VIDEO : गॉड और किंग की परिधि से पार हैं स्वीडन के राजा कार्ल गुस्ताफ

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रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद 4 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। Du gamla, du fria अर्थात तुम प्राचीन, तुम मुक्त। सुनने में तो ये किसी भारतीय प्रचीन सभ्यता का सुवाक्य लगता है, परंतु ये वाक्य है स्वीडन के राष्ट्रगीत का, जिसकी रचना 1844 में रिचर्ड डायबेक ने एक गाथागीत के रुप में की थी। 1866 में इस गाथागीत को स्वीडन के राष्ट्रगान के रूप में मान्यता दी गई। स्वीडन उत्तरी यूरोप के बाल्टिक सागर और बोथनिया की खाड़ी के पश्चिम में स्थित एक देश है। स्वीडन प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद के मामले में विश्व का 7वाँ सबसे धनी देश है, परंतु इस धन और वैभव ने स्वीडन की संस्कृति की चमक कम नहीं की, जिसका प्रमाण स्वयं स्वीडन के 16वें राजा कार्ल गुस्ताफ (Carl Gustaf) ने भी हाल ही में अपनी भारत यात्रा के दौरान भी दिया। राजा गुस्ताफ अपनी पत्नी रानी सिल्विया रिनेट सोमरलाथ (Sylvia Rinette Somerlath) के साथ 2 दिसंबर, 2019 से 5 दिवसीय भारत दौरे पर हैं, जिसके बाद से ही वह दोनों समाचार पत्रों और न्यूज़ चैनलों पर छाए हुए हैं। स्वीडन को 7 बार साहित्य के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है।

वास्तव में राजा कार्ल गुस्ताफ 16वें तथा रानी सिल्विया ने जब से भारत की भूमि पर कदम रखें हैं, नित नये प्रशंसनीय कार्य कर रहे हैं। इस शाही जोड़े की उहारता सबसे पहले तब सामने आई, जब ये दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) हवाई अड्‌डे पर एयर इंडिया की कमर्शियल फ्लाइट का प्रयोग कर भारत पहुँचे। एयर पोर्ट पर वह स्वयं अपना बैग उठाते नज़र आये। उसके बाद उन्होंने लग्ज़री कार छोड़ कर ई-रिक्शा का लुफ़्त उठाया। इसी दौरान जब राजा कार्ल मुंबई पहुँचे, तो उन्होंने वर्सोवा बीच पर सफाई अभियान में बढ़-चढ़ कर भाग लिया। राजा कार्ल सोलहवें गुस्ताफ ने व्यापार एवं निवेश, नवोन्मेष और संस्कृति समेत विविध क्षेत्रों में भारत के साथ समग्र द्विपक्षीय सहयोग को विस्तार देने को लेकर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सेामवार को गहन वार्ता की। राजा गुस्ताफ और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के बीच वार्ता के बाद दोनों पक्षों ने ध्रुवीय विज्ञान, नवोन्मेष एवं अनुसंधान और समुद्री क्षेत्रों में सहयोग के लिए तीन समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इसके अलावा मोदी और राजा गुस्ताफ ने नवोन्मेष नीति पर भारत-स्वीडन उच्चस्तरीय नीति वार्ता की बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में दोनों पक्षों ने अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में संबंधों को विस्तार देने के तरीकों पर चर्चा की। ये तो रही उनकी उदारदा और सादगी की बात आइए जानते हैं कौन राजा कार्ल सोलहवें गुस्ताफ ?

कार्ल सोलहवें गुस्ताफ फोल्के ह्यूबर्टस (Carl Gustaf Folke Hubertus) का जन्म 30 अप्रैल, 1946 को स्वीडन में सोलाना के हागा पैलेस (Haga Palace, Solna, Sweden) में हुआ था। वह राजकुमार गुस्ताफ एडोल्फ, ड्यूक ऑफ वैस्टरबटन (Prince Gustaf Adolf, Duke of Vasterbotten) और सक्से-कोबर्ग तथा गोथा की राजकुमारी सिबला (Princess Sibylla of Saxe-Coburg and Gotha) के बेटे हैं। गुस्ताफ जब 9 महीने के थे, तब 26 जनवरी, 1947 को डेनमार्क में हुई एक विमान दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई थी। 15 सितंबर, 1973 को गुस्ताफ अपने दादा राजा गुस्ताफ VI एडोल्फ (King Gustaf VI Adolf) की मृत्यु के बाद स्वीडन के सिंहासन पर बैठे। 1974 में सरकार के नई विधायी प्रक्रिया में किसी भी भूमिका से कार्ल गुस्ताफ को अलग कर दिया गया। इसके साथ ही स्वीडन में राजा द्वारा प्रधानमंत्री की औपचारिक नियुक्ति, कानून पर हस्ताक्षर और देश की सेना के कमांडर-इन-चीफ के पद पर रहने के अधिकार समाप्त कर दिए गए। हाउस ऑफ बर्नाडोट के प्रमुख के रूप में कार्ल गुस्ताफ अपने सदस्यों के शीर्षकों और पदों के बारे में सरकार से समर्थित निर्णय लेने में सक्षम हैं।

