ये हैं सबसे बड़े ‘डिवाइडर इन चीफ’, जो पड़ताल रहित ‘धर्मांध’ पत्रकारिता करते हैं…

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विशेष टिप्पणी : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 21 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। लोकसभा चुनाव 2019 से पहले विश्व प्रसिद्ध टाइम मैगज़ीन के कवर पेज पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तसवीर के साथ उन्हें ‘डिवाइडर इन चीफ’ की उपाधि देने वाले और मैगज़ीन में मोदी को विभाजनवादी बता कर विस्तृत लेख लिखने वाले आतिश तासीर फिर एक बार चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तुलना मोहम्मद गज़नी से कर दी, जो मंदिरों को तोड़ने के लिए कुख्यात था।

आतिश तासीर व्यवसाय से पत्रकार हैं और वर्तमान में न्यूयॉर्क टाइम्स के लिए लेख लिखते हैं। उनकी कुछ पुस्तकें भी प्रकाशित हुई हैं। उनकी एक और पहचान यह है कि वे भारत की विख्यात पत्रकार तवलीन सिंह और पाकिस्तानी पंजाब प्रांत के पूर्व गवर्नल सलमान तासीर के पुत्र हैं। बचपन भारत में और वह भी राजधानी दिल्ली में गुजारने वाले आतिश तासीर न केवल भारत में खाए दाना-पानी का ऋण भूल चुके हैं, अपितु पत्रकार होने के बावजूद अपने मनो-मस्तिष्क पर छाई धर्मांधता ने उनकी पत्रकारिता को ही सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है।

एक व्यक्ति का अपना निजी धर्म होता है, परंतु किसी भी व्यक्ति के व्यवसाय पर उसके निजी धर्म और धार्मिक विचारों का असर नहीं होना चाहिए। इस पर भी यदि कोई व्यवसाय से पत्रकार हो, तो उसका सबसे बड़ा धर्म यह होता है कि वह हर समाचार, लेख-आलेख या जो भी प्रकाश्य सामग्री हो, उसे तैयार करने से पहले पूरी पड़ताल कर ले, परंतु ब्रिटेन में जन्मे आतिश तासीर पहले मुसलमान हैं, फिर पत्रकार। यह बात उनके लेखों में स्वयं ही उभर कर सामने आ जाती है। जब कोई पत्रकार स्वयं को किसी धर्म विशेष का व्यक्ति मान कर कुछ लिखने बैठता है, तो सीधी-सी बात है, वह हर चीज को धर्म के नेत्रहीन चश्मे से देखता है और यही काम आतिश तासीर भी लगातार करते आ रहे हैं।

आतिश तासीर को पाकिस्तान और चीन जैसे देशों में मुसलमानों की दुर्दशा पर तरस नहीं आता, परंतु भारत में सहिष्णुता के साथ और बेहतर जीवनशैली के साथ जीवनयापन कर रहे मुसलमानों की छोटी-सी तकलीफ भी पहाड़ जैसी दिखाई देती है। यही कारण है कि उन्होंने लोकसभा चुनाव 2019 से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को डिवाइडर इन चीफ की उपाधि दे डाली थी, जबकि वास्तविकता यह है कि केवल 38 वर्षीय आतिश तासीर ने कभी भी मोदी को निकट से समझने की कोशिश ही नहीं की। यदि उनमें मोदी के ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ वाले विशाल दृष्टिकोण को समझने का सामर्थ्य होता, तो वे कभी भी मोदी को लेकर टाइम मैगज़ीन में ऐसी अनर्गल बातें नहीं लिखते।

अचानक हिन्दुओं के लिए प्रेम क्यों जागा ?

चुनाव से ऐन पहले इस तरह का लेख लिख कर आतिश तासीर ने भारतीय जनमानस विशेषकर मुसलमानों को प्रभावित करने की कोशिश की, परंतु आँकड़े और तथ्य बताते हैं कि देश के हिन्दुओं ही नहीं, अपितु मुसलमानों ने भी अब मोदी से प्रेम करना सीख लिया है और इसीलिए मोदी दोबारा प्रधानमंत्री बनने में सफल रहे, परंतु आतिश को भारतीय लोकतंत्र की बहुमत पद्धति हज़म नहीं हुई। मोदी को डिवाइडर इन चीफ कहने के बाद भी आतिश जब उन्हें दोबारा प्रधानमंत्री बनने से नहीं रोक पाए, तो व्याकुल आतिश ने मोदी के विरुद्ध नया शोषा छोड़ दिया। अब तक ‘मुसलमान मुसलमान’ का राग आलाप रहे आतिश को अचानक हिन्दुओं के लिए प्रेम जागा और उन्होंने गत 19 अगस्त सोमवार को एक ट्वीट किया। आतिश ने सोचा था कि इस ट्वीट से भारत में विशेषकर हिन्दुओं के बीच तूफान खड़ा हो जाएगा, परंतु ऐसा कुछ नहीं हुआ। उल्टे इस ट्वीट के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने उन पर ही सवालों की झड़ी लगा दी।

