गुजरात की इस महिला ने अपने ‘आँचल’ से बचाई 5 बच्चों की जान…

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रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद 28 दिसंबर, 2019 युवाPRESS। एक शिशु के जन्म से लेकर 6 माह तक उसे माँ का स्तनपान कराना बहुत ही आवश्यक होता है, क्योंकि मां का दूध एक संपूर्ण आहार है जिसमें बच्‍चे की जरूरत के सभी पोषक तत्‍व उचित मात्रा में पाए जाते हैं, इन्हें शिशु आसानी से हजम कर लेता है। माँ के दूध में मौजूद प्रोटीन और फैट गाय के दूध की तुलना में भी अधिक आसानी से पच जाते हैं। इससे शिशु के पेट में गैस, कब्ज, दस्त आदि की समस्‍या नहीं होती है और बच्‍चे की दूध उलटने की संभावना भी बहुत कम होती है।

विश्व बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार नवजात शिशु को माँ का दूध नहीं मिलने से उसकी मृत्यु हो जाती है। शिशु मृत्यु दर का वैश्विक औसत प्रति एक हजार पर 32 है, तो वहीं भारत में इसका औसत 38 है। परंतु गुजरात के अहमदाबाद में एक माँ ने अपना दूध दान कर के 5 नवजात शिशुओं के जीवन की रक्षा कर एक मिसाल साबित की है। महिला ने अपना दूध अहमदाबाद के एक मिल्क बैंक में दान किया था। इस महिला के विषय में जानने से पहले आइए जानते हैं कि मिल्क बैंक क्या है।

शिशुओं के स्वास्थ्य में सुधार और स्तनपान को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से 27 नवंबर, 1989 को मिल्क बैंक शुरुआत की गई थी। देश के विभिन्न राज्यों में मदर मिल्क बैंक खोले गए हैं, जो बच्चों के लिए माँ के दूध को स्टोर करते हैं। इसके बाद जरूरतमंद बच्चों तक यह दूध पहुँचाया जाता है। वहीं 2018 में जारी आंकड़ों के मुताबिक राजस्थान में सबसे ज्यादा (13) मदर मिल्क बैंक बनाए गए हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र में (12), तमिलनाडु में (10) मदर मिल्क बैंक हैं। इन राज्यों के बाद इस लिस्ट में चेन्नई का नाम आता है। अमारा नाम के ह्यूमन मिल्क बैंक ने ब्रेस्ट मिल्क फाउंडेशन के साथ मिलकर दिल्ली-एनसीआर में इसकी सेवाएँ शुरू की हैं। कोई भी मिल्क बैंक दूध दान लेने से पहले दूध डोनेट करने वाली महिलाओं के स्वास्थ्य की पूरी जांच की जाती है। इस जांच में यह पता लगाया जाता है कि कहीं संबंधित महिला को कोई बीमारी तो नहीं है, इसके बाद दूध को माइनस 20 डिग्री पर रखा जाता है, जिससे यह दूध करीब छह माह तक खराब नहीं होता है।

अब बात करते हैं गुजरात की इस महिला के बारे में जिसने अपना 12 लीटर दूध दान कर 5 बच्चों की जान बचाई है। रुशिना नाम की ये महिला अहमदाबाद में रहती हैं और एक टीचर हैं। रुशिना 20 सितंबर 2019 के दिन माँ बनी थीं, तब उन्होंने सोचा कि वे अपना दूध दान कर दें, ताकि जिन बच्चों को अपनी माँ का दूध नहीं मिल पाता उन तक दूध पहुँच सके। इसके बाद रुशिना अपने परिवार वालों को ये बात बताई। रुशिना के घर वाले ये बात जान कर बहुत खुश हुए। रुशिना ने डॉक्टर आशीष मेहता से संपर्क किया, जिन्होंने एक मिल्क बैंक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया था। रुशिना ने इस प्रोजेक्ट से जुड़ कर अपना दूध दान किया था। डॉ आशीष का कहना है कि रुशिना को देखकर कई अन्य महिलाओं ने भी इस प्रोजेक्ट से जुड़ने जा रही हैं।

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