PM मोदी की गुजरात को गुरु पूर्णिमा गिफ्ट : CM रूपाणी को दिया नया ‘आचार्य’ ! आप भी जानिए कौन हैं वे ?

Written by

कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद, 15 जुलाई, 2019 (युवाPRESS)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरु पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर गुजरात को एक अनोखा उपहार दिया है। गुरु पूर्णिमा गिफ्ट के रूप में पीएम मोदी ने गुजरात और मुख्यमंत्री विजय रूपाणी को नया ‘आचार्य’ भेंट किया है।

जी हाँ। हम बात कर रहे हैं गुजरात के प्रथम नागरिक की, जो अब तक ओ. पी. कोहली थे, परंतु केन्द्र सरकार के नए निर्णय के अनुसार अब आचार्य देवव्रत गुजरात के राज्यपाल होंगे। वर्तमान में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत का गुजरात के राज्यपाल के रूप में स्थानांतरण किया गया है। आचार्य देवव्रत गुजरात के 25वें राज्यपाल बनेंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात को मंगलवार 16 जुलाई को मनाई जाने वाली गुरु पूर्णिमा से पूर्व प्रथम नागरिक के रूप में एक आध्यात्मिक पुरुष भेंट किया है। आचार्य देवव्रत गुजरात के 21वें पूर्णकालिक राज्यपाल बनेंगे और चार कार्यवाहक राज्यपालों को जोड़ दिआ जाए, तो आचार्य गुजरात के 25वें राज्यपाल बनेंगे। इके साथ ही पीएम मोदी ने गुरु पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर गुजरात और मुख्यमंत्री विजय रूपाणी को नया आचार्य दिया है।

उल्लेखनीय है कि हमारे देश की लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में भले ही देश का प्रधानमंत्री और राज्यों के मुख्यमंत्री शासकीय निर्णायक व्यक्ति होते हैं, परंतु इसके बावजूद संवैधानिक संकट से लेकर संवैधानिक गरिमा तक की स्थिति में राष्ट्रपति और राज्यों के राज्यपालों की भूमिका प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। ऐसे में गुरु पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर दिल्ली से यह समाचार आना कि आचार्य देवव्रत गुजरात के नए राज्यपाल होंगे, वास्तव में गुजरात, गुजरातियों और मुख्यमंत्री विजय रूपाणी को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार की ओर से दी गई महत्वपूर्ण आध्यात्मिक भेंट से कम नहीं है।

कौन हैं आचार्य देवव्रत ?

18 जनवरी, 1959 को पंजाब में पानीपत जिले के सामलखा में जन्मे आचार्य देवव्रत 12 अगस्त, 2015 से हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल के रूप में कार्यरत् थे। आचार्य देवव्रत हरियाणा में कुरुक्षेत्र स्थिति गुरुकुल के एक (जट) प्रचारक और प्रधानाचार्य थे। वे 1981 से इस गुरुकुल के प्रधानाचार्य थे। यह संस्थान आर्य प्रतिनिधि सभा-रोहतक की ओर से संचालित है और कोई सरकारी अनुदान नहीं लेता है। आचार्य 1980 के दशक से इस गुरुकुल से संरक्षक, पालक, प्रधानाचार्य और वॉर्डन के रूप में जुड़े रहे। आचार्य अपने दैनिक जीवन में अपनी प्रामाणिकता, अनुशासन और कटिबद्धता के लिए प्रसिद्ध हैं। उन्होंने 1984 में पंजाब विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पुरी की। वे प्रदूषणमुक्त वातावरण के लिए कार्यरत् हैं। आचार्य बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान और महिला अधिकारों के लिए भी कार्यरत् हैं। आचार्य देवव्रत भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए यूरोप और दक्षिण पूर्व एशिया की यात्रा कर चुके हैं।

गुरुकुल से इतर 2015 में पहली बार हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल बनने पर आचार्य देवव्रत ने कहा था कि हिमाचल प्रदेश में अब अच्छे गुरुकुल खुलेंगे और नई पीढ़ी भारतीय संस्कृति को सीख सकेगी और उसके प्रति आदर की अनुभूति कर सकेगी। अपनी नियुक्ति में बाबा रामदेव की भूमिका पर आचार् देवव्रत ने कहा था कि रामदेव का मार्गदर्शन और आशीर्वाद सदैव उनके साथ हैं। गुरुकुल उनका परिवार है, जहाँ उन्होंने जीवन के 35 वर्ष व्यतीत किए। उन्होंने कहा था, ‘मुझे लगता है कि मेरे कड़े परिश्रम के परिणामस्वरूप मुझे यह चुनौती (राज्यपाल के रूप में) प्राप्त हुई है।’ हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल के रूप में ऐतिहासिक रूप से कई सरकारी निर्णयों में उन्होंने हस्तक्षेप किया। उन्होंने 3 नवम्बर, 2015 को (तब हिमाचल में कांग्रेस का शासन था) राज्य के अधिकारियों की बैठक लेकर सरकार को चौंका दिया था।

Article Categories:
News

Comments are closed.

Shares