मोदी सरकार ने आर्थिक मोर्चे पर उतारे ‘नल-नील’ : जानिए इनके बारे में

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रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद, 18 अक्टूबर, 2019 (युवाPRESS)। रामायण के एक अध्याय में भगवान राम जब माता सीता को रावण की कैद से मुक्त कराने के लिए तमिलनाडु के रामेश्वरम पहुँचते हैं, तो उनके सामने एक बड़ा संकट उपस्थित होता है कि इतने विशाल समंदर को पार करके लंका कैसे पहुँचा जाए ? तब उन्हें बताया जाता है कि उनकी सेना में नल और नील नामक दो ऐसे योद्धा हैं जिन्हें वरदान प्राप्त है कि वो जिस पत्थर को भी पानी में छोड़ेंगे वह पत्थर डूबेगा नहीं और तैरता रहेगा। अत: दोनों ने भगवान से अनुमति लेकर मोर्चा सँभाला और भारत के दक्षिण-पूर्वी तट रामेश्वरम तथा लंका के उत्तर-पश्चिमी तट मन्नार के बीच चूने के पत्थरों से एक सेतु का निर्माण कर दिया। इस सेतु के हर पत्थर पर श्रीराम नाम लिखा गया था, जिससे यह सेतु रामसेतु कहलाया। इस कथा को हम आज इस लिये स्मरण कर रहे हैं, क्योंकि देश में वर्तमान मोदी सरकार के समक्ष भी एक बड़ा आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। इसकी गूँज अब चारों ओर सुनाई देने लगी है और इसका कारण भारत के सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के वित्त वर्ष 2019-20 की पहली तिमाही के जारी हुए आँकड़ों को माना जा रहा है। इन आँकड़ों के अनुसार भारत की आर्थिक विकास दर 5 प्रतिशत बताई जा रही है, जो 2018-19 के वित्तीय वर्ष की तिमाही के दौरान 8 प्रतिशत थी। आर्थिक संकट के बढ़ते नकारात्मक संकेतों को रोकने तथा आर्थिक विपत्ति से निपटने के लिए प्रधानमंत्री मोदी और उनकी टीम तेज़ी से कार्य कर रही है। इसी के अन्तर्गत प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार समिति (Economic Advisory Council) यानी EAC में भी ‘नल’ और ‘नील’को शामिल किया गया है। कौन हैं ये ‘नल’ और ‘नील’और कैसे ये तथाकथित आर्थिक संकट को दूर कर सकते हैं ? आइए जानते हैं, परंतु उससे पहले जानते हैं कि EAC क्या करती है ?

क्या करती है EAC ?

प्रधानमंत्री आर्थिक सलाहकार परिषद (Economic Advisory Council to the Prime Minister) PMEAC भारत में प्रधानमंत्री को आर्थिक मामलों पर सलाह देने वाली समिति है। PMEAC का एक अध्यक्ष तथा चार सदस्य होते हैं। इसके सदस्यों का कार्यकाल प्रधानमंत्री के कार्यकाल के बराबर होता है। 29 दिसंबर, 2004 को PMEAC का गठन तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में किया गया था, जिसके प्रथम अध्यक्ष सुरेश तेंडुलकर थे। वे एक भारतीय अर्थशास्त्री और राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग के पूर्व प्रमुख थे। तेंडुलकर 2004 से 2008 तक प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की आर्थिक सलाहकार परिषद (पीएमईएसी) के सदस्य रहे। आम तौर पर प्रधानमंत्री द्वारा शपथ ग्रहण के बाद सलाहकार समिति के सदस्यों की नियुक्ति होती है। प्रधानमंत्री द्वारा पदमुक्त होने के साथ ही सलाहकार समिति के सदस्य भी त्यागपत्र दे देते हैं। आर्थिक सलाहकार परिषद एक स्वतंत्र निकाय है, जिसका कार्य आर्थिक मुद्दों पर सरकार को विशेष कर प्रधानमंत्री को सुझाव देना है। ये सुझाव वे अपनी ओर से अथवा प्रधानमंत्री द्वारा सौपें गये किसी विषय पर दे सकते हैं। इसके अतिरिक्त प्रधानमंत्री द्वारा सौपें गये किसी अन्य कार्य को पूरा करना भी इसके कार्यों में शामिल है।

