UN में फिर उल्टा पड़ा पाकिस्तान का दाँव, करतारपुर के बहाने कश्मीर मुद्दा उठाने की कोशिश को झटका

Written by

अहमदाबाद 30 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) में पाकिस्तान को फिर एक बार किरकिरी का सामना करना पड़ा है। आतंकवाद का चोला ओढ़े पाकिस्तान ने करतारपुर कॉरिडोर के नाम पर संयुक्त राष्ट्र में सदस्य देशों से प्रशंसा के फूल चाहे, परंतु उसे फूल की जगह शूल मिले। पाकिस्तान की पोल उस समय खुल गई, जब उसने करतारपुर के बहाने यूएन में फिर एक बार कश्मीर का मुद्दा उठाने की कोशिश की।

यह पूरा घटनाक्रम 12 दिसंबर का है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् (UNSC) में चीन के प्रयासों के बावज़ूद जब पाकिस्तान को कश्मीर मुद्दे पर खुलेआम या बंद दरवाज़े के भीतर चर्चा के प्रस्ताव पर मुँह की खानी पड़ी, तो पाकिस्तान ने कश्मीर मुद्दे को उठाने के लिए एक और चाल चली। पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने गत 12 दिसंबर को यूएनएससी अध्यक्ष को एक पत्र लिखा। इस पत्र में क़ुरैशी ने वही पुराना राग आलापा कि कश्मीर में भय का वातावरण है और दक्षिण एशिया में तनाव बढ़ रहा है। 12 दिसंबर को ही यूएन ने अंतरधार्मिक बातचीत तथा शांति पर एक प्रस्ताव को स्वीकृति भी दी थी। यूएन ने इस प्रस्ताव में करतारपुर कॉरिडोर खोलने के निर्णय का स्वागत किया था और इसे अंतरधार्मिक भावनाओं का सम्मान तथा पड़ोस में शांति बनाए रखने की दिशा में एक पहल बताया था। यह प्रस्ताव पाकिस्तान ने प्रस्तुत किया था, जिसे लेकर यूएनएससी के सदस्यों को संदेह हो गया और यह प्रस्ताव सदस्य देशों के बीच चर्चा का केन्द्रबिंदु बन गया, क्योंकि सदस्य देशों को भनक लग गई कि पाकिस्तान ने करतारपुर कॉरिडोर के बहाने कश्मीर का मुद्दा उठाने का प्रयास किया, जिसे यूएनएससी पहले ही द्विपक्षीय मुद्दा बता चुकी है।

उल्लेखनीय है कि चीन ने पाकिस्तान की तरफ से 17 दिसंबर को सुरक्षा परिषद की मीटिंग की मांग की थी ताकि कश्मीर के हालात पर चर्चा हो सके, लेकिन परिषद के शेष चार देशों के समर्थन के अभाव में यह संभव नहीं हो सका। एक फ्रेंच राजनयिक सूत्र ने तब कहा था कि कश्मीर मुद्दे को द्विपक्षीय स्तर पर सुलझाना चाहिए। दूसरे पश्चिमी देशों और रूसी राजनयिकों का भी यही नजरिया था। पाकिस्तान ने प्रस्ताव पेश करने के लिए संयुक्त राष्ट्र के जिन राजनयिकों से संपर्क साधा था, उनमें कम-से-कम दो ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि पाकिस्तान जिस तरह से सुरक्षा परिषद में कश्मीर के हालात पर तुरंत चर्चा की दरकार का नैरेटिव पेश कर रहा था, उसे संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव से बड़ा झटका लगा है। दिलचस्प बात यह है कि यह प्रस्ताव भी पाकिस्तान ने ही पेश किया था।

Article Categories:
News

Comments are closed.

Shares