नई सरकार बनने से पहले ही मोदी दे सकते हैं इन 9 लाख लोगों को BIG GOOD NEWS : कहीं आप भी तो शामिल नहीं ?

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लोकसभा चुनाव 2019 के परिणाम 23 मई को घोषित होने वाले हैं, परंतु केन्द्र में सत्तारूढ़ नरेन्द्र मोदी सरकार उससे पहले ही अपने 9 लाख से अधिक केन्द्रीय कर्मचारियों को एक बड़ी खुशखबरी देने की तैयारी में जुटी है। दरअसल केन्द्र सरकार केन्द्रीय कर्मचारियों के लिये सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने की तैयारियों में जुटी है। इसलिये ऐसी संभावना व्यक्त की जा रही है कि सरकार चुनाव परिणाम घोषित होने से पहले ही इसे लेकर बड़ी घोषणा कर सकती है।

केन्द्र सरकार सीमा सुरक्षा बल (BSF), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP), सेवा चयन बोर्ड (SSB), केन्द्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) तथा केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF), भारतीय रेलवे कर्मचारी, आईटीएस और भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) के लगभग 9 लाख से अधिक कर्मचारियों के न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी कर सकती है। इससे पहले सरकार इनके महँगाई भत्ते (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर चुकी है।

दरअसल बीएसएनएल सहित केन्द्रीय कर्मचारी न्यूनतम वेतन 18,000 रुपये से बढ़ाकर 26,000 रुपये करने तथा फिटमेंट फैक्टर को 2.58 से बढ़ाकर 3.68 प्रतिशत करने की मांग कर रहे हैं। माना जा रहा है कि केन्द्र सरकार ने उनकी मांगें स्वीकार कर ली हैं। यह कर्मचारी वेतन वृद्धि के अलावा पेंशन में सुधार और प्रमोशन आदि की भी माँगें कर रहे हैं। इसे लेकर सरकार जल्द ही बड़ी घोषणा कर सकती है। माना जा रहा है कि सरकार ने केन्द्रीय कर्मचारियों के लिये प्रोत्साहन राशि को पाँच गुना बढ़ाने की हरी झंडी दे दी है। माना जा रहा है कि वित्त मंत्रालय ने गृह मंत्रालय को आश्वासन दिया है कि वह सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी, और एसएसबी आदि को राशन के पैसों की छूट और डीए की माँगों की समीक्षा कर रहा है। सरकार ने केन्द्रीय कर्मचारियों के लिये एक बार के प्रोत्साहन राशि में पाँच गुना बढ़ोतरी को भी मंजूर किया है। जो कर्मचारी नौकरी के दौरान उच्च शिक्षा हासिल करना चाहते हैं, उन कर्मचारियों को एक मुश्त 10,000 रुपये से लेकर 30,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इससे नौकरी में रहते हुए उच्च शिक्षा हासिल करने के इच्छुक कर्मचारियों को प्रोत्साहन मिलेगा।

मोदी सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों के लगभग 42,720 पीएसयू कर्मचारियों को पेंशन से जुड़ी बड़ी राहत देने का भी फैसला किया है। इस फैसले के अनुसार रिटायरमेंट बेनीफिट के रूप में इन कर्मचारियों को पेंशन का विकल्प मिलेगा। यह लाभ 1995 या उससे पहले नौकरी जॉइन करने वाले वरिष्ठ नागरिकों को मिलेगा। ऐसे वरिष्ठ नागरिकों की संख्या लगभग 10,720 है। यह वो कर्मचारी हैं, जिन्होंने पेंशन के विकल्प के बजाय कंट्रीब्यूटरी प्रोविडेंट फंड (पीएफ) का विकल्प चुना था। सरकार के इस फैसले से भारतीय जीवन बीमा निगम के लगभग 24,595 कर्मचारियों के अतिरिक्त शेष 18,125 अन्य बीमा कंपनियों जनरल इंश्योरेंस कंपनी, न्यू इण्डिया इंश्योरेंस कंपनी, नेशनल इंश्योरेंस कंपनी, ओरियंटल इंश्योरेंस कंपनी तथा यूनाइटेड इण्डिया इंश्योरेंस कंपनी के कर्मचारियों को लाभ मिलेगा।

वास्तव में सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों में रिटायरमेंट बेनीफिट के रूप में पेंशन जून-1995 से लागू हुई थी। एलआईसी ने अप्रैल-1995 और शेष पाँच बीमा कंपनियों ने 28 जून-1995 या उससे पहले जॉइन करने वालों को ही रिटायरमेंट बेनीफिट के रूप में पेंशन को चुनने का विकल्प दिया था।

केन्द्र सरकार ने एक और जो महत्वपूर्ण फैसला किया है उसके अनुसार केन्द्रीय कर्मचारियों के शेयर, डिबेंचर, म्युच्युअल फंड आदि में निवेश के खुलासे की सीमा बढ़ा दी है। अब यह सीमा बढ़कर कर्मचारियों के छह महीने के मूल वेतन के बराबर होगी। बता दें कि इस फैसले से लगभग 27 साल पहले की मौद्रिक सीमा नियम में बदलाव हो गया है। पहले ग्रुप ए और बी के अधिकारियों के लिये एक केलेण्डर वर्ष में 50,000 रुपये से अधिक के लेन देन का ब्यौरा देना पड़ता था और ग्रुप सी व डी के कर्मचारियों को 25,000 रुपये से अधिक के निवेश का ब्यौरा देना पड़ता था। अब कर्मचारियों के छह माह के मूल वेतन के बराबर तक के निवेश पर कोई खुलासा नहीं देना पड़ेगा तथा इससे अधिक के खुलासे के लिये एक प्रारूप (फॉर्मेट) भी लागू किया है, जिससे प्रशासनिक अधिकारी ट्रांजेक्शन पर आसानी से निगाह रख सकेंगे। हालाँकि नियमानुसार कोई भी सरकारी कर्मचारी शेयर अन्य निवेश में सटोरिया गतिविधियाँ नहीं कर पाएंगे। बार-बार खरीद-बिक्री को सटोरिया गतिविधि माना जाएगा।

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