नीलेश शाह

आइए अब आपको बताते हैं कौन हैं नल और नील ? यहाँ नल से हमारा तात्पर्य नीलेश शाह से और नील से तात्पर्य नीलकंठ मिश्रा से है, जिन्हें EAC में आर्थिक मोर्चा सँभालने के लिए नियुक्त किया गया है। कोटक महिंद्रा म्‍युचुअल फंड के मैनेजिंग डायरेक्‍टर नीलेश शाह एक बहुत ही अनुभवी और मँझे हुए व्यक्ति हैं। उन्हें पूँजी बाजार और बाजार से संबंधित निवेशों में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। साथ ही उनके पास इक्विटी, फिक्स्ड इनकम सिक्योरिटीज़, स्थानीय और वैश्विक अचल संपत्ति में निवेश करने वाले निवेशकों की व्यापक जानकारी है। इसके अलावा नीलेश ने एक्सिस कैपिटल, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एसेट मैनेजमेंट फ्रैंकलिन टेम्पलटन और आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज़ के साथ लीडरशिप रोल भी किया है। 2004 में नीलेश को बिजनेस स्टैंडर्ड फंड मैनेजर ऑफ दी ईयर अवार्ड- डेब्ट से सम्मानित भी किया जा चुका है। नीलेश को उस टीम के साथ कार्य करने का अनुभव प्राप्त है, जिसे फ्रैंकलिन टेम्पलटन के साथ-साथ आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल में वर्ष का सर्वश्रेष्ठ फंड हाउस का पुरस्कार मिल चुका है। नीलेश एक स्वर्ण पदक विजेता चार्टर्ड एकाउंटेंट और योग्यता रैंकिंग लागत लेखाकार भी हैं। वे वित्तीय योजना पर निवेशकों को न सिर्फ पढ़ते हैं, अपितु लोगों को इसके लिए शिक्षित भी करते हैं। उन्होंने “ए डायरेक्ट टेक” नामक वित्तीय योजना पर सह-लेखक पुस्तक भी लिखी है। उनकी ये योग्यता उन्हें EAC का सदस्य बनाने के लिए पर्याप्त थी। ये तो हुई नल की बात अब आते हैं EAC के दूसरे योद्धा नील यानी नीलकंठ मिश्रा पर।

नीलकंठ मिश्रा

नीलकंठ मिश्रा इंडिया स्ट्रेटेजिस्ट और क्रेडिट स्ट्रैटिजी के लिए एशिया पैसिफिक के सह-प्रमुख और मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। संस्थागत निवेशक और एशिया मनी पोल द्वारा उन्हें भारत के सर्वश्रेष्ठ विश्लेषकों में से एक माना जाता है। वह फिफ्थेथ वित्त आयोग के सलाहकार परिषद के सदस्य और भारत सरकार द्वारा नियुक्त समितियों के सलाहकार भी हैं। जीएसटी पर आरएनआर समिति और एफआरबीएम समीक्षा समिति में उनका योगदान रहा है। वे आर्थिक मुद्दों पर प्रमुख समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में अक्सर लेख लिखते रहते हैं। नीलकंठ ने मुंबई, सिंगापुर और ताइपे के आधार पर धातु-खनन, भारतीय फार्मास्युटिकल्स, ताइवान आईसी डिजाइन, अर्धचालक ढलाई और एशियाई तकनीक रणनीति अनुसंधान पर विशेष कार्य किए हैं। क्रेडिट सुइस में शामिल होने से पहले, वे इन्फोसिस टेक्नोलॉजीज़ के साथ एक वरिष्ठ तकनीकी वास्तुकार के रूप में कार्य कर चुके हैं। उन्होंने हिंदुस्तान लीवर लिमिटेड के साथ भी एक उद्यमी की भांति कार्य किया है। नीलकंठ भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कानपुर से स्वर्ण पदक विजेता हैं, जिन्होंने कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग में स्नातक किया है। आईआईटी में प्रतिष्ठित प्रवेश परीक्षा में वे चौथे स्थान पर आए थे। उनकी इन्हीं बारीक विशेषताओं के चलते उन्हें EAC की कमान सौंपी गई है। अब ये देखना दिलचस्प होगा कि प्रधानमंत्री के ये नल और नील किस प्रकार बाजार में फैले तथाकथित आर्थिक विपत्ति के भ्रम जाल से भारत की जनता को कौन से राममंत्र से बाहर निकालते हैं ?

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