कौन और क्या है Full Ginsburg, जिसकी नीति पर अमेरिका में धूम मचा रहे एस. जयशंकर ?

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* अमेरिकन थिंकटैंक्स के साथ मैराथन मुलाक़ातों का दौर

* पाकिस्तान को हर मोर्चे पर मात देने का धारदार प्रयास

विशेष टिप्पणी : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 2 अक्टूबर, 2019 (युवाPRESS)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तो अमेरिका में ह्यूस्टन में आयोजित Howdy Modi कार्यक्रम से लेकर संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) की साधारण सभा (UNGA) तक भारत का डंका बजा कर स्वदेश लौट आए हैं, परंतु विदेश मंत्री एस. जयशंकर अभी अमेरिका में ही हैं। जयशंकर अमेरिका में इस समय जो भारत के लिए जिस भूमिका में काम कर रहे हैं, उसे फुल गिंसबर्ग की संज्ञा दी जा सकती है। अब आप सोच रहे होंगे कि यह फुल गिंसबर्ग कौन हैं और क्या हैं और विदेश मंत्री एस. जयशंकर का इस फुल गिसंबर्ग से क्या लेना-देना है ?

आपके प्रश्नों के उत्तर दिए देते हैं। सबसे पहले बताते हैं कि William H. Ginsburg कौन हैं और क्या हैं ? फुल गिंसबर्ग वैसे तो पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और मोनिका लेविंस्की के अवैध संबंधों के मामले में मोनिका लेविंस्की के वक़ील हैं, परंतु अब वे केवल एक वक़ील ही नहीं, अपितु अमेरिका में बज़वर्ड भी बन गए हैं। 25 मार्च, 1943 को जन्मे गिंसबर्ग का 1 अप्रैल, 2013 को निधन हो चुका है, परंतु अपने एक काम के कारण वे अमेरिका में बज़वर्ड बने हैं। वास्तव में फुल गिंसबर्ग ऐसे पहले व्यक्ति थे, जिन्होंने 1 फरवरी, 1998 को 5 अमेरिकी टेलीविज़न न्यूज़ चैनलों पर एक ही दिन में 5 सण्डे मॉर्निंग टॉक शो में सफलतापूर्वक भाग लिया था। गिंसबर्ग ने एबीसी पर दिस वीक, सीबीएस पर फॉक्स न्यूज़ सण्डे व फेस द नेशन, एनबीसी पर मीट द प्रेस और सीएनएन पर लेट एडिशन नामक सण्डे मॉर्निंग टॉक शो में भाग लिया था। उनके इसी कारनामे के कारण वे अमेरिका में बज़वर्ड बन गए और उनके बाद जिन-जिन लोगों ने ऐसा कारनामा किया, वे फुल गिंसबर्ग्स के रूप में पहचाने जाने लगे। अमेरिका में अंतिम बार यह कारनामा विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने 8 सितंबर, 2019 रविवार के दिन किया।

अब बात करते हैं भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर की कि वे कैसे अमेरिका में फुल गिंसबर्ग की तरह काम कर रहे हैं ? प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ अमेरिका दौरे पर गए जयशंकर अभी भी वहीं हैं और जिस तरह से वे भारतीय कूटनीति का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं, वह फुल गिंसबर्ग से मेल खाती है। जयशंकर इन दिनों अमेरिका में उन प्रमुख थिंकटैंक्स से मिल रहे हैं, जो अमेरिकी विदेश नीति के चाणक्य माने जाते हैं और अमेरिका विदेश नीति मुख्य रूप से निर्धारित करते हैं। जयशंकर इस समय अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन में हैं, जहाँ इतने थिंकटैंक्स हैं, जितने तो कुछ देशों के पास युद्ध टैंक्स नहीं हैं। जयशंकर अमेरिकी विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों की रीढ़ माने जाने वाले थिंकटैंक्स से एक-एक कर मिल रहे हैं। ये ऐसे थिंकटैंक संगठन हैं, जो अमेरिका की नीति व विश्लेषण का काम करते हैं। पिछली एक शताब्दी से अमेरिकी थिंटकैंक्स ही देश की नीतियाँ निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

