MO‘DI’PLOMACY : भारत ने व्यापार को बनाया हथियार, तो मलेशिया बनने लगा यार

Written by

रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद, 19 अक्टूबर, 2019 (युवाPRESS)। चीन और अमेरिका जैसे विकसित देश अक्सर व्यापार युद्ध के माध्यम से एक दूसरे को चुनौतियाँ देते रहते हैं। पिछले कुछ दिनों से चीन-अमेरिका में व्यापार युद्ध ने तेजी पकड़ ली है, क्योंकि बीते दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन को बड़ा झटका देते हुए उसके 200 अरब डॉलर के उत्पादों पर आयात शुल्क ढाई गुना तक बढ़ा दिया, इसके चलते अमेरिका में चीनी सामान के मूल्यों में 10 से 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जिसके उत्तर में में चीन ने भी अमेरिका के इस कदम का जवाब देते हुए 60 अरब डॉलर के अमेरिकी उत्पादों पर 25 प्रतिशत का आयात शुल्क लगा दिया। चीन ने अमेरिकी खेती की रीढ़ माने जाने वाले सोयाबीन के आयात पर भी अस्थाई रोक लगा दी। अब दोनों देश एक आर्थिक संकट की स्थिति में पहुँचते जा रहे हैं। इसी भेड़ चाल में शामिल पाकिस्तान ने बिना सोचे समझे जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने के बाद भारत से अपने व्यापारिक रिश्ते समाप्त करने की घोषणा कर दी जिसकी गाज उलटे उसके ही सिर पर आ गिरी। द्विपक्षीय व्यापार में 79.33 प्रतिशत हिस्सा पाकिस्तान में भारतीय निर्यात का ही होता है। वहीं यदि भारत-पाकिस्तान के बीच व्यापारिक संबंध टूटे तो पाकिस्तान को ही 2.6 लाख अरब का नुकसान उठाना पड़ेगा। भारत ने भी व्यापार युद्ध की नितियों को अपना शुरु कर दिया है। बीते दिनों जब मलेशिया के प्रधानमंत्री महाथिर बिन मोहमद ने भारत के विरुद्ध बग़ावती सुर लगाए, तो भारत ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की धारदार कूटनीति के ज़रिए बिना कुछ कहे ही मलेशिया को ऐसा सबक सिखाया कि वह स्वयं घुटने टेकने पर विवश हो गया। दरअसल भारतीय व्यापारियों ने आयात ड्यूटी बढ़ने और महाथिर के धारा 370 पर दिए गए बयान को लेकर नवंबर-दिसंबर महीने के लिए मलेशिया से पाप तेल खरीदना बंद कर दिया है, जिसके चलते मलेशिया में आर्थिक संकट गहरा गया है।

भारत को कश्मीर में घुसपैठ करने का लगाया था आरोप

5 अगस्त, 2019 को जब भारत सरकार ने कश्मीर पर लगे धारा 370 को हटाने की घोषणा की, तो सबसे ज्यादा जिस देश के होश उड़े वो था पाकिस्तान। इस घोषणा के बाद पाकिस्तान ने हर उस देश का दरवाजा खटखटाया, जिससे उसे सहायता की उम्मीद थी। पाकिस्तान को सहोग मिला भी। हमेशा की तरह भारत के विरोध में रहने वाले चीन ने भारत सरकार के इस फ़ैसले को सिरे से गलत ठहराया, परंतु भारत के मित्र देश मलेशिया के बयान ने भारत ही नहीं, अपितु विदेश मंत्रालय को भी चौंका दिया था। मलेशियाई प्रधानमंत्री महाथिर मोहम्मद ने जम्मू-कश्मीर को एक देश बताते हुए, भारत को कश्मीर में घुसपैठ करने का आरोप लगाया था। महाथिर ने कहा था कि संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों की अनदेखी उसके प्रति अनादर और कानून तोड़ने वाली है, हालांकि 4 अक्टूबर, 2019 को हुई संयुक्त राष्ट्र महासभा में विदेश मंत्रालय ने कश्मीर मुद्दे पर महाथिर के बयान के विरुद्ध सख्त रुख अपनाते हुए कहा था कि “मलेशिया को परिस्तिथि की ठीक समझ होनी चाहिए और मलेशियाई सरकार को ऐसे बयान जारी करने से पहले भारत के साथ अपने मित्रतापूर्ण रिश्तों को ध्यान में रखना चाहिए।” मलेशियाई प्रधानमंत्री के भारत के विरुद्ध दिए गए बयान से क्रोधित हुए भारतीय व्यापारियों ने इसके विरोद में मलेशिया से पाम तेल लेना बंद कर दिया था। जिसपर रुष्ट हुए मलेशियाई प्रधानमंत्री ने भारत पर एक और कटाक्ष करते हुए कहा था कि “भारत भी मलेशिया को अपना सामान निर्यात करता है। दोनों देशों के बीच व्यापार एकतरफा नहीं है।” अपने इस बयान के बाद से महाथिर को भारत के व्यापारियों से ही नहीं, अपितु अपने स्वयं के देश मलेशिया के व्यापारियों के भी निंदा का शिकार होना पड़ा।

