गीता जयंती : भगवान कृष्ण ने केवल 45 मिनट में दिया पूरे विश्व को मानव कल्याण का महामंत्र…

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रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद 8 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। सनातन धर्म के महानतम् ग्रंथों का सार अर्थात् श्रीमद् भगवद्गीता। गीता एक ऐसा धर्मग्रंथ है, जिसमें भगवान कृष्ण परमात्मा ने अर्जुन को निमित्त बना कर समूचे विश्व के मानव कल्याण का बोध दिया। यही उपदेश श्रीमद्भगवद्गीता (Bhagavad Gita) कहलाए। भारतीय परम्परा के अनुसार गीता का स्थान वही है, जो उपनिषद् और धर्मसूत्रों का है। गीता कर्म से संन्यास धारण करके वैराग्य प्राप्त करने की स्थिति नही, अपितु मन को वैराग्य की स्थिति में ढालने की युक्ति है। यही गीता का कर्मयोग है। 8 दिसंबर, 2019 को गीता जंयती मनाई जा रही है। कहा जाता है कि मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी के दिन ही भगवान कृष्ण ने अर्जुन को आत्म-विद्या का उपदेश दिया था। शोधकर्ताओं के अनुसार जिस दिन भगवान कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया, उस दिन 18 फरवरी, -3096 रविवार का दिन था। शोधकर्ताओं का दावा है कि कृष्ण ने केवल 45 मिनट में ही अर्जुन को सम्पूर्ण तत्वज्ञान उपलब्ध कराया और उसे विषाद से उबार कर पुन: वीर योद्धा की तरह धनुष उठाने के लिए सज्ज कर दिया। कुरुक्षेत्र में प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष मंत्रोच्चारण और शंखनाद के बीच ब्रह्मसरोवर के पवित्र जल का आचमन और पवित्र ग्रंथ गीता का पूजन कर 3 से 8 दिसंबर तक चलने वाले अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का शुभारंभ किया।

कहते हैं गीता के उपदेशों को सुनने मात्र से सभी संशयों का अंत हो जाता है। आधुनिक युग के लिए भगवान कृष्ण के मुखारविंद से निकले गीता के श्लोक किसी अमृत (अमरत्व की स्थिति) से कम नहीं हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कलयुग के प्रारंभ होने के 35 वर्ष पूर्व मार्गशीर्ष शुक्‍ल एकादशी के दिन अर्थात् 18 फरवरी ईसा पर्व 3096 के दिन कुरुक्षेत्र के मैदान में श्रीकृष्‍ण ने अर्जुन को जो उपदेश दिया था, वह श्रीमद्भगवद् गीता के नाम से प्रसिद्ध है। मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी भारतीय पंचांग के अनुसार 9वें माह की 11वीं तिथि को मानी जाती है और इस वर्ष यह रविवार 8 दिसम्बर को है। द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने इसी दिन अर्जुन को भगवद् गीता का उपदेश दिया था। इसीलिए यह तिथि “गीता जयंती” के नाम से भी प्रसिद्ध है। और इस एकादशी को “मोक्षदा एकादशी” भी कहते है। कृष्ण परमात्मा ने अर्जुन को निमित्त बनाकर, विश्व के मानव मात्र को गीता के ज्ञान द्वारा जीवनाभिमुख बनाने का चिरन्तन प्रयास किया है। प्रतिवर्ष कुरुक्षेत्र की पावन भूमि पर गीता जयंती का एक भव्य समारोह आयोजित होता है, इस दिन गीता पढ़ी और सुनाई जाती है। गीता में कुल 700 श्लोक हैं, जिनमें पहला श्लोक धृतराष्ट्र उवाच् है, जबकि संजय के 40 श्लोक हैं, तो विषादग्रस्त अर्जुन के प्रश्नों की संख्या 85 है और कृष्ण परमात्मा ने सभी संशयों के निवारण में 574 श्लोकों का उच्चारण किया।

केंद्र सरकार की ओर से हरियाणा के कुरुक्षेत्र को कृष्णा सर्किट में शामिल कर एक आकर्षक तीर्थ स्थल बनाने की तैयारी चल रही है। इसी के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी पृष्ठभूमि सज्ज की जाएगी है। लगातार 4 वर्षों से अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का आयोजन कर पर्यटकों को इससे जोड़ा जा रहा है और विदेशों में अंतरराष्ट्रीय महोत्सव मनाया जा रहा है। कुरुक्षेत्र के महत्व को देखते हुए अब इस धरा पर तिरूपति बाला जी मंदिर, अक्षर धाम मंदिर, गीता शोध संस्थान और इस्कॉन की ओर से विशाल श्रीकृष्ण अर्जुन मंदिर बनवाया जा रहा है, इतना ही नहीं, गीता के 18 अध्यायों का ज्ञान देने के लिए 18 मंजिला गीता ज्ञान मंदिर भी निर्माणाधीन है। सबसे विशेष बात ये है कि प्रदेश सरकार कुरुक्षेत्र में भारत माता का मंदिर बनाने की तैयारी कर रही है, जिसमें सभी राज्यों को अपने भवन बनाने और संस्कृति के प्रचार के लिए स्थान दिया जाएगा।

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