कार्ल गुस्ताफ ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा निजी तौर पर रॉयल पैलेस में प्राप्त की। उसके बाद वह ब्रॉम्स स्कूल और फिर सिगुटुना बोर्डिंग स्कूल चले गए। 1966 में हाई स्कूल करने के बाद कार्ल गुस्ताफ ने स्वीडिश आर्मी, रॉयल स्वीडिश नेवी और स्वीडिश वायु सेना में ढाई वर्ष शिक्षा ली। 1966-1967 की सर्दियों के दौरान उन्होंने माइनिंग पोत Benlvsnabben के साथ एक दौर की विश्व यात्रा में भाग भी लिया। कार्ल गुस्ताफ ने 1968 में तीनों सेवाओं में एक अधिकारी के रूप में अपना कमीशन प्राप्त किया। उन्होंने सेना और वायु सेना में कप्तान तथा नौसेना में लेफ्टिनेंट के पद तक कार्य किया। सिंहासन संभालने से पूर्व उन्होंने इतिहास, समाजशास्त्र, राजनीति विज्ञान, कर कानून और उप्साला विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र तथा बाद में स्टॉकहोम विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र में अपनी अकादमिक पढ़ाई पूरी की। 1970 में उन्होंने ओसाका-जापान में विश्व प्रदर्शनी में स्वीडिश प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख के रूप में राजा का प्रतिनिधित्व किया।

15 सितंबर, 1973 को कार्ल गुस्ताफ अपने दादा गुस्ताफ VI एडोल्फ की मृत्यु के बाद स्वीडन के राजा बने। 19 सितंबर को उन्होंने कैबिनेट की एक असाधारण बैठक के दौरान आवश्यक रीगल आश्वासन लिया। बाद में वह रॉयल पैलेस में राज्य के हॉल में संसद, राजनयिक कोर, अदालत आदि के सामने उपस्थित हुए, जहाँ उन्होंने भाषण दिया। हॉल में कैबिनेट बैठक और समारोह दोनों का टेलीविजन पर सीधा प्रसारण किया गया। कैबिनेट की बैठक में राजा कार्ल ने घोषणा की कि उनका नाम कार्ल सोलहवें गुस्ताफ होगा और उसका शीर्षक स्वीडन का राजा होगा। उन्होंने अपना निजी आदर्श वाक्य (För Sverige – i tiden) अर्थात् “स्वीडन के लिए-समय के साथ” की भी घोषणा की। 1544 में वंशानुगत राजशाही की स्थापना के बाद से “गॉड ऑफ गॉड ऑफ द स्वेडेस” का पारंपरिक शीर्षक के रुप में उपयोग किया जाता रहा है। किंग गुस्ताफ VI एडॉल्फ अंतिम थे, जिन्होंने अपने नाम के साथ ‘गॉड ऑफ गॉड ऑफ द स्वेडेस’ का प्रयोग किया था, परंतु कार्ल गुस्ताफ ने सादे और सरल शीर्षक “स्वीडन के राजा” को चुना, जिससे शताब्दियों से चली आ रही एक परंपरा समाप्त हो गई।

कार्ल सोलहवें गुस्ताफ को प्रतिवर्ष नोबेल पुरस्कार के प्रस्तुतकर्ता के रूप में जाना जाता है। उन्होंने ही पहला नोबेल पुरस्कार लियो एसकी को दिया था। राजा कार्ल को स्वीडिश यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज़, रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, स्टॉकहोम स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स और फिनलैंड में ओबो अकादमी विश्वविद्यालय से मानद् डॉक्टरेट की उपाधि दी गई है। स्वीडिश शाही परिवार की तरह कार्ल को भी पर्यावरण, प्रौद्योगिकी, कृषि, व्यापार, उद्योग और ऑटोमोबाइल में गहरी दिलचस्पी है। उनके पास पोर्श कार की मॉडल 911s की कार है, जो उन्हें विशेष पसंद है। साथ ही एक पुरानी वोल्वो PV444, एक फेरारी 456M GT, एक एसी कोबरा और अन्य कारें हैं। उनकी और उनकी पत्नी की पहली तस्वी इसी पोर्श 911 कार में बैठी हुई है। स्वीडन के राजा और रानी अक्सर ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन ओलंपिक खेल देखने जाते हैं।

राजा कार्ल विश्व स्काउट फाउंडेशन के मानद् अध्यक्ष हैं और स्वीडन और विदेश दोनों में स्काउट गतिविधियों में भाग लेते हैं। वह नियमित रूप से वर्ल्ड स्काउट जंबोरेस का दौरा करते हैं, उदाहरण के लिए 1979 में दाजलांब विश्व जम्बोरे इंटरनेशनल एग्जीबिशन, स्वीडन द्वारा आयोजित, 2002 वर्ल्ड जाम्बोरे सत्तीहिप, थाइलैंड में आयोजित और इंग्लैंड के हिलैंड्स पार्क में आयोजित वर्ल्ड स्काउटिंग वर्ल्ड जंबोरी की 100वीं वर्षगांठ है। उन्होंने 1981 में वर्जीनिया, संयुक्त राज्य अमेरिका में नेशनल स्काउट जाम्बोरे में भाग लिया और कांस्य वुल्फ को सम्मानित किया गया, जो स्काउट आंदोलन के विश्व संगठन का एकमात्र गौरव है, जिसे विश्व स्काउट समिति द्वारा विश्व स्काउटिंग को असाधारण सेवाओं के लिए 1982 में प्रदान किया गया था। 22वें विश्व स्काउट जाम्बोरे में भी भाग लिया। उन्होंने 6 अगस्त 2011 को समापन समारोह में भाषण दिया, जिसमें 40,000 से अधिक लोग शामिल थे। बैंड यूरोप ने भी उनके लिए “द फाइनल काउंटडाउन” गाना गाया। किंग कार्ल गुस्ताफ ने वेस्ट वर्जीनिया में 2013 बॉय स्काउट्स ऑफ़ अमेरिका नेशनल जाम्बोरे में उपस्थिति दर्ज कराई। सऊदी अरब के किंग अब्दुल्ला के साथ मिलकर किंग कार्ल गुस्ताफ ने मैसेंजर ऑफ पीस प्रोग्राम का समर्थन किया भी किया है।

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