72 घण्टों में 7 थिंकटैंक्स से मैराथन मुलाक़ात

एक समय भारत के विदेश सचिव और अमेरिका में भारतीय राजदूत रह चुके विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने अमेरिका दौरे के दौरान 72 घण्टों में वॉशिंगटन और न्यूयॉर्क में 7 थिंकटैंक्स से मैराथन मुलाक़ातें कीं। जयशंकर ने वॉशिंगटन में कार्निज़ फॉर इंटरनेशनल पीस, अटलांटिक काउंसिल, सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एण्ड इंटरनेशनल स्टडीज़, द ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूट और द हैरिटेज फाउंडेशन नामक थिंकटैंक्स के लोगों से विचार-विमर्श किया और भारत की विदेश नीति, पाकिस्तानी प्रोपेगैंडा, भारत-अमेरिका संबंधों पर उच्च स्तरीय बातचीत की। वॉशिंगटन आने से पहले जयशंकर ने न्यूयॉर्क में यूएनजीए सत्र से इतर 2 थिंकटैंक्स सेंटर फॉर फॉरेन रिलेशन्स और एशिया सोसाइटी के लोगों से भी मुलाकात की। जयशंकर अमेरिका में इतने अधिक सक्रिय हैं कि वे न्यूयॉर्क में यूएनजीए सत्र में हिस्सा लेने आए 42 देशों के विदेश मंत्रियों से मिल चुके हैं। उन्होंने 36 देशों के साथ द्विपक्षीय बातचीत की, तो 7 बहुपक्षीय बैठकों में भाग लिया। जयशंकर ने 3 कार्यक्रमों को भी संबोधित किया। विदेश मंत्री ने मोदी के अपने कूटनीतिक प्रयासों से इतर दर्जन भर वैश्विक नेताओं से मुलाक़ातें कीं और भारत का सभी मुद्दों पर मज़बूती से पक्ष रखा।

पाकिस्तान, चीन और अमेरिका को भी लपेटा

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हर मंच पर पाकिस्तानी प्रोपेगैंडा को क़रारा जवाब देते हुए स्पष्ट और सीधे शब्दों में कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है। स्वयं जयशंकर ने मीडिया ब्रीफिंग के दौरान बताया कि उनकी आधी से अधिक कवायदों में कश्मीर का मुद्दा छाया रहा और सभी वैश्विक नेताओं को बता दिया गया कि धारा 370 भारतीय संविधान का एक अस्थायी प्रावधान था और इसे हटाया जाना ही था। कश्मीर घाटी में सख़्ती का कारण संभावित हिंसा को रोकना है। संचार प्रतिबंधों पर जयशंकर ने कहा, ‘मैं इंटरनेट पसंद करता हूँ, परंतु यह ज़िंदगी (जानहानि) के बराबर नहीं हो सकता।’ विदेश मंत्री के माध्यम से भारत ने दुनिया को संदेश दिया कि संपूर्ण जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय हुआ था, परंतु पाकिस्तान ने एक तिहाई हिस्सा हथिया लिया, जिसे वह आज़ाद कश्मीर (पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर-POK) कहता है। पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र के जिस जनमत संग्रह प्रस्ताव की वक़ालत करता है, उसी प्रस्ताव के अनुसार सबसे पहले उसे पीओके खाली करना होगा, जिसमें पाकिस्तान ने गिलगिट-बाल्टिस्तान का एक हिस्सा चीन को उपहार में दे दिया है। इतना ही नहीं, चीन ने जिस अक्साई चिन को 1962 के युद्ध में कब्जाया है, वह भी भारत का ही हिस्सा है। अपने अमेरिका दौरे के दौरान जयशंकर ने अमेरिका को भी लपेटने में हिचकिचाहट नहीं बरती। उन्होंने भारत-रूस के बीच एस-400 रक्षा डील पर अमेरिकी आपत्ति का निरस्त करते हुए साफ शब्दों में कहा, ‘कोई देश हमें यह नहीं बता सकता कि हमें किस देश से हथियार ख़रीदने हैं या नहीं ख़रीदने हैं। कोई देश हमें यह भी नहीं कह सकता कि हमें अमेरिका से ही हथियार ख़रीदने हैं या नहीं ख़रीदने हैं।’

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