AAP MLAs disqualification: हाईकोर्ट ने दी फौरी राहत

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AAP MLAs disqualification row.Delhi HC stays bypolls but not on President order.

नई दिल्ली। लगातार बुरी खबर के बाद आखिरकार आम आदमी पार्टी (AAP) को दिल्ली हाईकोर्ट से राहत भरी खबर मिली। कोर्ट ने AAP के 20 विधायकों की सदस्यता खत्म करने के राष्ट्रपति के फैसले पर स्टे लगाने से इंकार कर दिया लेकिन चुनाव आयोग (Election Commission) से सोमवार तक उपचुनाव का ऐलान करने से मना किया है। AAP के 8 पूर्व विधायकों ने केंद्र सरकार की अधिसूचना को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। कोर्ट ने चुनाव आयोग से इस बाबत 1 हफ्ते के भीतर जवाब मांगा है।

19 जनवरी को राष्ट्रपति को अधिसूचना भेजी गई

पूर्व विधायकों ने हाईकोर्ट से केंद्र सरकार की अधिसूचना पर रोक लगाए जाने की मांग की थी। 19 जनवरी को चुनाव आयोग ने AAP के 20 विधायकों की सदस्यता समाप्त करने की सिफारिश राष्ट्रपति को भेज दी थी। सभी विधायकों पर लाभ के पद का फायदा उठाने का आरोप है।

21 जनवरी को राष्ट्रपति ने सिफारिश मंजूर कर लिया

19 जनवरी को जब चुनाव आयोग ने विधायकों की सदस्यता समाप्त करने की सिफारिश राष्ट्रपति को भेजी थी तब AAP विधायकों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने उस दिन अंतरिम राहत देने से इंकार कर दिया था और मामले की सुनवाई 22 जनवरी को दी थी। सुनवाई से पहले 21 जनवरी को राष्ट्रपति ने चुनाव आयोग की सिफारिश को मंजूर कर लिया जिसके बाद केंद्र सरकार ने अधिसूचना जारी कर दी थी।

चुनाव आयोग ने हमारा पक्ष नहीं सुना- AAP

AAP विधायकों का कहना है कि चुनाव आयोग ने एकतरफा फैसला लिया है। उनकी बातें नहीं सुनी गई। विधायकों का यह भी आरोप है कि नए चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। विधायकों का दावा है कि हमारे खिलाफ Office of profit का मामला बनता ही नहीं है।

क्या है पूरा  मामला ?

AAP ने अपने 20 विधायकों को संसदीय सचिव बनाया था। चुनाव आयोग के मुताबिक यह मामला Office of profit का है। Office of profit का मतलब इन विधायकों को मंत्री जैसी सुविधाएं मिलती हैं। नियम के मुताबिक कोई विधायक Office of profit जैसे पदों पर नहीं रह सकता है। विवाद बढ़ने के बाद अरविंद केजरीवाल सरकार ने नियमों में बदलाव कर बिल दिल्ली विधानसभा में पास करवा लिया था। हालांकि इस बिल को LG से मंजूरी नहीं मिल पाई थी। मामला लटका हुआ था। हाल में चुनाव आयोग ने लाभ के पद पर बने रहने के लिए 20 विधायकों को अयोग्य करार दिया। चुनाव आयोग ने अपनी सिफारिश राष्ट्रपति के भेजी जिसे राष्ट्रपति ने मंजूर कर लिया। राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने के बाद केंद्र सरकार ने अधिसूचना जारी कर दी।

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