जानिए कौन हैं भारत की “रॉकेट वुमेन” ऋतु करिधाल, जो अब करेंगी चंद्रयान 3 टीम की अगुवाई ?

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रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद 18 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। भारत के निर्माण कार्यों में स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर वर्तमान तक महिलाओं ने अपनी उपस्थिति सुनहरे अक्षरों में दर्ज कराई है। फिर वह घर की रसोई से निकली प्रसिद्ध रसाईयाँ तरला दलाल हों या फिर भारत की पहली फ़ायटर पायलट भावना कंठ। इन्हीं की तरह अनेक महिलाएँ हैं, जिन्होंने घर से निकल कर समाज और देश में अपनी एक अलग पहचान बनाई है, उन्हीं में से एक हैं वैज्ञानिक ऋतु करिधाल। ऋतु करिधाल वे भारतीय युवा वैज्ञानिकों हैं, जिन्हें भारत की रॉकेट वुमन के नाम से जाना जाता है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (Indian Space Research Organisation) इसरो के साथ काम करने वाली ऋतु अब चंद्रयान 3 का भी हिस्सा बनाई गई हैं। दरअसल चंद्रयान 2 के बाद से ही इसरो ने चंद्रयान 3 के लिए नई रणनीति और उसके लिए काम कर रहे वैज्ञानिकों के कार्यावंटन में परिवर्तन किया है, जिसके चलते चंद्रयान 2 की टीम का हिस्सा और प्रोजेक्ट डायरेक्टर वैज्ञानिक एम वनिता को चंद्रयान 3 मिशन से हटा दिया गया है, परंतु चन्द्रयान 2 मिशन टीम का संचालन करने वाली ऋतु करिधाल इस बार भी चंद्रयान 3 मिशन की टीम की लीड वैज्ञानिक के पद पर बरकरार हैं। साथ ही इसरो ने मिशन के लिए 29 डिप्टी प्रोजेक्ट डायरेक्टर भी नियुक्त किए हैं, जो मिशन से संबंधित अलग-अलग काम देखेंगे। इनमें से कुछ लैंडर तो कुछ रोवर के डिवेलपमेंट पर भी काम करेंगे।

ऋतु करिधाल (Ritu Karidhal) का जन्म उत्तर प्रदेश के लखनऊ में हुआ था। वह एक मध्यम वर्गीय परिवार में पली-बढ़ीं, परंतु शिक्षा के लेकर उनके मन में प्रबल इच्छा थी। कोचिंग संस्थानों और ट्यूशनों के संसाधनों की अनुपलब्धता और असफलताओं ने उन्हें सफल होने के लिए प्रेरणा दी। बचपन से ही उसकी दिलचस्पी अंतरिक्ष विज्ञान में थी। रात के आकाश पर घंटों तक टकटकी लगाए और बाहरी स्थान के बारे में सोचते हुए, वह चंद्रमा के बारे में सोचती थी, जैसे कि वह अपना आकार कैसे बदलता है। युवा अवस्था में आने के पश्चात ऋतु ने अंतरिक्ष से संबंधित गतिविधि के बारे में समाचार पत्रों की कटिंग एकत्र करना शुरू कर दिया। वे इसरो और राष्ट्रीय वैमानिकी और अन्तरिक्ष प्रबंधन (National Aeronautics and Space Administration) नासा की गतिविधियों पर नज़र रखने लगीं। ऋतु करिधाल ने लखनऊ विश्वविद्यालय से भौतिकी में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग (GATE) परीक्षा उत्तीर्ण की और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग (Aerospace engineering) में अपनी स्नातकोत्तर डिग्री हासिल करने के लिए भारतीय विज्ञान संस्थान ( Indian Institute of Science) आईआईऐससी में प्रवेश लिया।

1997 को अंततः वह दिन आ ही गया जिसकी ऋतु ने वर्षों से प्रतिक्षा की थी, उन्हें इसरो के साथ पहली बार काम करने का अवसर मिला। उसके बाद से ऋतु ने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा। एक के बाद एक वह सफलता की सीढ़ी चढ़ती गईं। उन्होंने विस्तार और शिल्प की आगे स्वायत्तता प्रणाली के निष्पादन के साथ भारत के मार्स ऑर्बिटर मिशन, मंगलयान के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह इस मिशन की डिप्टी ऑपरेशन डायरेक्टर भी थीं। मंगलयान इसरो की सबसे बड़ी उपलब्धि में से एक था, जिसने भारत को मंगल पर पहुँचने वाला विश्व का चौथा देश बना दिया था।

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