FAKE NEWS फैलाने वालों पर इस तरह फंदा कसेगी मोदी सरकार

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रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद 5 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। आज विश्व के 100 में से 99 लोग सोशल मीडिया से किसी न किसी तरह जुड़े हुए हैं, फिर व फेसबुक हो या वाट्सएप। यदि आप भी इस प्रकार के किसी एकाउंट का प्रयोग कर रहे हैं, तो हो जाइए सावधान, क्योंकि सरकार सभी सोशल एप के लिए ससंद के मौजूदा सत्र में नया विधेयक (Bill) पेश कर सकती है, जिसके तहत सोशल मीडिया एप का प्रयोग करने वाले करोड़ों उपभोक्ताओं यानी USERS को अपना वेरिफिकेशन कराना पड़ेगा।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार संसद में सोशल मीडिया विधेयक प्रस्तुत करने वाली है, जिसके पारित होने पर Whats App, FACEBOOK, INSTAGRAM, TIK TOK जैसे APP का प्रयोग करने के लिए यूज़र्स को पहले अपना वेरिफिकेशन कराना होगा। सरकार FAKE NEWS, हिंसा, मॉब लीचिंग जैसे मामलों पर लगाम लगाने के लिए ही यह विधेयक ला रही है। अब कंपनियों को एक ऐसा मैकेनिज़्म तैयार करना पड़ेगा, जिससे वेरिफिकेशन किया जा सके। इतना ही नहीं, इन सभी कंपनियों को पब्लिकली (सार्वजनिक रूप से) सारे वेरिफिकेशन दिखाने पड़ेंगे। अभी तक इस प्रकार की सुविधा केवल Twitter एकाउंट के यूज़र्स के लिए ही उपलब्ध थी। विधेयक के तहत यूज़र्स को अपनी अपने उपभोक्ता को जानें अर्थात् (KYC) करानी होगी। इसके लिए वे PAN कार्ड, आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड या फिर पासपोर्ट जैसे सरकारी डॉक्यूमेंट दे सकेंगे। इससे सोशल मीडिया पर चल रहे फर्जी अकाउंट को हटाने में और उनकी जानकारी एकत्र करने में भी सरकार को सहायाता मिलेगी।

सरकार के इस कदम से फेक न्यूज़ के कारण बढ़ रहे अपराध और उससे होने वाली मौतों पर भी नियंत्रण लगाना आसान होगा। 2017-18 के आँकड़ों के अनुसार सोशल मीजिया पर फैली फेक न्यूज़ के चलते 30 लोगों की जाने जा चुकी हैं। वहीं अब निजी डाटा चुराने पर कंपनी के ज़िम्मेदार अधिकारियों को तीन साल की जेल भी हो सकती है और कंपनी को 15 करोड़ रुपये तक या उसके वैश्विक टर्नओवर का चार प्रतिशत ज़ुर्माना भी देना पड़ सकता है। मोदी मंत्रिमंडल से निजी डाटा संरक्षण विधेयक, 2019 को स्वीकृति मिल चुकी है, जिसमें निजी डेटा की चोरी करने या फिर उसे किसी और को देने पर रोक लगाने के कई प्रावधान किए गए हैं। सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि इस बिल की चर्चा पहले संसद में की जाएगी। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने विधेयक को कैबिनेट और दूरसंचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के पास भेज दिया है।

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