जानिए क्या हुआ सुषमा के जीवन के अंतिम 70 मिनटों में ?

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अहमदाबाद, 7 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। इंदिरा गांधी के बाद देश की पहली महिला विदेश मंत्री बनीं सुषमा स्वराज की साँसें बचाने के लिये ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (AIIMS) के डॉक्टरों ने 70 मिनट तक मौत से जंग लड़ी, परंतु इस जंग में वह जीत नहीं पाये तो अपनी हार पर खुद डॉक्टर भी फूट-फूट कर रो पड़े थे।

मंगलवार रात 9.26 बजे एम्स पहुँची थी सुषमा

दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनने का तमगा अपने नाम करने वाली और अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में दूर संचार मंत्री रहीं सुषमा स्वराज के सीने में तेज दर्द की शिकायत पर मंगलवार रात 9.26 बजे एम्स में लाया गया था। जब एंबुलेंस उन्हें लेकर घर से अस्पताल आने के लिये निकली, तब ही डॉक्टरों को सूचित कर दिया गया था। इसलिये सारे डॉक्टर पहले ही उनकी सेवा के लिये उपस्थित थे, परंतु डॉक्टरों की टीम के काफी प्रयासों के बावजूद भी जब उनकी जान नहीं बचाई जा सकी तो टीम के दो जूनियर डॉक्टर फूट-फूटकर रो पड़े।

सुषमा की साँसें टूट रही थीं और डॉक्टर हार रहे थे

दरअसल सुषमा स्वराज को अस्पताल पहुँचते ही डॉक्टरों की टीम उन्हें एंबुलेंस से निकालकर तुरंत इमरजेंसी में ले गई। यहाँ डॉक्टरों को देखते ही पता चल गया कि उन पर कार्डिएक अटैक हुआ है। इसलिये डॉक्टरों ने उन्हें सीपीआर यानी आपातकालीन चिकित्सा प्रक्रिया (कार्डियो पल्मोनरी रीसिसटेशन) दिया। इसमें व्यक्ति के सीने को 5 से 6 बार दबाना होता है और उसे मुँह से साँस देनी होती है। 10 से 15 मिनट तक सीपीआर देने के बावजूद जब उससे काम नहीं चला तो डॉक्टरों ने उन्हें शॉक दिया। तीन बार शॉक देने के बाद भी सुषमा स्वराज के शरीर ने रिस्पांड नहीं तो डॉक्टरों ने तीसरा विकल्प अपनाया और हार्ट को पंप करने का फैसला किया। इसके बावजूद उनकी धड़कनें वापस नहीं लौटी तो उन्हें तत्काल जीवन रक्षक उपकरण यानी वेंटीलेटर का सपोर्ट दिया गया। इसके बावजूद सुषमा स्वराज की साँसें नहीं लौटी और उनके शरीर ने उनका साथ छोड़ना शुरू कर दिया। डॉक्टरों के लिये आगे करने के लिये कुछ नहीं बचा था और वह 70 मिनट तक सुषमा की जिंदगी बचाने के लिये मौत से जंग लड़ते रहे, परंतु आखिरकार डॉक्टर यह जंग हार गये और सुषमा स्वराज की जान नहीं बचा पाये। डॉक्टरों की इस टीम में शामिल दो जूनियर डॉक्टरों ने अपनी भावनाओं को नियंत्रित करने का बहुत प्रयास किया, परंतु जब ऐसा नहीं कर पाये तो बाहर निकलकर फूट-फूटकर रोने लगे।

रात 10.50 बजे सुषमा स्वराज ने अंतिम साँस ली

सुषमा स्वराज का इलाज करने वाली डॉक्टरों की टीम के अनुसार सुषमा स्वराज ने रात 10.50 बजे अंतिम साँस ली। हृदयरोग विभाग के डॉ. वी. के. बहल और उनकी टीम सुषमा स्वराज को पंप देने में जुटी थी। जबकि डॉ. प्रवीण अग्रवाल की टीम ने उन्हें वेंटीलेटर सपोर्ट दिया था, परंतु इनमें से कुछ भी सुषमा स्वराज की जान बचाने के लिये काम नहीं आया और सुषमा स्वराज की साँसों ने उनका साथ छोड़ दिया।

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