनिवार्य आवश्यकता ?

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रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद, 21 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। हिन्दी सिनेमा के पिता धुंडिराज गोविंद फाळके यानी दादा साहेब फाळके (फालके) (Dhundiraj Govind Phalke) ने 1913 में जब लोगों को सर्वप्रथम कपड़े के पर्दे पर अपनी बनाई हुई प्रथम हिन्दी फिल्म राजा हरिशचंद्र दिखाई थी, उस समय भारत के किसी भी व्यक्ति ने ये नहीं सोचा होगा कि पर्दे पर दिखाई जाने वाली ये फिल्म कभी घर में रखे चौकोर डब्बे में समा जायेगी। यद्यपि उन दिनों फिल्मों में संवाद नहीं हुआ करते थे, इसके बावज़ूद दादा साहब ने लोगों को वह फिल्म एक अंधेरे कमरे और प्रोजेक्टर पर फिल्म रील की सहायता से दिखाई थी, जिसमें कोई ध्वनि नहीं थी। फिल्मों ने बाद में प्रगति की और वे पहले ध्वनियुक्त स्वरूप में, फिर श्वेत-श्याम से रंगीन स्वरूप में परिवर्तित हो गई। इसी दौरान आविष्कार की जननी आवश्यकता ने विश्व को टेलीविज़न (Television) यानी TV के रूप में एक नया उपहार दिया। यद्यपि भारत में टेलीविज़न बहुत देर से आया, परंतु आज यह हर घर की एक अनिवार्य आवश्यकता बन चुका है। छोटे पर्दे के नाम से जाना जाने वाला टेलीविज़न विश्व पटल पर अपनी एक अमिट जगह बना चुका है। आप सोच रहे होंगे कि टेलीविज़न शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई ? वास्तव में टेलीविज़न ग्रीक प्रीफिक्स ‘टेले’ और लैटिन वर्ड ‘विज़ीओ’ से मिलकर बना शब्द है। टेलीविज़न (टीवी) एक वैज्ञानिक उपकरण है, जो जन-संचार का दृश्य-श्रव्य माध्यम है। ध्वनि के साथ-साथ चित्रों के सजीव प्रसारण के कारण यह अपने कार्यक्रम को रुचिकर बना देता है। 21 नवंबर को 23वाँ विश्व टेलीविज़न दिवस है। इस अवसर पर आइए जानते हैं टेलीविज़न के अविष्कार की कहानी।

टेलीविज़न का आविष्कार 1927 में अमेरिका के वैज्ञानिक जॉन लॉगी बेयर्ड ने किया था। 1934 के आते-आते टेलीविजन पूरी तरह इलेक्ट्रानिक स्वरूप धारण कर चुका था। 1938 में औपचारिक तौर पर जॉन लॉगी बेयर्ड टेलीविजन को मार्केट में लेकर आए। इसके 2 वर्षों बाद ही आधुनिक टीवी के स्टेशन खुले और लोग बड़ी संख्या में टीवी ख़रीदने लगे। वैसे टेलीविज़न को भारत आने में 32 वर्ष लगे, जब 15 सितंबर, 1959 को सर्वप्रथम टेलीविज़न का प्रयोग दिल्ली में दूरदर्शन केन्द्र की स्थापना के साथ किया गया था, परंतु इसका व्यापक प्रसार 1982 में भारत में आयोजित एशियाड खेलों के आयोजन से हुआ। नित-नये आविष्कारों के साथ टेलीविज़न में भी लगातार परिवर्तन होते गये। पहले जहाँ एक टेलीविज़न मैकेनिकल पद्धति पर कार्य करता था, जिसमें फिल्म रोल की भाँति ही अंधेरे कमरे और प्रोजेक्टर की आवश्यकता होती थी, वहीं बाद में धीरे-धीरे कई असफलताओं-सफलताओं के बाद टेलीविजन में बदलाव हुये।

