न होते ‘खोजी’ मोदी, तो औरंगज़ेब के आक्रमण से सदियों पहले बचाई गई धरोहर सदियों तक धरी ही रह जाती : VIDEO

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भगवान शिव को भाने वाली नगरी यानी काशी, वरुण और असि नदियों के नाम से बनी वाराणसी और कालांतर में अपभ्रंश के कारण बनी बनारस नगरी केवल एक नगरी नहीं है, अपितु संसार की सबसे प्राचीन नगरी है। वर्तमान में वाराणसी अधिकृत नाम से प्रसिद्ध यह नगरी के साथ पौराणिक भव्यता जुड़ी हुई है, तो कुछ मध्य कालीन मुस्लिम आक्रमणकारियों की बर्बता ने भी इसे नष्ट करने का प्रयास किया। स्वतंत्रता के बाद भारत की सरकारों ने सनातन धर्म की इस महान सांस्कृतिक विरासत को खंगालने का प्रयत्न नहीं किया, परंतु जब नरेन्द्र मोदी यहाँ से सांसद चुने गए, तो काशी को धीरे-धीरे एक तरफ पौराणिक-ऐतिहासिक दिव्यता की विरासत पुनः मिलने लगी, वहीं काशी की आधुनिक क्योटो बनने की यात्रा भी प्रारंभ हुई।

चुनावी समर में वाराणसी को आगामी 23 मई तक इसलिए याद किया जाता रहेगा, क्योंकि यहाँ से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी चुनाव लड़ रहे हैं। लोकसभा चुनाव 2014 में भी जब गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री के रूप में नरेन्द्र मोदी ने वाराणसी से चुनाव लड़ा, तब भी मीडिया सहित पूरे देश और विश्व में वाराणसी चर्चा में रही, परंतु बाद में सब अपने-अपने का में जुट गए और मोदी एक सांसद के रूप में काशी की नक्काशी को तराशने में जुट गए।

मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट ने काशी की धरोहर से पर्दा उठाया

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वाराणसी के सांसद के रूप में इस नगरी के विकास के लिए अनेक काम शुरू करवाए, परंतु सबसे चर्चित काम है काशी कॉरिडोर, जो प्रधानमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट है। आज हम इस प्रोजेक्ट के बारे में चर्चा नहीं करने जा रहे। हम चर्चा करने जा रहे हैं इस काशी कॉरिडोर के कारण उजागर हुई काशी की नक्काशी के बारे में, काशी की ऐतिहासिक धरोहर के बारे में। दरअसल काशी कॉरिडोर के तहत वाराणसी में सड़कों का चौड़ीकरण कार्य चल रहा है और इस कार्य में विघ्न बन रहे मकानों-भवनों को ध्वस्त किया जा रहा है। सरकार लोगों से उनके मकान खरीद कर उन्हें तोड़ रही है और यही ध्वस्तीकरण काशी के लिए मानो वरदान सिद्ध हुआ, क्योंकि जो मकान या भवन तोड़े गए, उनके भीतर से 18वीं और 19वीं शताब्दी के भव्य मंदिरों के रूप में छिपी काशी की धरोहरों पर से पर्दा उठा।

औरंगज़ेब से बचाने के लिए मंदिरों को बनाया घर

सड़क चौड़ीकरण के तहत जिन मकानों और भवनों को ध्वस्त किया गया, वहाँ लगभग 43 से 45 प्राचीन मंदिर मिले हैं। ये मंदिर 18वीं और 19वीं शताब्दी के हैं, जिन्हें हिन्दुओं ने तत्कालीन आक्रमणकारी औरंगज़ेब से बचाने के लिए भवन बना कर घर में परिवर्तित कर दिया था। औरंगज़ेब ने काशी में हिन्दू संस्कृति पर कई बड़े आक्रमण किए। उसने काशी के मंदिरों का श्रृंखलाबद्ध विध्वंस किया। यहाँ तक कि भगवान शिव के काशी विश्वनाथ मंदिर को भी मस्जिद में परिवर्तित कर दिया, जो आज भी विवादास्पद बना हुआ है। इतिहासकारों की मानें, तो मुग़ल साम्राज्य के पतन के बाद हिन्दुओं ने काशी में बड़े पैमाने पर मंदिरों का निर्माण किया था, परंतु औरंगज़ेब ने उनमें से अनेक मंदिरों को ढहा दिया। काशी कॉरिडोर के कारण जो मंदिर मिले हैं, वे औरंगज़ेब के आक्रमण से बचाए गए मंदिर हैं। जो मंदिर मिले हैं, उन्हें घर में परिवर्तित कर देने वाले लोगों का कहना है कि जब हमें लगा कि औरंगज़ेब से हमें मंदिरों की सुरक्षा करनी है, तो हमने इन मंदिरों के ऊपर बड़े-बड़े भवन बना दिए और घरों में मंदिरों को छिपा दिया, जिसके कारण ये मंदिर संरक्षित और सुरक्षित रह सके।

तो सदियों से धरी धरोहर सदियों तक धरी रह जाती

काशी कॉरिडोर के चलते जो मंदिर मिले हैं, वे सदियों से काशी की धरोहर के रूप में संरक्षित थे। किसी सरकार या पुरातत्व विभाग को इन मंदिरों के बारे में पता नहीं था, परंतु जब मोदी सांसद बने, तो सदियों से धरी यह धरोहर पुनः अपने दिव्य रूप में प्रकट हो गई। यदि मोदी सांसद न होते और उन्होंने काशी कॉरिडोर जैसे प्रोजेक्ट को लागू न किया होता, तो संभवतः सदियों से धरी काशी की यह धरोहर आगे भी सदियों तक धरी रह जाती और दुनिया को कभी इन मंदिरों के बारे में पता नहीं चलता।

नीचे दिए गए VIDEO में आप भी देखिए काशी में मिले प्राचीन मंदिरों को :

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