सिर्फ 2 घण्टों में डूब गया था गुजरात का यह शहर, पेड़ों पर टंग गई थी लाशें : देखिए दिल दहला देने वाली तसवीरें

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* मच्छू बांध त्रासदी की 40वीं बरसी

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 11 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। गुजरात के मोरबी शहर में हुई मच्छू बांध 2 त्रासदी को आज 40 वर्ष हो गए, परंतु आज भी इस त्रासदी में जीवित बचे लोग इसे याद करके सिहर उठते हैं। लोग उस मंज़र को आज भी नहीं भूले हैं, जब पौराणिक-ऐतिहासिक मोरबी शहर ने देखते ही देखते केवल 2 घण्टों के भीतर जल समाधि ले ली थी। इंसानों और पशुओं के शव केवल ज़मीन पर ही नहीं, अपितु पेड़ों पर लटके हुए थे।

11 अगस्त, 1979 को तत्कालीन राजकोट जिले के मोरबी शहर में भारी वर्षा हो रही थी। विशेषकर मोरबी शहर की जल सुविधा के लिए बनाए गए मच्छू 2 बांध के ऊपरी इलाकों में तो पिछले तीन दिनों से मूसलाधार बारिश हो रही थी, जिसके चलते मच्छू 2 बांध में पानी की भारी आवक हो रही थी। इसी दौरान दोपहर 3.30 बजे मोरबी शहर में यह ख़बर फैल गई कि मच्छू 2 बांध टूट गया है। यद्यपि देश बेख़बर था। न गुजरात सरकार को पता था और न ही केन्द्र सरकार को।

ख़बर बिल्कुल पक्की थी, क्योंकि 3.30 बजे ख़बर आई और अगले 10 मिनट में तो मच्छू 2 बांध का पानी पूरे मोरबी शहर में घुस आया। कुछ घण्टे पहले तक आबाद नज़र आ रहा मोरबी शहर 3.40 बजे तो डूबने लगा। चहुँओर हाहाकार मच गया। देखते ही देखते टूटे हुए मच्छू 2 बांध के पानी ने दो घण्टों के भीतर ही पूरे मोरबी शहर को डुबा दिया। बांध का पानी मोरबी शहर में इस कदर घुसा कि लोग छतों पर जाकर भी जान नहीं बचा सके। इंसान के लिए जान बचाना मुश्किल था, तो पशुओं को कौन बचाता। पानी के भीषण प्रवाह ने मोरबी के मकानों और इमारतों को जमींदोज़ कर दिया। लोगों को संभलने का मौका ही नहीं मिला। चंद घण्टों पहले जो शहर आबाद था, वह अब लाशों के ढेर में तब्दील हो चुका था।

मरघट में बदल गया मोरबी

मच्छू 2 बांध के ऊपरी इलाकों में तीन दिनों तक हुई मूसलाधार बारिश के चलते बांध में इतनी भारी मात्रा में पानी आया कि उसकी दीवार टूट गई। कुछ ही मिनटों में मोरबी शहर ने जल समाधि ले ली। सैकड़ों की संख्या में लोग मारे गए। हजारों की संख्या में पशुओं की मौत हो गई। मयूरध्वज की नगरी मोरबी देखते ही देखते मरघट में तब्दील हो गया। चारों तरफ लाशों की लाशें बिछी हुई थीं। मोरबी इतनी बड़ी त्रासदी में है, यह ख़बर सबसे पहले बीबीसी रेडियो ने देश को सुनाई, तो पूरा देश स्तब्ध हो गया। ख़बर फैलते ही चहुँओर से मोरबी में राहत और बचाव कार्य आरंभ हुए। केन्द्र और राज्य सरकार केवल राहत कार्य ही शुरू कर सकी, क्योंकि बचाव कार्य करने का मौका तो कुदरत ने दिया ही नहीं था।

देखिए मोरबी बांध त्रासदी की तसवीरें :

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