UN में भारत के 4 ‘हैदराबादी’ किले, जो हर तूफान से भिड़ जाते हैं

Written by

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 21 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। दुनिया की पंचायत माने जाने वाले संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) या UN में हर देश ऐसे लोगों की नियुक्ति करता है, जो उसकी बात को दमदार तरीके से प्रस्तुत कर सके। संकट की घड़ी में देश का पक्ष विरोधियों के समक्ष मजबूत से रख सके। भारत भी इस विश्व पंचाट यूएन में अपने दमदार प्रतिनिधियों की नियुक्ति करता आया है, क्योंकि जब भी देश में कोई ऐसी घटना घटती है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पड़ता है, तब यूएन में ऐसे शक्तिशाली प्रतिनिधियों का दायित्व बहुत बढ़ जाता है।

अधिक दूर जाने की क्या आवश्यकता है ? अभी 16 दिन पहले ही भारत ने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने का निर्णय किया, तो पड़ोसी पाकिस्तान में खलबली मच गई और चीन के पेट में भी दर्द होने लगा। जैसे ही 5 अगस्त, 2019 को गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में मोदी सरकार के धारा 370 हटाने के निर्णय की उद्घोषणा की, तुरंत पाकिस्तान और चीन शोर मचाने लगे और पहुँच गए दुनिया की पंचायत यानी संयुक्त राष्ट्र में, परंतु इन दोनों ही देशों की ओर से लाए गए तथाकथित तूफान का सामना करने के लिए भारत ने वहाँ चार हैदराबादी किले पहले ही तैयार रखे थे। ये चार ऐसे हैदराबादी किले हैं, जो हर तूफान से भिड़ जाते हैं। इन हैदराबादी किलों ने धारा 370 पर पाकिस्तानी प्रोपेगैंडा और चीन की चालाकियों का मुँहतोड़ जवाब दिया और दोनों को यूएन से बैरंग लौटने पर विवश कर दिया।

आप सोच रहे होंगे कि ये हैदराबादी किले कौन हैं ? आप इतनो तो जानते ही होंगे कि हैदराबाद भारत का एक प्रमुख शहर है, जो कानूनी रूप से तेलंगाना और आंध्र प्रदेश की राजधानी है, परंतु मूलत: यह तेलंगाना राज्य का हिस्सा है। यद्यपि फिलहाल हम हैदराबाद को लेकर कोई बहस नहीं करने जा रहे, बल्कि हम हैदराबाद से संबंध रखने वाले भारतीय विदेश सेवा (IFS) के उन 4 अधिकारियों की बात करने जा रहे हैं, जो संयुक्त राष्ट्र में भारत के हैदराबादी किले की तरह भारत विरोधियों के मंसूबों को ध्वस्त कर रहे हैं। धारा 370 पर चीन-पाकिस्तान सहित जहाँ से भी विरोध की आंधी उठी, इन चारों हैदराबादी किलों ने उनका मजबूती से न केवल सामना किया, अपितु उन्हें खदेड़ भी दिया।

सैयद अकबरुद्दीन

संयुक्त राष्ट्र में स्थित भारत के सबसे मजबूत हैदराबादी किले का नाम है सैयद अकबरुद्दीन। हैदराबाद में जन्मे और 1985 की बैच के आईएफएस अधिकारी अकबरुद्दीन ने हाल ही में धारा 370 पर पाकिस्तान के बहकावे में आकर वीटो पावर से लैस चीन की ओर से करवाई गई संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् (UNSC) की बैठक के बाद अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में चीन और पाकिस्तान के मुँह पर ऐसा तमाचा जड़ा कि दोनों दंग रह गए। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि अकबरुद्दीन 5 अगस्त को धारा 370 हटने के बाद से ही सक्रिय हो गए और लगातार विदेश मंत्री एस. जयशंकर के सम्पर्क में रहे। अकबरुद्दीन ने न केवल संयुक्त राष्ट्र में चीन और पाकिस्तान की हर चाल को नाकाम करने वाली घातक कूटनीति अपनाई, अपितु पूरी दुनिया को यह कड़ा संदेश दिया कि कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है। 59 वर्षीय अकबरुद्दीन ने अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तानी पत्रकारों की भी बोलती बंद कर दी।

ककनूर नागराज नायडू

संयुक्त राष्ट्र में भारत के दूसरे हैदराबादी किले का नाम है ककनूर नागराज नायडू। 1998 की बैच के आईएफएस अधिकारी नायडू यूएन में भारत के स्थायी उप प्रतिनिधि हैं। हैदराबाद में जन्मे और निज़ाम कॉलेज से बीए करने वाले नायडू ने बाद में अमेरिका के फ्लेचर स्कूल ऑफ लॉ एण्ड डिप्लोमैसी से कानून और कूटनीति में मास्टर डिग्री हासिल की। 11 वर्षों तक चीन में भारत के तृतीय, द्वितीय और प्रथम सचिव के रूप में काम कर चुके नायडू फर्राटेदार चीनी भाषा बोलते हैं। नायडू ने जून-2018 में संयुक्त राष्ट्र में जम्मू-कश्मीर पर भारत का रुख स्पष्ट करते हुए कहा था कि जम्मू-कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है और भारत का अभिन्न अंग है।

संदीप कुमार बय्यापू

संयुक्त राष्ट्र में तीसरे हैदराबादी किले का नाम सै संदीप कुमार बय्यापू, जो संयुक्त राष्ट्र में तैनात भारतीय टीम के सदस्य हैं और स्थायी मिशन के प्रथम सचिव हैं। 2007 की बैच के आईएफएस अधिकारी 37 वर्षीय बय्यापू जन्म से तेलंगाना के पेड्डापल्ली जिले के काज़ीपल्ली गाँव के निवासी हैं, परंतु उन्होंने पढ़ाई हैदराबाद में की है।

राजा कार्तिकेय गुंडु

संयुक्त राष्ट्र में चौथे हैदराबादी किले का नाम है राजा कार्तिकेय गुंडु, जो संयुक्त राष्ट्र के शांति निर्माण व राजनीतिक मामलों के विभाग में राजनीतिक मामलों के अधिकारी के रूप में कार्यरत् हैं। वे हैदराबाद के वरिष्ठ पत्रकार के पुत्र हैं और निज़ाम कॉलेज से पूर्व विदयार्थी हैं। कार्तिकेय ने संयुक्त राष्ट्र के कई शांति मिशनों और राहत-बचाव कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

Article Categories:
News

Comments are closed.

Shares