कमलेश तिवारी हत्या कांड : सूरत में रचा गया षड्यंत्र, मिठाई के डिब्बे ने ही पहुँचाया आरोपियों तक

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रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद, 19 अक्टूबर, 2019 (युवाPRESS)। उत्तर प्रदेश पुलिस ने हिन्दू समाज पार्टी के नेता कमलेश तिवारी हत्या कांड को सुलझाने का दावा किया है। मामले की जाँच कर रहे उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशक (DGP) ओ. पी. सिंह का कहना है कि घटना स्थल से जो मिठाई का डिब्बा बरामद हुआ था, जिसमें आरोपी हथियार छिपा कर लाए थे, वह मिठाई का डिब्बा ही आरोपियों तक पहुँचने में सहायक सिद्ध रहा। दरअसल 2015 में कमलेश ने पैगंबर के विरुद्ध एक भड़काऊ भाषण दिया था, जिसके कारण 18 अक्टूबर, 2019 को लखनऊ में उसकी हत्या कर दी गई। कमलेश पर 13 बार चाकू से वार किया गया और एक गोली भी मारी गई। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार बायीं तरफ 8, दाईं तरफ 2 और पीछे की तरफ 3 बार चाकू मारे गए और एक गोली जबड़े में मारी गई, जो उसका मुंह चीरते हुए पीठ से बाहर निकली, जिस कारण उसकी घटना स्थल पर ही मौत हो गई। जिसके बाद से ही यूपी पुलिस ने आरोपियों को पकड़ने के लिए कार्रवाई शुरू कर दी थी। आरोपी पर शिकंजा कसने और उन्हें धर दबोचने के बाद यूपी पुलिस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की जिसमें उन्होंने आरोपियों को पकड़ने का दावा किया है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में डीजीपी ने बताया कि ‘सूचनाएँ और सुराग मिलने के बाद शुक्रवार को ही छोटी-छोटी टीमों को गठित किया गया था। हमारी टीम ने छानबीन में पाया कि घटना के तार गुजरात से जुड़े हुए हैं। मिठाई के डिब्बे से जो सुराग मिले उसके बाद मैंने स्वयं गुजरात के डीजीपी से बात की और महत्वपूर्ण सूचनाओं को एकत्र करना शुरू किया। मिठाई का डिब्बा सूरत जिले के जिस दुकान से संबंधित था, वहाँ के आस-पास की सीसीटीवी फुटेज की छानबीन से एक संदिग्ध व्यक्ति फैजान यूनुस भाई की पहचान की गई। गुजरात पुलिस और यूपी पुलिस के आपसी सहयोग से 24 घंटे के अंदर ही हमने संदिग्ध आरोपियों के घेर लिया और तीन आरोपियों को पकड़ लिया। तीनों आरोपी सूरत के रहने वाले हैं। पहला 24 वर्षीय आरोपी मौलाना मोहसिन शेख सलीम है, जो साड़ी की दुकान पर काम करता है। दूसरा 30 वर्षीय आरोपी फैजान है, जो जिलानी अपार्टमेंट सूरत का रहने वाला है। तीसरा 23 वर्षीय आरोपी रशीद पठान है, जो एक दर्जी का काम करता है और कंप्यूटर का जानकार है।’

डीजीपी ओपी सिंह का कहना है कि ‘पूछताछ के दौरान तीनों आरोपियों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है। ये तीनों व्यक्ति हत्या के षडयंत्र में सम्मिलित थे। पूछताछ और उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों की जाँच के आधार पर दो अन्य मुख्य आरोपियों की पहचान की गई है, जो लखनऊ के रहने वाले हैं और में इस घटना में सम्मिलित थे, उनकी गिरफ्तारी के लिए लखनऊ पुलिस टीम बनाकर कार्रवाई कर रही है।’ डीजीपी ने रशीद पठान को वारदात का मास्टरमाइंड बताया है। उन्होंने ये भी कहा कि ‘कमलेश तिवारी के परिजनों द्वारा कराई गई एफआईआर में नामजद मौलाना अनवारुल हक और मुफ्ती नईम काजमी को शुक्रवार रात में ही हमारी टीम ने हिरासत में लिया और इनसे पूछताछ की जा रही है।’ डीजीपी का कहना है कि ‘इतनी दूर का कनेक्शन मिलने के बावजूद किसी खास आतंकी संगठन से संपर्क नहीं पाया गया है लेकिन फिर भी आगे हम विवेचना करेंगे।’

कमलेश तिवारी ने 2015 में पैगंबर मुहम्मद के विरुद्ध विवादित बयान दिया था। जिसे लेकर बहित हंगामा भी हुआ था, जिसके बाद कमलेश तिवारी को विवादित बयान देने के चलते गिरफ्तारी भी किया गया था, इतना ही नहीं मुस्ल‍िम समाज कमलेश तिवारी को फाँसी देने की माँग कर रहे थे। फिलहाल कमलेश ज़मानत पर था। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने हाल ही में कमलेश तिवारी पर लगा राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) हटा भी दिया था।

गुजरात पुलिस के आतंकवाद निरोधी दस्ते (ATS) के पुलिस उप महानिरीक्षक (DIG) हिमांशु शुक्ला ने कहा कि हिरासत में लिए गए सभी तीन संदिग्धों ने वारदात में शामिल होने की बात मानी है। उन्होंने आगे बताया, ‘एसएसपी लखनऊ और स्थानीय पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज को बारीकी से लिया। गुजरात पुलिस और यूपी पुलिस का आपसी समन्वय बहुत मजबूत रहा। जॉइंट टीम ने सूरत से तीन आरोपियों को हिरासत में लिया, जिनमें एक मौलाना मोहसिन शेख सलीम (24) है, जो साड़ी की दुकान पर काम करता है। दूसरा व्यक्ति फैजान (30) है, वह भी जिलानी अपार्टमेंट सूरत का रहने वाला है। तीसरा शख्स जिसको हमने हिरासत में लिया है, वह रशीद अहमद खुर्शीद अहमद पठान (23) है। यह दर्जी का काम करता है और कंप्यूटर का जानकार है। यह भी सूरत में ही रहता है। इन तीन के अलावा हमने दो संदिग्धों को हिरासत में लिया गया था और उन्हें पूछताछ के बाद छोड़ दिया।’

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