32 दिन यानी 768 घण्टे : बम बरसे, न गोली चली, कश्मीरियों का कश्मीर विरोधियों को क़रारा तमाचा

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विश्लेषण : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 5 सितंबर, 2019 (युवाPRESS)। 5 सितंबर, 2019 को सुबह 11 बजते ही जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने के निर्णय को पूरे 32 दिन यानी 768 घण्टे हो गए। कश्मीर को अपनी जागीर समझने वाले जो अलगाववादी और कश्मीरी राजनीतिक दलों के नेता धारा 370 और उसके ही हिस्से 35ए को छूने की तुलना बारूद के ढेर को छूने से कर रहे थे, आज उनकी बोलती बंद हो चुकी है, क्योंकि इन 768 घण्टों में धारा 370 हटाने के विरुद्ध न किसी कश्मीरी ने पत्थर फेंके, न बम बरसाए और न ही सुरक्षा बलों ने किसी कश्मीरी पर एक गोली तक चलाई। कश्मीर में चहुँओर शांति का वातावरण कश्मीरियों की ओर से स्वयंभू कश्मीर हितैषी बन बैठे और मूलत: कश्मीर विरोधी अलगाववादियों, कश्मीरी नेताओं और हो-हल्ला मचाने वाले पड़ोसी पाकिस्तान के मुँह पर क़रारा तमाचा है।

ठीक एक महीने पहले यानी 5 अगस्त, 2019 को गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में 70 वर्ष पूर्व तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की ओर से कश्मीर पर की गई ऐतिहासिक भूल सुधारते हुए जम्मू-कश्मीर से न केवल धारा 370 हटाने की घोषणा की थी, अपितु जम्मू-कश्मीर का विभाजन कर लद्दाख को अलग केन्द्र शासित प्रदेश बनाने की भी घोषणा की थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की इस घोषणा के अनुसार जम्मू-कश्मीर न केवल धारा 370 से मुक्त हुआ, अपितु उसे केन्द्र शासित प्रदेश बना कर मोदी और शाह ने भारत के पास विद्यमान जम्मू-कश्मीर को पूरी तरह से भारत सरकार के नियंत्रण में लेने की धारदार रणनीति अपनाई, जो विरोधियों को भी धीरे-धीरे समझ में आ रही है।

कश्मीरी नेताओं की ‘धमकी भरी’ दौड़, पर सरकार का मौन

जब केन्द्र सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित दोभाल के कश्मीर दौरे से लौटते ही वहाँ अतिरिक्त सुरक्षा बल भेजने का निर्णय किया, तो कश्मीर पर एकाधिकार समझने वाले राजनीतिक दल नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) और पीपल्स डेमोक्रैटिक पार्टी (PDP) के नेताओं फारूक़ अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ़्ती को अंदेशा अवश्य हो गया था कि मोदी सरकार कश्मीर को लेकर कुछ बड़ा करने वाली है। अलगाववादियों को भी आशंका हो गई थी, तभी तो शाह फ़ैसल ने ट्वीट करके कहा था कि कश्मीर में कुछ बड़ा होने वाला है। यद्यपि कश्मीर में अतिरिक्त बल तैनात करने की प्रक्रिया तक पड़ोसी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान तो अमेरिका में कटोरा लिए भीख मांग रहे थे। उन्हें तो अंदेशा या आशंका तक नहीं थी कि कश्मीर में कुछ बड़ा होने वाला है। हाँ, कश्मीरी नेताओं को केवल इतना लगने लगा था कि मोदी सरकार ने अतिरिक्त सुरक्षा बलों को भेजा है, तो वह धारा 35ए हटाने जैसा कोई निर्णय कर सकती है।