फैक्ट चेक करना तो सीखा ही नहीं आतिश ने

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी यानी काशी इन दिनों विकास के रास्ते पर सरपट दौड़ लगा रही है, परंतु आतिश तासीर ने अपने ट्वीट में लिखा, ‘औरंगज़ेब को भूल जाइए… यह कहना है काशी विश्वानाथ मंदिर के एक महंत का। गज़नी के बाद किसी व्यक्ति ने इतने मंदिर नहीं तोड़े, जितने मोदी ने तोड़ दिए हैं।’ आतिश आगे लिखते हैं, ‘वह (महंत) काशी में मोदी द्वारा बनाए जा रहे कॉरिडोर के बारे में बात कर रहा था। महंत का कहना है कि सिर्फ एक स्मारक बनाने के लिए शहर के मध्य युगीन हृदय को तार-तार किया गया है।’ आतिश ने सोचा होगा कि इस ट्वीट के बाद भारत में भूकंप हो जाएगा, परंतु ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। उल्टे सोशल मीडिया पर यूज़र्स ने आतिश को जम कर लताड़ पिलाई। वाराणसी के रहने वाले एक यूज़र ने आतिश को जवाब में सलाह दी, ‘प्रिय आतिश, फेक प्रोपेगैण्डा मटीरियल कॉपी-पेस्ट करने से बेहतर है कि आप फैक्ट चेक करके लिखें। मैं काशी का ही हूँ। वे (नरेन्द्र मोदी) मंदिरों को अतिक्रमणों से मुक्त कर रहे हैं।’ एक यूज़र ने लिखा, ‘अचानक आपका मंदिर प्रेम समझ में आता है। कम से कम जब से मोदी ने इस्लामिक प्लान गज़वा ए हिन्द को ध्वस्त करना शुरू किया है। मैं वहाँ (काशी) जा चुका हूँ। प्रशासन ने एक भी मंदिर को नहीं ढहाया। केवल मंदिरों को ढँक देने वाले अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया है।’ एक अन्य यूज़र ने आतिश को तमाचा जड़ते हुए लिखा, ‘मैं पिछले महीने ही वाराणसी गया था। मैंने स्थानीय लोगों से सरकारी कार्रवाई को लेकर बातचीत की। आप ग़लत संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं। कृपया कुछ आचार-विचार का अनुकरण करें।’ इस यूज़र ने बाकायदा आतिश को अपने पत्रकारिता धर्म को निभाने की सलाह दी।

महंत ने भी खोल डाली आतिश की पोल

आतिश तासीर ने मोदी को बदनाम करने के लिए अपने ट्वीट में काशी विश्वनाथ मंदिर के जिस एक महंत का उल्लेख किया, उस महंत ने स्वयं आतिश की पोल खोल दी। एक मीडिया से बातचीत में काशी विश्वनाथ मंदिर के महंत डॉ. कुलपति तिवारी को जब बताया गया कि आतिश ने इस तरह का ट्वीट किया है, तो वे भड़क उठे। महंत ने कहा, ‘मैं न तो उसे (आतिश को) जानता हूँ, न ऐसे किसी शख्स से हाल के दिनों में मेरी कोई मुलाक़ात हुई। यहाँ तक कि टेलीफोन पर भी कोई बात नहीं हुई। मैं इस व्यक्ति के विरुद्ध कार्रवाई करूँगा, मुकदमा करूँगा। मैं जीवन में किसी विवाद में नहीं रहा। मोदी से मेरे पारिवारिक संबंध हैं, व्यक्तिगत संबंध हैं। मैं इस ट्वीट का पूरी तरह खंडन करता हूँ। हाल ही में दिवंगत हुई अपनी माँ की सौगंध खा कर कहता हूँ कि मैंने इस तरह का कोई बयान नहीं दिया।’

ट्रिपल तलाक़ पर क्यों मौन थे आतिश ?

अपनी पत्रकारिता को इस्लाम और मुस्लिमपरस्त बना देने वाले आतिश तासीर से हमारा सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि उनकी कलम उस समय क्यों ख़ामोश रही, जब मोदी सरकार भारत की मुस्लिम महिलाओं को ट्रिपल तलाक के कारण हो रहे अन्याय को दूर करने वाला कानून बना रही थी ? आतिश एक छोटा-सा ट्वीट करके ही इस बात के लिए सरकार की प्रशंसा कर देते, परंतु आतिश से ऐसी उम्मीद करना बेकार है, क्योंकि उनकी पत्रकारिता पड़ताल आधारित नहीं, अपितु धर्मांधता से धुंधलाई हुई है। आतिश तासीर भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए वही भाषा बोल रहे हैं, जो भारत में रह कर अनेक मोदी विरोधी नेता बोल रहे हैं और पाकिस्तान में तो राष्ट्रपति आरिफ अल्वी, प्रधानमंत्री इमरान खान, विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी सहित अनेक धर्मांध से घिरे लोग अब भारत की बजाए सीधे-सीधे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को निशाना बना रहे हैं। यदि आतिश ट्रिपल तिलक कानून पर एक छोटा-सा ट्वीट कर देते, तो वे अपनी पत्रकारिता की निष्पक्षता पर बड़ी मुहर लगा सकते थे, परंतु आतिश ने ऐसा नहीं किया और यह सिद्ध कर दिखाया कि वास्तव में डिवाइडर इन चीफ नरेन्द्र मोदी नहीं, अपितु स्वयं आतिश तासीर और उनके जैसी सोच रखने वाले लोग हैं, जो हर बात को केवल और केवल धर्म से जोड़ कर देखते हैं।

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