आ अब लौट चलें : CAA लागू होने के बाद भारत से बांग्लादेश लौटने की होड़

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 30 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। भारत में अन्य देशों से घुसपैठ का मुद्दा नया नहीं, बल्कि पुराना है और यह कहना भी ग़लत नहीं होगा कि घुसपैठ देश के लिये एक अत्यंत गंभीर समस्या बन चुकी है। यही कारण है कि भाजपा इसे अपने चुनावी संकल्पपत्र में भी शामिल करती रही है और 2019 के लोकसभा चुनाव के संकल्प पत्र में भी इस मुद्दे को शामिल किया गया था। इस प्रकार भाजपा अपने चुनावी एजेंडे और उस वादे पर काम कर रही है, जिसमें उसने कहा था कि वह दलगत राजनीति या जाति, धर्म, संप्रदाय की राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को प्राथमिकता देगी। नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस (NRC) मोदी सरकार के उसी एजेंडे और वादे का हिस्सा हैं।

इन मुद्दों पर राष्ट्रीय स्तर का विरोध होना भी कोई चौंकाने वाली बात नहीं है। यह अपेक्षित ही था कि इस पर विरोध होगा, यही कारण रहा है कि अन्य दल इस गंभीर समस्या की अनदेखी करते रहे। परिणाम यह हुआ कि घुसपैठियों की तादाद बढ़ती गई और यह संख्या सैकड़ों से हजारों, हजारों से लाखों और अब लाखों से करोड़ों में पहुँच गई है। घुसपैठ की समस्या गंभीर इसलिये भी है कि यह समस्या देश के गरीबों का निवाला खा जाती है, जरूरतमंदों का रोजगार निगल जाती है। इससे भी आगे बढ़कर यह भाषा और संस्कृति को भी प्रभावित करने लगी है। असम और पश्चिम बंगाल इसके उदाहरण हैं। हालाँकि मोदी सरकार ने जिस तरह से नागरिकता कानून लागू करने और भविष्य में एनआरसी लागू करने की दृढ़ता दिखाई है, उससे सुरक्षित भविष्य की उम्मीदें जागी हैं। इसका प्रभाव भी देखने को मिल रहा है और भारत से बांग्लादेश लौटने की होड़ लग गई है, जो मोदी सरकार के इस कदम के सकारात्मक असर को दर्शाता है।

घुसपैठियों में भारत छोड़ने की लगी होड़

देश में सीएए और एनआरसी को लेकर बड़े पैमाने पर हंगामा हुआ। विरोध प्रदर्शनों के साथ-साथ हिंसक घटनाएँ भी हुईं, परंतु मोदी सरकार ने दबाव में आने के बजाय दृढ़ता दिखाई और हिंसक हुड़दंग मचाने वालों से ही नुकसान की भरपाई करने के लिये सख्ती से प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध कार्यवाही की, जिसके परिणामस्वरूप कुछ ही दिनों में हिंसक प्रदर्शनों पर रोक लग गई। विरोध प्रदर्शनों का दौर अभी भी जारी है, परंतु अब इसमें स्थानीय लोगों की भागीदारी धीरे-धीरे कम हो रही है और केवल राजनीतिक विरोध प्रदर्शन हो रहा है। उग्र विरोध प्रदर्शन शांत होने के बाद अब पीएम मोदी ने भी #IndiaSupportCAA के नाम से ट्विटर के जरिये देशवासियों को इसके बारे में समझाने की मुहिम छेड़ दी है। पीएम मोदी के अनुसार सीएए किसी भी भारतीय नागरिक को प्रभावित नहीं करता है। यह केवल पड़ोसी देशों में उत्पीड़न का शिकार होने के बाद भाग कर भारत में आये शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने के लिये है।

इस बीच भारत-बांग्लादेश सीमावर्ती इलाकों से आ रही रिपोर्ट्स के अनुसार सीएए लागू होने से पहले तक जिस बांग्लादेश से भारत में घुसपैठ की खबरें आती थीं, वहाँ अब सीएए लागू होने के बाद उल्टी गंगा बहने लगी है। भारत में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों में स्वदेश लौटने की होड़ मच गई है। खुद बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) के अनुसार लोग भारत से महिलाओं और बच्चों के साथ बांग्लादेश में घुस रहे हैं। बीजीबी ने ऐसे 350 से अधिक लोगों को हिरासत में भी लिया है। बीजीबी के अनुसार अनेक लोग बीजीबी को चकमा देकर सीमा पार करने में सफल भी हो गये हैं। दोनों देशों की सीमाओं पर बसे गाँवों से मिल रही रिपोर्टों के अनुसार भारत में सीएए लागू होने के बाद भारत से बांग्लादेश में प्रवेश करने वालों की गतिविधियाँ काफी तेज हो गई हैं। हिरासत में लिये गये लोगों का कहना है कि वे आजीविका के लिये भारत गये थे, परंतु उनके पास कोई वैध दस्तावेज नहीं होने से वे स्वदेश लौट रहे हैं। बीजीबी का कहना है कि उनकी ओर से सीमा पर कड़ी निगरानी की जा रही है, क्योंकि किसी को भी अवैध रूप से इधर या उधर आने-जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती है, इसके बावजूद दोनों देशों के बीच अधिकांश सीमावर्ती इलाके खुले हुए हैं, जहाँ से रात के अँधेरे में अथवा सुबह कोहरे के दौरान लोग घुसपैठ करने में सफल हो जाते हैं, कुछ लोग घुसपैठ के प्रयास करते हुए पकड़े भी जाते हैं। बीजीबी की ओर से गाँव वालों को ऐसे लोगों के बारे में तुरंत जानकारी देने के लिये समझाया भी जाता है।

उल्लेखनीय है कि सरकारी स्तर पर देश में घुसपैठियों की संख्या का कोई निश्चित आँकड़ा नहीं है, परंतु माना जा रहा है कि पूरे देश में घुसपैठियों की संख्या तकरीबन 5 करोड़ है। इनमें से 3 करोड़ से अधिक संख्या केवल बांग्लादेशियों की है। इसके अलावा म्यांमार से आये रोहिंग्या घुसपैठियों की संख्या को लेकर भी बहस छिड़ी हुई है।

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