रोचक सत्य घटना : एक दुकानदार की 30 साल पुरानी उधारी चुकाने 4,810 किलोमीटर दूर से औरंगाबाद पहुँचा यह VIP !

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* 1985-89 के दौरान पढ़ाई के लिए भारत आए थे कीनियाई सांसद

* 200 रुपए की जगह 19,200 रुपए लौटा कर ही राहत की साँस ली

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद, 9 जुलाई, 2019 (युवाप्रेस डॉट कॉम)। उपरोक्त तसवीर में दिखाई दे रहे महानुभाव कोई साधारण व्यक्ति नहीं हैं। हाँ, वे जिनके साथ बैठे हैं, वे लोग अवश्य साधारण हैं। ये महानुभाव एक विदेशी सांसद हैं और पिछले रविवार को वे महाराष्ट्र के औरंगाबाद में इस सामान्य दुकानदार परिवार के अतिथि बने थे। ये विदेशी सांसद औरंगाबाद में इस दुकानदार के यहाँ आए थे और वो भी सिर्फ 200 रुपए की उधारी चुकाने के लिए। यद्यपि इन्हें 200 रुपए की उधारी चुकाने के लिए 4,810 किलोमीटर की दूरी तय करने में पूरे 30 साल लग गए, परंतु अब उनके मन से उधारी का यह बोझ हल्का हो गया है।

आइए, अब आपको बता ही देते हैं कि यह महानुभाव कौन हैं ? इनका नाम है रिचर्ड न्यागका टोंगी। भारत में जिस तरह 542 सांसद हैं, उसी तरह रिचर्ड न्यागका टोंगी भी अफ्रीकी देश कीनिया (KENYA) के सांसद हैं। इतना ही नहीं, टोंगी केन्याई संसद की विदेश मामलों की समिति के उपाध्यक्ष भी हैं। हाल ही में टोंगी भारत यात्रा पर आए और उन्होंने अपनी 200 रुपए की उधारी लौटाने का अवसर लपक ही लिया। दिल्ली में निर्धारित कार्यक्रम समाप्त होते ही रिचर्ड न्यागका टोंगी औरंगाबाद में काशीनाथ गवली के घर पहुँचे। काशीनाथ को देखते ही रिचर्ड की आँखें नम हो गईं, तो गवली परिवार के भी सभी लोग भावुक हो गए। रिचर्ड को तब चैन आया, जब उन्होंने काशीनाथ को 200 रुपए लौटा दिए, जिसकी उधारी 1989 से उनके सिर पर थी।

क्या है रोचक किस्सा ?

वास्तव में बात यह है कि 80 के दशक में अफ्रीका महाद्वीप से हजारों विद्यार्थी पढ़ाई के लिए भारत आया करते थे। पूर्वी अफ्रीका के केन्या में रहने वाले रिचर्ड न्यागका टोंगी भी ऐसे ही विद्यार्थियों में एक थे। टोंगी 1985 से 1989 के दौरान महाराष्ट्र के औरंगाबाद में वानखेड़ेनगर स्थित मौलाना आज़ाद कॉलेज में पढ़ाई कर रहे थे। इस दौरान टोंगी ने कॉलेज के सामने ही एक कमरा किराए पर ले रखा था। मकान मालिक थे काशीनाथ गवली, जिनकी किराने की एक दुकान भी थी। टोंगी काशीनाथ की दुकान से ही ज़रूरत का सामान खरीदते थे। इन पाँच वर्षों के दौरान टोंगी पर काशीनाथ की 200 रुपए की उधारी हो गई। टोंगी सोचते थे कि वे पढ़ाई पूरी होने के बाद स्वदेश लौटने से पहले उधारी चुका देंगे, परंतु ऐसा हुआ नहीं या हो न सका। पढ़ाई पूरी होते ही रिचर्ड न्यागका टोंगी स्वदेश लौटने की खुशी में बिना उधारी चुकाए ही औरंगाबाद से घर के लिए रवाना हो गए। जल्दबाजी में कमरा खाली कर केन्या पहुँचे टोंगी को घर पहुँच कर याद आया कि काशीनाथ की उधारी चुकाना रह गई।

अवसर मिला, काशीनाथ को ढूँढा और राहत की साँस ली

स्वदेश लौटने के बाद रिचर्ड न्यागका टोंगी आगे चल कर राजनीति में शामिल हो गए। वे कीनिया की Jubilee Party of Kenya के नेता हैं और वर्ष 2017 में हुए आम चुनाव में Nyaribari Chache Constituency से सांसद के रूप में निर्वाचित हुए। यद्यपि जीवन और राजनीति में लगातार सफलताओं की सीढ़ी चढ़ रहे टोंगी के हृदय को हमेशा काशीनाथ की 200 रुपए की उधारी की बात कचोटती रहती। कई बार तो वे यहाँ तक सोचने लगते कि मृत्यु के बाद ईश्वर को क्या उत्तर देंगे। भारत आने का अवसर मिल नहीं रहा था, परंतु 30 वर्षों के बाद अंतत: उन्हें यह अवसर मिल ही गया। पिछले सप्ताह कीनिया का एक शिष्टमंडल भारत आया, जिसमें रिचर्ड न्यागका टोंगी भी शामिल थे। टोंगी ने यह अवसर लपक लिया। दिल्ली का कार्यक्रम पूरा होते ही टोंगी गत 7 जुलाई रविवार को पत्नी के साथ औरंगाबाद आ पहुँचे। औरंगाबाद आ तो गए, परंतु काशीनाथ का घर कैसे ढूँढते। टोंगी को तो काशीनाथ का नाम तक याद नहीं था। 30 साल पहले काशीनाथ जिस वानखेड़े नगर में रहते थे, गंजी पहन कर दुकान चलाया करते थे, वहाँ अब सब कुछ बदल चुका था। हालाँकि रिचर्ड न्यागका टोंगी का भाग्य अच्छा था। दो घण्टों की खोजबीन के बाद वे उसी दुकान के पास जा पहुँचे, जहाँ से तीस साल पहले वे सामान खरीदा करते थे और उनकी भेंट काशीनाथ मार्तंडराव गवली से हो ही गई। रिचर्ड न्यागका टोंगी ने सबसे पहले तीस साल पुरानी उधारी लौटाई, परंतु सिर्फ 200 रुपए नहीं, अपितु 250 यूरो (19,500 रुपए)। इसके बाद ही उन्होंने राहत की साँस ली। काशीनाथ को भी 80 के दशक का अपना ज़माना याद आ गया, जब वे विदेशी विद्यार्थियों को किराए पर कमरे उपलब्ध कराते थे। उनकी किराने की दुकान का नाम श्री कृष्ण प्रोविज़न स्टोर था।

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