हौसले के आगे हार गई ‘हाइट’ : 3 फीट 15 किलो के गणेश ने डॉक्टर बनने के लिए 1136 KM तक लड़ी लड़ाई !

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रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

भावनगर/अहमदाबाद/नई दिल्ली, 20 जुलाई, 2019 (युवाPRESS)। ऊँचा हौसला और बुलंद इरादा इंसान को क्या कुछ नहीं दे जाता है। इसकी जीती-जागती मिसाल बन कर उभरे हैं गुजराती युवक गणेश बारैया। भावनगर के निवासी गणेश की हाइट एक साधारण व्यक्ति से औसत 2 फीट और वज़न 40 किलो कम है। बस इसी कारण गणेश को मेडिकल कॉलेज में दाखिला नहीं मिल रहा था। 18 वर्ष की आयु होने के बावजूद मात्र 3 फीट ऊँचाई और 15 किलो वज़न गणेश के डॉक्टर बनने के सपने के आड़े आ रहे थे, परंतु हौसले के आगे कम हाइट हार गई और अब उच्चतम् न्यायालय (SC) के आदेश के बाद गणेश डॉक्टर बनने का अपना सपना पूरा कर सकेंगे।

भावनगर से दिल्ली की दूरी 1,136 किलोमीटर है, परंतु बौने कद के गणेश ने ऊँचा हौसला दिखाते हुए अपना सपना पूरा करने का अभियान छेड़ दिया। गणेश ने मेडिकल कॉलेज में एडमिशन पाने के लिए भावनगर से अहमदाबाद (गुजरात हाई कोर्ट) और अहमदाबाद से दिल्ली (सुप्रीम कोर्ट) तक लड़ाई लड़ी और अंतत: उनकी जीत हुई। अब गणेश को मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिल सकेगा। गणेश डॉक्टर बनने का अपना सपना पूरा कर सकेंगे।

भावनर जिले में तळाजा तहसील के गोरखी गाँव के निवासी गणेश बारैया की आयु इस समय 18 वर्ष है, परंतु उम्र के साथ देह का विकास नहीं हुआ। जन्मजात खामी से पीड़ित ग़रीब परिवार में जन्मे छह बहनों के इकलौते भाई गणेश ने तळाजा के नीलपंठ विद्यापीठ नामक स्कूल से मार्च-2018 में कक्षा 12 (विज्ञान प्रवाह) 87 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की। बचपन से ही डॉक्टर बनने का सपना संजोए गणेश ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा National Eligibility cum Entrance Test (NEET) में भी 223 स्कोर किया। नीट में उत्तीर्ण होने के बाद भी मेडिकल क्षेत्र की एडमिशन कमिटी ने गणेश को यह कह कर एमिडशन देने से इनकार कर दिया कि 72 प्रतिशत दिव्यांगता और इतनी कम ऊँचाई के साथ वह इमर्जेंसी केस कैसे हैंडिल कर सकेगा ? कैसे कोई ऑपरेशन कर सकेगा ?

गणेश ने आरंभ की कानूनी लड़ाई

एडमिशन कमिटी से नकार दिए जाने के बावजूद वामन गणेश ने हार नहीं मानी और कानूनी लड़ाई शुरू की। नीलकंठ विद्यापीठ के संचालक दलपत कातरिया और रैवतसिंह सरवैया भी गणेश की सहायता में आगे आए। गणेश का मामला गुजरात उच्च न्यायालय (HC) में पहुँचा। हाई कोर्ट ने सरकारी एडमिशन कमिटी की दलीलों को मान्य रखते हुए गणेश की याचिका निरस्त कर दी। अब गणेश के पास सुप्रीम कोर्ट ही अंतिम विकल्प था। सुप्रीम कोर्ट ने गणेश के पक्ष में निर्णय देते हुए आदेश में स्पष्ट किया कि केवल शारीरिक अक्षमता और हाइट के कारण किसी के सपने को हम साकार होने से रोक नहीं सकते। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में इन्हीं कारणों से एडमिशन से वंचित किए गए दो अन्य युवकों को भी एडमिशन देने का निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से गणेश सहित उनका पूरा परिवार खुश है। गणेश को अब लग रहा है कि वे डॉक्टर बन कर लोगों की सेवा करने का अपना सपना साकार कर पाएँगे। गणेश इसी सप्ताह भावनगर सरकारी कॉलेज में एडमिशन ले लेंगे और डॉक्टर बनने के सपने का सूत्रपात करेंगे।

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