अरे ‘गुमराह दीवानों’ ! सड़क पर उतरने से पहले अजमेर दरगाह दीवान की तो सुन लो…

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रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद 20 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) को लेकर समग्र देश में भ्रम और अफवाह की स्थिति बनी हुई है। अधिकांशत: देश में यह नकारात्मक संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है कि सीएए के अंतर्गत मुस्लिम धर्म के लोगों को शामिल नहीं करके मोदी सरकार ने देश के मुसलमानों के विरुद्ध कोई कदम उठाया है, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल उलट है। यही बात अजमेर शरीफ़ दरगाह के आध्यात्मिक प्रमुख दीवान सैयद ज़ैनुल आबेदीन अली खान ने भी कही है।

वास्तविकता भी यही है कि देश की राजनीतिक पार्टियाँ तो अपनी रोटी सेक ही रही थीं, परंतु न जाने हमारे देश के युवाओं को कौन गुमराह कर रहा है, जो बिना किसी तर्क के इस सीएए विरोधी आंदोलन से जुड़ते जा रहे हैं। दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के छात्रों ने एक ऐसा मेर्चा खोल लिया है, जो किसी के हित में कदा भी नहीं लगता। अजमेर शरीफ़ दरगाह के आध्यात्मिक प्रमुख दीवान सैयद जैनुल आबेदीन अली खान ने सीएए का समर्थन करते हुए इसे सही ठहराया है। उनका कहना है कि CAA किसी भी तरह से इस देश के मुसलामनों के विरुद्ध नहीं है और इस क़ानून से देश में रहने वाले किसी भी मुसलमान को डरने की ज़रूरत नहीं है, ना ही उनकी नागरिकता को किसी भी प्रकार का कोई ख़तरा है। अब सेचने वाली बात ये है कि इतनी बड़ी दरगाह के दीवान इस बात को भली-भाँति समझते हैं कि सीएए किसी भी मुसलमान ही नहीं, अपितु भारतीय के लिए भी समस्या या उसकी नागरिकता छीनने के लिए नहीं लाया गया है, परंतु देश के पढ़े-लिखे युवा इस बात को क्यों नहीं समझ रहे कि वे जो देश की सार्वजनिक सम्पत्ति को हानि पहुँचा रहे हैं, उससे किसी का भला नहीं होने वाला।

दीवान सैयद जैनुल ने अपने वक्तव्य में कहा कि केन्द्र सरकार ने जिस नागरिकता संशोधन विधेयक को पारित कर उसे क़ानूनी रूप दिया,वह किसी भी तरह से इस देश के मुसलामनों के विरुद्ध नहीं है और इस क़ानून से भारत में रहने वाले किसी भी मुसलमान को डरने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने ये भी कहा कि देश में इस क़ानून को लेकर जिन विवादों ने जन्म लिया है, उससे देश के मुस्लिमों में डर और भ्रम फैलाया जा रहा है। इस भ्रम को दूर करने की आवश्यकता है।

दीवान सैयद जैनुल का ये भी कहना था कि देश के मुसलमानों की भावनाओं का सम्मान करते हुए, जनभावनाओं को देखते हुए केन्द्र सरकार को एक उच्चस्तरीय समिति का गठन करना चाहिए। यह समिति पूरे देश में लोगों से उनकी बात सुने, इस क़ानून के बारे में उनके डर, उनकी शिकायत को सुन कर एक तथ्यात्मक रिपोर्ट केन्द्र सरकार को सौंपे और लोगों में बढ़ते भय को दूर करे। इतना ही नहीं, दरगाह दीवान ने जामिया घटना पर भी दुःख व्यक्त करते हुए केन्द्र सरकार से पुलिस को किसी भी शिक्षण संस्थान में बल प्रयोग ना करने के बारे में दिशा निर्देश जारी करने की अपील की है। साथ ही उन्होंने छात्रों से किसी भी परिस्थिति में क़ानून अपने हाथ में न लेने को भी कहा।

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