हाय अल्लाह ! उत्तराखंड में भाजपा सरकार ने आते ही कहाँ गायब कर दिये 2 लाख मुस्लिम बच्चे ?

भाजपाई रावत के आते ही कांग्रेसी रावत की मुस्लिम तुष्टीकरण के लिए कराई गई सरकारी लूट का हुआ पर्दाफाश

अगर हम आपसे कहें कि उत्तराखंड में भाजपा ने शासन में आने के बाद मदरसों में पढ़ रहे लगभग 2 लाख मुस्लिम बच्चों को गायब कर दिया तो आप हैरान रह जाएंगे, परंतु यह सच है। 2017 में उत्तराखंड की सत्ता पर आने के बाद भाजपा ने ऐसा कारनामा किया है जिसे सुनकर आप दंग रह जाएंगे। इसके पीछे की सच्चाई उजागर होने पर आपका आश्चर्य और बढ़ जाएगा तथा यह भी स्पष्ट हो जाएगा कि आखिरकार मुस्लिम नेता भाजपा शासन में खुद को असुरक्षित क्यों महसूस करते हैं।

दरअसल भाजपा ने उत्तराखंड में सत्ता पर आने के बाद कांग्रेस सरकार का काला चिट्ठा खोल दिया, जिससे कांग्रेस सरकार के भ्रष्टाचार की कलई तो खुल ही गई। मुस्लिम मदरसों की भी हकीक़त सामने आ गई। वास्तव में भाजपा ने सत्ता में आने के बाद मुस्लिम छात्रों को मिलने वाली छात्रवृत्ति सीधे उनके बैंक खातों में जमा करवाने के लिये बच्चों का बैंक में खाता खुलवाने और उसे अनिवार्य रूप से आधार से लिंक करवाने का आदेश जारी किया था। यह आदेश जारी होते ही कांग्रेस सरकार में चल रहे भ्रष्टाचार का काला चिट्ठा खुलकर सामने आया और जो 2,21,800 मुस्लिम छात्र वजीफा हासिल कर रहे थे, उनकी संख्या घटकर 26,440 रह गई। एक साथ मुस्लिम छात्रों की संख्या लगभग 88 प्रतिशत घट गई, यानी कि 1,95,360 बच्चे गायब हो गये। अर्थात् इतने फर्जी नामों पर मदरसे वाले वजीफा अपनी जेब में भर रहे थे और सरकार इन्हें लगभग 14.50 करोड़ रुपये वजीफे के तौर पर दे रही थी। लगभग 2 लाख बच्चों के रिकॉर्ड से गायब होते ही सरकार की ओर से दी जाने वाली वजीफे की रकम भी घटकर मात्र 2 करोड़ रुपये रह गई। अब यह तो संभव नहीं कि इतना बड़ा घोटाला सालों से चलता आ रहा हो और सरकार को पता ही न चला हो। इसलिये संभव है कि कुछ प्रशासनिक अधिकारी भी इस घोटाले में शामिल हों और उन्हें भी तगड़ा कमीशन मिलता हो। इसलिये भाजपा सरकार ने अब इस घोटाले की तह तक जाने के लिये पूरे मामले की छानबीन शुरू कर दी है, संभव है कि कुछ समय में कुछ गिरफ्तारियाँ भी होंगी और उन्हें सजा भी होगी। कदाचित सरकार उनसे खाया हुआ माल भी उगलवाएगी।

जिलों की आबादी से अधिक मदरसों के बच्चों की संख्या !

आपको यह जानकर और भी हैरानी होगी कि उत्तराखंड के 13 जिलों में से कुछ जिलों में तो मुस्लिम समुदाय की इतनी कुल आबादी भी नहीं है, जितने बच्चे उन जिलों से वजीफा पाते थे। बैंक खातों को आधार से लिंक्ड करने का आदेश जारी होने के बाद 6 जिलों से तो एक भी मुस्लिम छात्र वजीफा लेने के लिये आगे नहीं आया। सबसे ज्यादा लूट हरिद्वार में चल रही थी। इसके बाद ऊधमसिंह नगर, देहरादून और नैनीताल जिलों के नंबर आते हैं। कुछ मदरसे फर्जी नामों के आधार पर वर्षों से सरकारी पैसा लूट रहे थे, वहीं कुछ तो मदरसे भी फर्जी पाये गये हैं, जो सिर्फ कागजों पर ही चल रहे थे। वास्तव में कोई मदरसा कहीं था ही नहीं और इनमें कोई छात्र भी नहीं पढ़ते थे। बस, फर्जी नामों की सूची सरकार में भेजकर सरकारी फंड हासिल किया जा रहा था और कांग्रेस सरकार तुष्टिकरण की राजनीति के कारण यह सब होने दे रही थी अथवा उसके कुछ नेता और सरकारी अफसर कमीशनखोरी के चलते ऊपर तक जानकारी पहुँचने नहीं दे रहे थे।

यह तो अकेले उत्तराखंड और उसके मात्र 13 जिलों का ही मामला है। यदि देश के 29 राज्यों और 7 केन्द्र शासित प्रदेशों के सभी 747 जिलों के रिकॉर्ड खँगाले जाएँ तो यह फर्जी आँकड़ा कितना बड़ा हो सकता है और यह फर्जीवाड़ा कितना विशाल हो सकता है, इसका सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है।

अभी की ही बात है कि उत्तर प्रदेश में भी 2017 में योगी आदित्यनाथ ने सरकार की कमान सँभालने के बाद मदरसों को रजिस्ट्रेशन करवाने का आदेश दिया तो इस प्रदेश में ही नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्रीय स्तर पर हाय-तौबा मचाई गई। उत्तर प्रदेश सरकार ने भी सरकारी खजाने की लूट रोकने के लिये ही यह आदेश जारी किया था, क्योंकि खुफिया एजेंसियों ने भी अलर्ट जारी करके कहा है कि कुछ मदरसों में बच्चों को कट्टरपंथी शिक्षा दी जाती है। वहीं कुछ फर्जी मदरसे होने के भी तथ्य सरकार के सामने आये थे। इसलिये सरकार ने मदरसों को रजिस्ट्रेशन कराने के आदेश दिये तो भाजपा शासन में मुस्लिम असुरक्षित होने का दुष्प्रचार किया जाने लगा।

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में लगभग 800 मदरसे चल रहे हैं, जिन पर राज्य सरकार हर वर्ष लगभग 400 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। इनमें से अधिकांश पैसा लाभार्थी और जरूरतमंद बच्चों को मिलने के बजाय फर्जी मदरसों के संचालक खा जाते हैं।

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