हेड ट्रांसप्लांट तकनीक: क्या अब मरा हुआ इंसान भी हो जाएगा जीवित ?

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रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद 23 दिसंबर, 2019 युवाPRESS। विज्ञान ने आज प्रकृति की बनाई हर चीज़ पर अधिकार कर लिया है, परंतु मृत्यु एक ऐसी जटिल और परमसत्य प्रक्रिया है, जहाँ आकर विज्ञान भी मुँह के बल गिर पड़ता है। हम सभी इस बात से अनभिग्य नहीं हैं कि संसार की हर वस्तु नश्वर है, फिर वह निर्जीव वस्तु हो या सजीव। इसके बावजूद विज्ञान ने सदैव प्रकृति को चुनौती दी है। मनुष्य को मृत्यु के बचाने के लिए विज्ञान ने कई ख़ोज किए हैं, जिसमें अंग ट्रांसप्लांट विज्ञान की सबसे बड़ी उपलब्धि है। अंग ट्रांसप्लांट के माध्यम से डॉक्टरों ने कई लोगों को मौत से बाहर निकाल कर जीवनदान दिया है। जिसमें अब तक आपने किडनी ट्रांसप्लांट, लिवर ट्रांसप्लांट, नी ट्रांसप्लांट के साथ ही कई और अंगों के ट्रांसप्लांट यानी प्रत्यारोपण के बारे में सुना होगा, परंतु बहुत जल्द आप एक नये ट्रांस्प्लांट के बारे में सुनेगें। डॉक्टरों ने दावा किया है कि आने वाले समय में वह मानव सिर को ट्रांसप्लांट करने की झमता प्राप्त करने जा रहे हैं। यदि मानव सिर का सफल प्रत्यारोपण होने लगा, तो ये चिकित्सा जगत में चमत्कार होगा और जन्मजात दिमाग संबंधी बीमारियों का उपचार भी संभव हो सकेगा।

दरअसल ब्रिटेन की हल यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल्स (Hull University Teaching Hospitals NHS Trust) के पूर्व क्लिनिकल प्रमुख डॉ. ब्रूस मैथ्यू ने दावा किया है कि अगले 10 वर्षों में हेड ट्रांसप्लांट संभव हो सकता है, उन्होंने कहा है कि रोबोटिक्स, स्टेम सेल ट्रांसप्लांट्स और नर्व सर्जरी में टेक्नोलॉजी एडवांस होने की वजह से ये संभव हो सकता है। इससे पूर्व भी 2017 में चीनी के जिआओपिंग रेन नाम के साइंटिस्ट ने दावा किया था कि उन्होंने एक सफल हेड ट्रांसप्लांट किया है। हालाँकि उसमें एक मृत व्यक्ति के सिर को दूसरे मृत व्यक्ति की बॉडी पर ट्रांसप्लांट किया गया था। चीन के हार्बिन मेडिकल यूनिवर्सिटी (Harbin Medical University) में की गई इस सर्जरी में 18 घंटे लगे थे। सर्जरी के बाद स्पाइन, नर्व्स और ब्लड वेसल्स को रिकनेक्ट कर दिया गया था।

वहीं इटली के सर्जन सर्गियो कैनवेरो का दावा है कि वे विश्व के पहले व्यक्ति हैं, जिन्होंने मानव के सिर के प्रत्यारोपण की प्रक्रिया पर काम किया है। सर्गियो का दावा है कि उनके टेस्ट सफल हुए हैं और हेड ट्रांसप्लांट में उनका प्लान काम करेगा। सर्गियो कहते हैं कि शव पर किया गया उनका तथाकथित सफल प्रत्यारोपण इस बात को दिखाता है कि उनके द्वारा विकसित की गई नई तकनीक की सहायता से 2 अलग-अलग शरीर की रीढ़ की हड्डी, तंत्रिकाएँ और रक्तवाहिकाओं को सफलतापूर्वक जोड़ा जा सकेगा। सर्गियो ने अपने पहले मरीज को भी साइन भी कर लिया था, जो अपने सिर को फ्रोजन रखवाकर बाद में उसे एक दूसरे डोनर के शरीर में फिट करवाने के लिए तैयार हो गया था। वह मरीज़ रूस का एक कंप्यूटर साइंटिस्ट वैलेरी स्पिरिदोनोव था, जो अपनी माँसपेशियों से जुड़ी बीमारी का सामना कर रहा था। हालाँकि ये बात केवल एक चर्चा बन कर रह गई थी। ऑपरेशन को करने में लगभग 69 करोड़ का खर्च बताया गया था।

डॉ. मैथ्यू का कहना है कि ट्रांसप्लांट के दौरान यदि ब्रेन और स्पाइनल कॉर्ड को साथ रखा जाए, तो यह असंभव नहीं है, परंतु ऐसा संभव हो पाता है, तो जिन लोगों के शरीर के कई अंग क्षतिग्रस्त हो चुके हैं या जिनके हाथ या पैर कट गए हैं, उन्हें लाभ हो सकता है। उनका ये भी मानना है कि यदि ये तकनीक कामयाब हुई, तो मर चुके लोगों को भी जिंदगी मिल सकेगी। यूरोप और अमेरिका में अभी हेड ट्रांसप्लांट के रिसर्च को नैतिक कारणों से अधिक समर्थन नहीं मिल पाया है, परंतु चीन में हेड ट्रांसप्लांट को अनुमति मिल चुकी है।

1970 में विश्व में सिर का प्रथम प्रत्यारोपण हुआ था। इस समय अमेरिका के न्यूरो सर्जन राबर्ट व्हाइट ने एक बंदर के सिर पर दूसरे बंदर का सिर प्रत्यारोपित किया था, परंतु प्रत्यारोपण के कुछ ही दिनों के बाद बंदर की मौत हो गई थी। इसके बाद चीनी सर्जन रेन झियोपिंग ने 2013 में किसी और शरीर पर चूहे का सिर सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित करके तहलका मचा दिया था। तब से अब तक उनकी टीम चूहों पर एक हज़ार से अधिक सफल सिर प्रत्यारोपण कर चुकी है।

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