कब तक टूटता रहेगा वि’श्वास’ ? PUBLIC प्लेस पर PUBLIC की सुरक्षा पर कब तक बना रहेगा सवाल ?

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 15 जुलाई 2019 (YUVAPRESS)। अहमदाबाद के सबसे लोकप्रिय पिकनिक स्पॉट कांकरिया एम्युजमेंट पार्क में रविवार को एक राइड दुर्घटना ने दो मासूम बच्चों की जीवन की डोर काट दी। इससे पहले रिवरफ्रंट पर एक राइड ऊपर जाने के बाद रुक गई थी, जिससे उसमें बैठे बच्चों और नीचे खड़े उनके परिजनों में चीख-पुकार मच गई थी। इससे भी पहले नारोल सर्किल पर आनंद मेले में एक राइड दुर्घटना में भी दो बच्चों ने जान गँवाई थी और वड़ोदरा के कमाटीबाग एम्युजमेंट पार्क में भी राइड दुर्घटना हो चुकी है। सवाल यह उठता है कि कब तक राइड के रूप में लोगों का विश्वास टूटता रहेगा और लोगों की जीवन की डोर टूटती रहेगी। क्या इस लापरवाही पर कभी कारगर कार्यवाही होगी।

बालवाटिका में राइड दुर्घटना

गौरीव्रत और रविवार की छुट्टी से कांकरिया पिकनिक स्पॉट पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ी और भीड़ का लाभ लेकर कमाई करने के लोभी लोगों ने लापरवाही की हद पार कर दी। 6 जुलाई को ही राइड इंस्पेक्शन के दौरान कांकरिया गेट नंबर 5 के पास बालिका वाटिका एम्युजमेंट पार्क-2 में डिस्कवरी नामक राइड को नट-बोल्ट बदलने की हिदायत दी गई थी। मगर हिदायत को दरकिनार करते हुए बिना नट-बोल्ट बदले ही राइड चालू करके बच्चों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ शुरू कर दिया गया। ऐसा क्यों हुआ ? इसके पीछे भी महानगरपालिका का ही भ्रष्टाचार और लापरवाही जिम्मेदार है। महानगर पालिका के भ्रष्ट तंत्र ने भाजपा के ही पूर्व कॉर्पोरेटर महेन्द्र पटेल के भाई घनश्याम पटेल की कंपनी सुपरस्टार एम्युजमेंट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट दिया था। इस कंपनी ने 26 दिसंबर 2014 से यह पार्क शुरू किया था।

कहाँ हुई लापरवाही ?

कांकरिया लेक फ्रंट की सभी राइड्स का हर सप्ताह इंस्पेक्शन होता है। 6 जुलाई को भी हुआ था और जाँच एजेंसियों को रिपोर्ट 1 से 10 तारीख तक कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय के निदेशक आर. के. साहू को सौंपनी होती है। यह रिपोर्ट सौंपे जाने के बावजूद कोई कार्यवाही नहीं की गई और जिस राइड में नट बोल्ट सहित विविध वस्तुएँ बदलने की हिदायत दी गई थी, उस राइड संचालक ने विविध वस्तुएँ बदले बिना राइड शुरू कर दी। सवाल उठता है कि जिस राइड में सुधार करने की जरूरत दर्शाई गई थी उसे चालू करने से रोका क्यों नहीं गया। यदि आर. के. साहू सुधार किये बिना राइड शुरू नहीं करने देते तो इस जानलेवा हादसे को टाला जा सकता था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और जाँच करने तथा रिपोर्ट तैयार करने की औपचारिकता निभाई गई। कार्यवाही के नाम पर कुछ नहीं किया गया और प्रशासन गहरी निद्रा में सोया रहा। अब जब दुर्घटना हुई तो जागने के बाद भी फिर जाँच करने का वही पुराना ढर्रा शुरू कर दिया है। जरूरत है दुर्घटना को लेकर जिम्मेदारी सुनिश्चित करने की। पुलिस ने तुरंत-फुरंत में एम्युजमेंट पार्क के संचालक घनश्याम पटेल, उनके सहयोगी और उनके बेटे भावेश पटेल के अलावा पार्क के मैनेजर तुषार चौकसी, राइड के ऑपरेटर यश उर्फ विकास उर्फ लाला महेन्द्र पटेल और किशन मोहंती तथा हेल्पर मनीष वाघेला को गिरफ्तार कर लिया है। उनके विरुद्ध गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप दर्ज किया गया है।

एक और सवाल

एम्युजमेंट पार्क की राइड को पुलिस की ओर से लाइसेंस दिया जाता है। लाइसेंस जारी करने से पहले सरकार के आर एण्ड बी विभाग की ओर से मिकेनिकल इंस्पेक्शन किया जाता है और प्रमाणपत्र दिया जाता है। इसके बाद महानगर पालिका के फायर विभाग की ओर से फायर सेफ्टी का प्रमाणपत्र दिया जाता है। इन प्रमाणपत्रों के आधार पर ही पुलिस की ओर से लाइसेंस इशू किया जाता है। पुलिस की लाइसेंस शाखा की ओर से कांकरिया एम्युजमेंट पार्क में राइड को दिये गये लाइसेंस की लिस्ट में 24 राइड का नाम दर्ज है, जबकि इस डिस्कवरी राइड का नाम 25वें क्रम पर लिखा है, परंतु वह प्रिंटेड नहीं है, बल्कि हाथ से लिखा गया है, यह भी जाँच का विषय है।

रिवरफ्रंट मेले में भी हुई थी राइड दुर्घटना

हाल ही में अहमदाबाद के साबरमती रिवरफ्रंट पर आयोजित हुए मेले में भी एक राइड दुर्घटना हुई थी, जिसमें हालांकि कोई जानहानि नहीं हुई थी, परंतु राइड 50 फुट ऊपर जाने के बाद टेक्निकल खामी के चलते रुक गई थी। इस राइड में बालकों सहित 28 लोग बैठे हुए थे, जिनकी साँसें किसी अनहोनी की आशंका से गले में ही अटक गई थी। बाद में फायर ब्रिगेड की मदद से उन्हें बचा लिया गया था।

नारोल सर्किल पर आनंद मेले में दुर्घटना

इससे पहले पिछले साल 16 जुलाई 2018 को अहमदाबाद के ही नारोल इलाके में सर्किल के पास आनंद मेले में चाँद-तारे नाम की राइड टूटने से भी दो लोगों की घटना स्थल पर ही मृत्यु हो गई थी। उस दुर्घटना में नयना वसफ्रोडा नामक 24 वर्षीय युवती और अंकित चौहान नामक 16 वर्षीय किशोर की मृत्यु हुई थी। तब भी पुलिस ने मेले के आयोजकों तथा राइड के मालिक के विरुद्ध मामला दर्ज करके कार्यवाही की थी।

एक सामान्य सवाल उठता है कि सार्वजनिक स्थलों पर ऐसी जानलेवा दुर्घटनाओं को रोकने के लिये कारगर कदम कब उठाए जाएँगे ? दुर्घटना होने के बाद कार्यवाही की औपचारिकता निभाने के स्थान पर प्रशासन पहले से ही ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने की सतर्कता क्यों नहीं बरतता है ?

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