पाम तेल का भारत शीर्ष खरीददार

मलेशिया के प्रधानमंत्री महाथिर बिन मोहमद की चौरतफा आलोचना ने उन्हें मीठी वाणी बोलने पर विवश कर दिया है। मलेशियाई व्यापार में बढ़ती गिरावट और आर्थिक विकास में कटौती को देखते हुए महाथिर ने एक नया बयान दिया है, जिसमें उन्होंने भारत के साथ अपने संबंधों और कुछ समय से व्यापार में आ रही परेशानियों को कूटनीति से सुलझाने की बात कही है। महाथिर ने ये भी कहा कि मलेशिया से तेल आयात न करना भारतीय व्यापारियों का निजी निर्णय है इसलिए वे इस मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देंगे, वहीं मलेशिया की मंत्री टेरेसा कॉक का कहना है कि उनका देश भारत से चीनी और भैंस के मांस का आयात बढ़ाने की योजना बना रहा है। मलेशिया के पाम ऑयल निर्यात में भारत एक बड़ी भागेदारी निभाता आ रहा है, साथ ही भारत इसका शीर्ष खरीददार भी है। भारत का निर्यात में कटौती करना मलेशिया के लिए ये चिंताजनक बात है क्योंकि भारत प्रतिवर्ष मलेशिया से लगभग 40 लाख मीट्रिक टन तेल का आयात करता है। इतना ही नहीं, भारत मलेशिया के पाम तेल के कुल निर्यात का 15 प्रतिशत खरीददार है, जबकि चीन और पाकिस्तान मिलकर भी मलेशिया से सिर्फ 2.4 मीट्रिक टन पाम तेल की खरीददारी करते हैं। वहीं जनवरी से सितंबर के बीच भारत ने मलेशिया से लगभग 39 लाख टन पाम तेल का आयात किया था, जिसका मूल्य लगभग 2 अरब डॉलर था। सितंबर महीने में मलेशिया से पाम ऑयल की खरीदारी में 30 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिसकी वजह पाम ऑयल पर 5 प्रतिशत की सेफगार्ड ड्यूटी की को बताया जा रहा है।

भारत के प्रति महाथिर की सोच नकारात्मक

92 वर्षीय मलेशियाई प्रधानमंत्री महाथिर के सत्ता में आने के बाद से ही भारत के साथ मलेशिया के रिश्ते बहुत अच्छे नहीं रहे हैं। मलेशिया ने भारत को इससे पहले भी झटका दिया था। जनवरी 2019 में भारत के अनुरोध को अस्वीकार करते हुए आतंकवाद फैलाने के आरोपी इस्लामिक उपदेशक ज़ाकिर नाईक को प्रत्यर्पित करने से मना कर दिया था और उसे स्थायी निवासी का दर्जा भी दिया था। नाइक पर 193.06 करोड़ रुपए की मनी लॉण्ड्रिंग का आरोप है। 2016 में वह गिरफ्तारी के डर से मलेशिया भाग गया था। 2016 में नाइक के खिलाफ एंटी-टेरर लॉ के तहत केस दर्ज किया गया था और जून 2017 में कोर्ट ने उसे एक अपराधी घोषित कर दिया था। 1981 से 2003 तक सत्ता में रह चुके महाथिर को 2018 में पुनः मलेशिया का प्रधानमंत्री चुना गया है। राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी होने के बाद भी इस प्रकार के बयान उनकी बढ़ती हुई उम्र की ओर संकेत देता है। उम्र के इस पड़ाव पर पहुँचने के बाद भी उन्हें ये नहीं पता कि जम्मू-कश्मीर कोई देश नहीं, अपितु ब्रिटिश भारत में एक रियासत था, जिसके शासक महाराजा हरि सिंह ने भारत सरकार अधिनियम, 1935 और भारत स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के तहत भारत से विलयन समझौता किया था। 1965 में हुए भारत-पाक युद्ध को छोड़ दें, तो घरेलू राजनीतिक-धार्मिक दबावों के चलते मलेशिया ने हमेशा पाकिस्तान का साथ दिया है। मलेशिया की 61.3 प्रतिशत जनसंख्या सुन्नी मुसलमानों की है और पाकिस्तान की तरह यहां की बहुसंख्यक आबादी इस्लाम की सलाफी और वहाबी विचारधारा को मानती है। कश्मीर पर अपनी टिप्पणियों से महाथिर ने रूढ़िवादी मलय मुसलमानों की खुशामद का प्रयास किया था।

Article Categories:
News · World Business

Comments are closed.

Shares