आजादी के 70 साल के बाद, भारत के तीन गांवों में पहुंची बिजली

Elephnanta Caves

मुंबईः भारत सरकार को एलीफेंटा की गुफाओं और एलीफेंटा के गांव (Elephanta Caves and Elephanta Village) में बिजली पहुंचाने में 70 साल लग गये। इस आईलैंड पर तीन गांव बसे हैं और ये तीन गांव आजादी के 70 साल तक बिना बिजली के थी। आप सोच सकते हैं कि आज के समय में बिना बिजली के रहना कितना मुश्किल होता है।  यह टापू यूनेस्को विश्व विरासत स्थल में शामिल है। लेकिन सोचने वाली बात है कि यूनेस्को विश्व विरासत (UNESCO World Heritage) में शामिल होने के बावजूद भी यहां पर बिजली आने में 70 साल लग गये। लेकिन यहां के लोगों के लिए राहत की बात यह है कि आब यहां पर  केंद्र सरकार (Central Government) की मेहनत से बिजली आ चुकी है।

अब एलीफेंटा की गुफाओं (Elephanta Caves) में भी बिजली आ चुकी है। यहां के बिजली के काम को करने के लिए 1.5 किलोमीटर लंबी केबल समुद्र में बिछानी पड़ी। समुद्र के अंदर केबल को बिछाने के लिए कर्मचारियों को बहुत मशक्कत करनी पड़ी। ऊर्जा मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने इसको बहुत ही एतिहासिक बताया। उन्होने यह भी कहा कि ऐसा पहली बार हुआ है किसी बड़े ताल का प्रयोग करके अरब सागर में बिजली की लाइने बिछाई गई हो। समुद्र में बिछाया गया भारत का सबसे लंबा बिजली केबल है। यहां के तीन गांवों में प्रत्येक में 6 स्ट्रीट लाईट टावर भी लगाया गया है जो की लगभग 13 मीटर ऊंचा है। जिसमें शक्तिशाली एलईडी बल्ब लगवायें गये हैं।

परियोजना को पूरा करने में लगी लागत

इस परियोजना को पूरा करने में 25 करोड़ खर्च हुए और इसको पूरा करने में लगभग 15 महिनें का समय लगा। इसको महाराष्ट्र राज्य बिजली वितण कंपनी लिमिटेड ने पूरा करवा है। इस टापू पर रोजाना देसी व विदेशी पर्यटकों की भारी भीड़ लगती है।

बिजली कनेक्शन

इस परियोजना के तहत यहां के लगभग 200 घरों में बिजली के कलेक्शन और उपभोक्ताओं को व्यावसायिक कनेक्शन भी दिए गये हैं। इस परियोजने के सफलतापूर्वक पूरा होने से यहां के पर्यटन में भी वृद्धि होगी। अब लोग इस विश्व विरासत को देखने के लिए जा पायेंगे।

एलिफेंटा की गुफाएं (Elephanta Caves), एक विश्व विरासत

एलीफेंटा की गुफाएं, मुंबई के गेट वे ऑफ इंडिया से लगभग 12 किलोमीटर दूरी पर स्थित है। यह विश्वविकख्यात गुफाएं (Elephanta Caves) यहा के पहाड़ों को काटकर बनाए गये हैं। यहां पर लगभग 7 गुफाएं है जिसको घारापुरी भी कहा जाता है। यहां की गुफाओं में भगवान शिव, अर्द्धनारीश्‍वर, रावण द्वारा कैलाश पर्वत उठाएं हुए और नटराज शिव की मुर्तियां है जो देखने में बहुत ही सुंदर, अद्भुत, अविश्वसनीय तथा अकल्पनीय है। बता दें कि इस गुफा को यूनेस्‍को द्वारा विश्‍व विरासत का दर्जा प्राप्त है।

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