कचरा BRAIN में-उड़ेल रहे TRAIN में : जानिए पाकिस्तान की ओर से रोकी गई थार एक्सप्रेस का 119 वर्षों का इतिहास

Written by

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 9 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। भारत ने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 क्या हटाई, पाकिस्तान बुरी तरह बौखला गया है। पहले द्विपक्षीय व्यापार रोका, फिर राजनियक संबंधों को घटाया और उसके बाद समझौता एक्सप्रेस को बीच रास्ते में छोड़ी। अब पाकिस्तान ने थार एक्सप्रेस को निशाना बनाया है। भारत और पाकिस्तान के नागरिकों की सुविधा के लिए शुरू की गई समझौता एक्सप्रेस के बाद थार एक्सप्रेस को भी पाकिस्तान ने रोकने का निर्णय किया है।

ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि पाकिस्तान अपने ब्रेन में भरे कचरे को दूर करने की बजाए उसे ट्रेन में क्यों उड़ेल रहा है ? ऐसे निर्णयों से आम जनता का क्या भला होने वाला है ? समझौता एक्सप्रेस या थार एक्सप्रेस में केवल भारतीय तो सफर करते नहीं हैं। सैकड़ों पाकिस्तानी नागरिक भी इन ट्रेनों के जरिए भारत-पाकिस्तान आवागमन करते हैं। ख़ैर, जिस तरह पुलवामा आतंकी हमले का बदला लेने से लेकर पाकिस्तान से मोस्ट फेवर्ड नेशनल का दर्जा (MFN) छीनने व जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाना भारत का आंतरिक मामला और अधिकार है, उसी तरह पाकिस्तान का भी यह अधिकार है कि वह ब्रेन में भरे कचरे को निकालने की बजाए गुस्सा ट्रेन पर उतारे।

ब्रिटिश शासकों ने शुरू की थी सिंध मेल

फिलहाल तो हम आपको बताने जा रहे हैं भारत के खोखरापार (राजस्थान) से पाकिस्तान के कराची के बीच चलने वाली वर्तमान थार एक्सप्रेस का 119 वर्ष पुराना इतिहास। थार एक्सप्रेस का इतिहास 13 वर्ष ही पुराना है, परंतु भारत और पाकिस्तान को जोड़ने वाली थार एक्सप्रेस पूर्व में सिंध मेल के नाम से चलती थी। ब्रिटिश शासकों ने अपने शासन की सुविधा के लिए वर्ष 1900 में सिंध मेल (SIND MAIL) आरंभ की थी। मुंबई-कराची के बीच चलने वाली यह ट्रेन अहमदाबाद, पालनपुर, मारवाड़, पाली, जोधपुर, LUN, बाड़मेर, मुनाबाओ, खोखरापार, मीरपुर खास और हैदराबाद (सिंध) रेलवे स्टेशनों से होकर गुजरती थी। भारत-पाकिस्तान स्वतंत्रता और विभाजन के बाद सिंध मेल की दूरी घटा कर हैदराबाद (पाकिस्तान) से जोधपुर (राजस्थान-भारत) तक कर दी गई। सिंध मेल 1947 से 1965 तक अवार गति से चलती रही, परंतु 1965 के युद्ध के दौरान यह ट्रेन रोक दी गई।

2006 में थार एक्सप्रेस की हुई शुरुआत

भारत-पाकिस्तान के बीच 1965 ही नहीं, 1971 में भी युद्ध हुआ। इसके चलते बंद हुई सिंध मेल दोबारा बहाल नहीं हो सकी। इस बीच समझौता एक्सप्रेस 1976 में आरंभ की गई, परंतु पाकिस्तान ने समझौता एक्सप्रेस के बाद जिस थार एक्सप्रेस ट्रेन को बंद करने का निर्णय किया है, उसकी शुरुआत 18 फरवरी, 2006 को हुई थी। पाकिस्तान के कराची से भारत के सीमावर्ती बाड़मेर स्थित मुनाबाव तक चलने वाली यह ट्रेन जमराव, सैंदद, पिथारू ढोरो नारो, छोरे व खोखरापार रेलवे स्टेशनों से होकर गुज़रती थी। कस्टम से संबंधित कागज़ातों की जाँच भारत में बाड़मेर तथा पाकिस्तान में मीरपुर खास स्टेशनों पर की जाती थी। यह ट्रेन 329 किलोमीटर की दूरी तय करती थी। आज से भारत और पाकिस्तान के नागरिकों को जोड़ने वाली एक और ट्रेन बंद हो गई है।

Article Categories:
News

Comments are closed.

Shares