ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में 3 मई को मनाई जाएगी अक्षय तृतीया-अनंत बिहारी गोस्वामी जी

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ठा. बांके बिहारी मंदिर के मुख्य सेवायत अनंत बिहारी गोस्वामी जी ने बताया कि वैसाख मास की तृतीया यानि अक्षय तृतीया का विशेष महत्व है। इस बार यह पर्व 3 मई को मनाया जाएगा। इस दिन वक्त अपने आराध्य को गर्मी में शीतलता प्रदान करने के उद्देश्य से उनके शरीर (श्रीविग्रह) पर शुद्ध चंदन और कपूर का लेप करते है और रंगबिरंगे महकते हुए फूलबंगला में विराजमान कराते हैं। इस दिन ठा. बांकेबिहारीजी साल में एक ही बार भक्तों को चरण दर्शन देते हैं, तो उनके चरणों में चंदन का लड्डू अर्पित होता है। इसी की तैयारी में सेवायत जुटे हैं। चंदन को घिसकर लड्डू बनाने की तैयारी हो रही है। ठाकुरजी को अर्पित करने के बाद प्रसादी चंदन भक्तों में बांटा जाता है। साथ ही ठाकुरजी को सत्तू, तरबूज, खरबूज, ककड़ी, खीरा और शीतल पेय जल पदार्थों का प्रसाद लगाया जाता है। उनके चरण में सवा किलो चंदन का लड्डू सेवायतों द्वारा रखा जाएगा।

ठा. बांके बिहारी मंदिर में साल में सिर्फ एक दिन होने वाले ठाकुरजी के चरण दर्शन भी इसी दिन होते हैं। इसके लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। 3 मई को सुबह 7.45 बजे से दोपहर 12 बजे तक चरण दर्शन होंगे। शाम के समय फूलबंगला में विराजमान ठाकुरजी के दर्शन होंगे। मंदिर के मुख्य सेवायत अनंत बिहारी गोस्वामी जी ने बताया कि मंदिर में शाम 6 बजे से चंदन श्रंगार के साथ अनूठे दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ेगी।

आराध्य के ये मनोहारी दर्शन श्रद्धालुओं के लिए दुर्लभ हैं। ठाकुरजी के पूरे शरीर पर चंदन लेपन, लांघ बंधी धोती, सिर से पैर तक स्वर्ण श्रृंगार, सोने, हीरे और जवाहरात से जड़े कटारे (कान में पहनने को) टिपारे (मोर पंख लगाने को), चरणों में चंदन का लड्डू ठाकुरजी के दर्शन को दिव्य बनाते हैं।

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