इसीलिए महबूबा ने 28 जुलाई, 2019 को पीडीपी के 20वें स्थापना दिवस पर आयोजित समारोह में कहा था, ‘35ए के साथ छेड़छाड़ करना बारूद को हाथ लगाने के बराबर होगा। जो हाथ 35ए के साथ छेड़छाड़ करने के लिए उठेंगे, वो हाथ ही नहीं, वो सारा जिस्म जल के राख हो जाएगा।’ एनसी नेता फारूक़ अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला के मन में भी भारी उद्वेग था। इसीलिए पिता-पुत्र 1 अगस्त को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिलने पहुँच गए और उनसे अनुरोध किया कि 35ए और 370 से छेड़छाड़ न की जाए, परंतु दृढ़निश्चय मोदी ने दोनों को शांत करके लौटा दिया और अपने ऐतिहासिक निर्णय की भनक तक नहीं लगने दी। मोदी से मिल कर भी असंतुष्टि की अनुभूति हुई, तो उमर ने 3 अगस्त को राजभवन की ओर दौड़ लगाई। राज्यपाल सत्यपाल मलिक से भी उमर को अतिरिक्त सुरक्षा जवानों की तैनाती पर कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। यद्यपि मोदी और मलिक दोनों ही जानते थे कि 5 अगस्त को क्या होने वाला है। इसके बावजूद दोनों ने इन कश्मीरी नेताओं को आश्वासन तो दिया कि सरकार का 370 या 35ए पर कुछ भी करने का कोई इरादा नहीं है, परंतु जब 5 अगस्त को अमित शाह ने 370 को हटाने की घोषणा की, तो सभी अलगाववादी और कश्मीरी नेता हक्के-बक्के रह गए और स्वयं को ठगा हुआ पाया।

शाह ने किया धमाका, तो सिहर उठा इस्लामाबाद

5 अगस्त, 2019 को सुबह 11 बजे से पहले तक जहाँ शेष भारत विशेषकर मोदी की राजनीति और रणनीति से अवगत लोगों के मन में यह विश्वास था कि कश्मीर पर यदि कुछ बड़ा होगा, तो वह 35ए तक सीमित नहीं रहेगा और हुआ भी यही। अमित शाह ने परम्परा के विपरीत लोकसभा से पहले राज्यसभा में मोदी सरकार के ऐतिहासिक निर्णय की घोषणा की कि जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाई जा रही है। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के साथ ही जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हट जाएगी। शाह ने ऐसा धमाका किया, जिसने कश्मीर को जागीर समझने वाले 3 राजनीतिक परिवारों को दुनिया हिल गई, तो भारत के एक तिहाई कश्मीर (PoK) पर कब्ज़ा किए बैठे पाकिस्तान में भूकंप आ गया। कश्मीरी अलगाववादियों और नेताओं को लग रहा था कि मोदी सरकार के इस निर्णय से कश्मीर सुलग उठेगा, परंतु ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। दूसरी तरफ पाकिस्तान को तो 440 वॉल्ट को ऐसा करंट लगा कि कुछ घण्टों तक वह सुध-बुध ही खो बैठा। बमुश्किल स्वयं को संभालते हुए पाकिस्तान ने भारत का आंतरिक मामला होने के बावजूद कश्मीर से धारा 370 हटाने के मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र (UN) और चीन की मदद से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् (UNSC) की अनौपचारिक बैठक बुलवा कर उठाया। बौखलाए इमरान ने व्यापार-यातायात, राजनयिक संबंध घटाने जैसे घटिया कूटनीतिक कदम उठाए, जिसका भारत पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। एक महीने के भीतर इमरान की दुनिया ऐसी हिल गई कि वे न तो अपनी अवाम को मुँह दिखाने के लायक रहे और अंतरराष्ट्रीय अपमान सहना पड़ा बोनस में। चीन के अलावा किसी भी देश ने इमरान के ढोंगी आर्तनाद को गंभीरता से नहीं लिया और आज कश्मीर 768 घण्टों बाद भी अमन की ओर बढ़ कर पाकिस्तान को मुँहतोड़ जवाब दे रहा है।

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