सुनो सुनो सुनो : इस जगह पड़े हैं लावारिस 70,000 करोड़ रुपए, जिसके हों वो ले जाए, याद कीजिए, कहीं आपके तो नहीं ?

Written by

एक तरफ लोकसभा चुनाव 2019 में गरीबों तथा किसानों को आर्थिक मदद देने के नाम पर राजनीति हो रही है, वहीं दूसरी ओर आपको जानकर हैरानी होगी कि भुलक्कड़ भारतीय नागरिक बैंकों, डाकखाने की योजनाओं में, बीमा कंपनियों में पैसे निवेश करके और पीजीएफआई में शेयर के रूप में कुल 70 खरब रुपये जमा करने के बाद भूल गये और कभी लेने ही नहीं आये। अब यह रकम अलग-अलग संस्थाओं में लावारिस पड़ी है।

इतनी बड़ी रकम का अलग-अलग संस्थाओं में लावारिस पड़े होने का एक कारण तो यह है कि कुछ लोग शेयर खरीदने के बाद या पोस्ट ऑफिस की योजनाओं में पैसा जमा करने के बाद या बैंकों में पैसा जमा करने के बाद अथवा बीमा पॉलिसी लेने के बाद भूल गये और अपना पैसा लेने ही नहीं आये। दूसरा कारण यह भी है कि कुछ लोगों ने पैसा जमा करना शुरू तो किया, परंतु परिपक्वता तक निवेश चालू नहीं रख पाये। इसी प्रकार कुछ लोगों की बीच में ही मृत्यु हो गई और उनके परिवार वालों को उनकी जमा रकम के बारे में पता नहीं है। ऐसी परिस्थितियों में अलग-अलग जगहों पर जमा रकम का कोई दावेदार सामने नहीं आ रहा है।

सरकार के कंपनी मामलों के मंत्रालय ने बताया कि भुलक्कड़ लोग पीयरलेस जनरल फाइनांस एण्ड इन्वेस्टमेंट कंपनी में डिपॉज़िट सर्टिफिकेट खरीदने के बाद इनकी सुध लेना ही भूल गये। इस कंपनी ने अपने 51 प्रतिशत शेयर 2000 रुपये और इससे कम दाम में डिपॉज़िट सर्टिफिकेट के रूप में जारी किये थे और 1.49 करोड़ रुपये जुटाये थे। 15 साल में यह रकम बढ़कर 1,514 करोड़ रुपये हो चुकी है, परंतु यह रकम कोई लेने ही नहीं आया। इसलिये इस रकम को अब सरकार ने अपने अधीन लेकर इन्वेस्टर एजुकेशन एण्ड प्रोटेक्शन फंड यानी (IEPF) में ट्रांसफर कर दिया है।

इसके अतिरिक्त इस फंड में पिछले 7 वर्षों में लावारिस हुईं कंपनियों के घोषित लाभांश तथा शेयर भी ट्रांसफर किये गये हैं। लाभांश का आँकड़ा 4,138 करोड़ रुपये है। इसी प्रकार यहाँ कंपनियों के 21,232.15 करोड़ रुपये मूल्य के 65.02 करोड़ शेयर भी जमा हैं। इस प्रकार केवल कंपनियों के शेयर और लाभांश ही लगभग 25,000 करोड़ रुपये के हैं।

भुलक्कड़ भारतीय केवल कंपनियों में निवेश करके ही नहीं भूल गये। वह देश की दो दर्जन बीमा कंपनियों में भी पॉलिसी लेने के बाद 16 हजार करोड़ रुपये भूल गये। इस रकम में से 70 प्रतिशत यानी कुल लगभग 10,509 करोड़ रुपये केवल एलआईसी के बीमाधारकों के हैं। वैसे यह आँकड़ा पिछले साल 31 मार्च-2018 तक का ही है, जो साल के अंत तक और बढ़ चुका होगा, जबकि गैर जीवन बीमा कंपनियों के पास भी 848 करोड़ रुपये लावारिस पड़े हैं, जिनका कोई दावेदार नहीं है।

बैंकों की बात करें तो भारतीय रिज़र्व बैंक का डिपोजिटर एजुकेशन एण्ड अवेयरनेस फंड यानी (DEA-F) ऐसे बैंक खातों को अपने कब्जे में ले लेता है, जिन पर 10 वर्ष तक कोई दावा नहीं करता है। जून-2018 तक ऐसे बैंक खातों से डीईए फंड को लगभग 20 हजार करोड़ रुपये मिले हैं।

इसी प्रकार डाक घरों में भी जमा पड़े 9,395 करोड़ रुपये का कोई दावेदार सामने नहीं आया है। अनेक लोगों ने डाक घर की अलग-अलग योजनाओं में पैसे जमा किये, परंतु परिपक्वता पीरियड पूरा होने के बाद भी कई दावेदार पैसे लेने ही नहीं आये। ऐसे भी लोग हैं, जिन्होंने योजनाओं में पैसा जमा करने की शुरुआत तो की, परंतु बाद में पैसा जमा करना बंद कर दिया और अपना जमा पैसा भी लेने नहीं आये।

इस प्रकार यह सभी आँकड़े जोड़ने पर रकम 70 खरब यानी 70 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचती है, जो लावारिस पड़ी है, जिनका कोई दावेदार सामने नहीं आया है। अभी भी यदि किसी का पैसा फँसा हुआ है तो वह दावेदारी करके निकाल सकता है।

Article Categories:
News

Leave a Reply

Shares