भारत में पहली बार लोगों को टीवी के दर्शन 1950 में तब हुए, जब चेन्नई के एक इंजीनियरिंग छात्र ने एक प्रदर्शनी में पहली बार सबके सामने टेलीविज़न प्रस्तुत किया। भारत में पहला टेलीविज़न सेट कोलकाता के एक सम्पन्न नियोगी परिवार ने ख़रीदा था। 1965 में ऑल इंडिया रेडियो ने प्रतिदिन टीवी ट्रांसमिशन शुरू किया। 1976 में सरकार ने टीवी को ऑल इंडिया रेडियो से अलग कर दिया। 1982 में पहली बार राष्ट्रीय टेलीविजन चैनल की शुरूआत हुई। भारत में टेलीविज़न पर पहला रंगीन प्रसारण 15 अगस्त 1982 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के भाषण के साथ शुरू हुआ। 80-90 का दशक भारत में टेलीविज़न के विस्तार का रास्ता खोलता गया। दूरदर्शन पर महाभारत और रामायण जैसी सीरियलों ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिये। महाभारत और रामायण धारावाहिकों के प्रसारण के समय सड़कों पर मानों कर्फ्यू सा लग जाता था।

1997 में टेलीविज़न चैनलों का सारा कामकाज प्रसार भारती को सौंप दिया गया, जिसमें उनकी सहायता यूनेस्को ने की। इसके बाद प्रतिदिन समाचार बुलेटिन प्रसारित होने लगा। शुरू में इसका नाम टेलीविज़न इंडिया रखा गया, परंतु बाद में इसका नाम बदल कर दूरदर्शन कर दिया गया, जो इसके नाम को सार्थक भी करता है। शुरू में टेलीविज़न प्रसारण केवल 7 शहरों में दिखाया जाता था। 1991 में तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने टीवी प्रसारण के विस्तार की शुरुआत की। शुरुआत में Cathode Ray Tube यानी CRT टीवी हुआ करते थे। ये आकार में मोटे और वजन में भारी होते थे। 1955 में Eugene Polley ने टेलीविजन रिमोट का आविष्कार किया था। बाद में Liquid Crystal Display यानी LCD टीवी का दौर आया और अब टेलीविज़न अपने सर्वाधिक अत्याधुनिक रूप Light Emitting Diode यानी LED टीवी में बदल गया है, जो वज़न में हल्के और पतले होते हैं। वर्तमान में HD, Ultra HD क्वॉलिटी के टेलीविज़न भी आते है।

मनोरंजन का सबसे बेहतरीन साधन बन चुके टीवी की अहमियत को वर्ष 1996 में वैश्विक रूप में उस समय पहचान मिली, जब संयुक्त राष्ट्र ने विश्व टेलीविजन दिवस की घोषणा की। 1996 में संयुक्त राष्ट्र ने टेलीविज़न के प्रभाव को आम जिंदगी में बढ़ता देख 21 नवंबर, 1996 का दिन विश्व टेलीविजन दिवस (World Television Day) के रूप में मनाने की घोषणा की। इस दिन को मनाने के पीछे टीवी के जरिए सामाजिक, आर्थिक और आम आदमी के जीवन से जुड़ी कई परेशानियों पर ध्यान केंद्रित करने का तर्क दिया गया है। टेलीविजन एक ऐसा जरिया बन गया, जिसकी सहायता से लाख-दो लाख नहीं, अपितु करोड़ों लोगों को एकसाथ संदेश पहुँचाया आसान हो गया। 16 दिसबंर 2004 को डायरेक्ट टू होम सर्विस शुरू हुई, जिसने छोटे परदे की दुनिया में क्रांतिकारी बदला लाया। 21-22 नवंबर, 1996 को विश्व के प्रथम विश्व टेलीविजन फोरम का भी आयोजन किया गया। इस दिन पूरे विश्व की मीडिया हस्तियों ने संयुक्त राष्ट्र के संरक्षण में एक दूसरे से भेंट की। इसके बाद प्राइवेट चैनलों की एंट्री होना आरंभ हुआ। प्राइवेट चैनलों को एक के बाद एक लाइसेंस मिलते गए। आज भारत में प्रसारित होने वाले टीवी चैनलों की संख्या 1000 के आसपास पहुँच चुकी है। 21वीं सदी के शुरुआत में, जब केबल टीवी का प्रचलन शुरू हुआ, तब भारत में सही तरीके से रंगीन टीवी का दौर आया। सीआरटी टेलीविज़न का दौर आया, एलसीडी और प्लाज़्मा टीवी का आविष्कार हुआ, पंरतु कुछ ही वर्षों में एलईडी (LED) ने एलसीडी और प्लाज़्मा का स्थान ले लिया। आज टीवी भी कम्प्यूटर की तरह स्मार्ट हो गया है।

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