मोदी सरकार की इस एक ‘बूटी’ से 10 लाख लोगों की बढ़ गई ‘जवानी’ !

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रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 20 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। देश की रक्षा और सुरक्षा में तैनात हर भारतीय नागरिक को लोग तब तक ‘जवान’ कह कर सम्मान से संबोधित करते हैं, जब तक वह सेवा से जुड़ा रहता है। रक्षा-सुरक्षा में तैनात यह नागरिक चाहे 18 वर्ष का हो या 58 वर्ष का, परंतु उसे कहते ‘जवान’ ही हैं। जवान की यह उपाधि तब छिन जाती है, जब वह नागरिक सेवानिवृत्त हो जाता है, परंतु मोदी सरकार ने एक ऐसा निर्णय किया है, जिससे देश की रक्षा-सुरक्षा में तैनात करीब 10 लाख लोगों की ‘जवानी की उम्र’ बढ़ जाएगी।

जी हाँ। मोदी सरकार ने देश की बाह्य व आंतरिक सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली अर्धसैनिक बलों में कार्यरत् सभी रैंक के कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष निर्धारित कर दी है। गृह मंत्रालय ने इस आशय का आदेश भी जारी कर दिया है, जो तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। मोदी सरकार के इस निर्णय के चलते केन्द्रीय रिज़र्व पुलिस बल (केरिपुब-CRPF), सीमा सुरक्षा बल (सीसुब-BSF), सशस्त्र सीमा बल (SSB), केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) और असम राइफल्स (AR) में कार्यरत् सभी कर्मचारी अब अपनी उम्र के 60 वर्ष तक जवान ही कहलाएँगे।

अदालती आदेश के बाद निर्णय

केन्द्र सरकार ने अर्धसैनिक बलों में कार्यरत् कर्मचारियों की आयु सीमा बढ़ाने का निर्णय दिल्ली उच्च न्यायालय (HC) के जनवरी-2019 में दिए गए एक फ़ैसले के बाद किया है। दरअसल दिल्ली हाई कोर्ट ने सरकार से कहा था कि अर्धसैनिक बलों में सभी रैंकों के लिए एक समान सेवानिवृत्ति आयु निर्धारित की जाए। इससे पहले अलग-अलग रैंक के लिए अलग-अलग सेवानिवृत्ति आयु निर्धारित थी, परंतु अब केन्द्रीय गृह मंत्रालय के आदेश के अनुसार सभी प्रकार के अर्धसैनिक बलों में कार्यरत् जवानों की सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष कर दी गई है।

सेवानिवृत्त हो चुके जवान सेवा में लौट सकते हैं

सरकार के इस निर्णय से पहले तक केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (SAPF) या अर्धसैनिक बलों (PF) में कमांडेंट और उससे नीचे वाली रैंक के अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 57 वर्ष थी, जबकि पुलिस उप महानिरीक्षक (DIGP) और उससे ऊपर के रैंक के अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष थी। सीएपीएफ के तहत कार्यरत् असम राइफल्स और सीआईएसएफ के सभी अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु पहले ही 60 वर्ष है। इसके अलावा जिन्हें हाई कोर्ट के फ़ैसले की तारीख व गृह मंत्रालय के आदेश की तारीख के बीच अंतरिम स्टे मिला है, उन पर भी 60 वर्ष की ही सेवानिवृत्ति आयु लागू होगी। ऐसे में गृह मंत्रालय ने अपने आदेश में कहा है कि जो जवान पुराने नियम के चलते सेवानिवृत्त हो चुके हैं, परंतु अदालत में नहीं गए हैं, वे अगर चाहें, तो सेवानिवृत्ति पर मिले सभी लाभ सरकार को लौटा कर दोबारा सेवा में शामिल हो सकते हैं और 60 वर्ष की आयु तक पुन: ‘जवान’ बने रह सकते हैं।

10 लाख जवानों को होगा फायदा

मोदी सरकार के इस निर्णय का असर अर्धसैनिक बलों में कार्यरत् लगभग 10 लाख जवानों पर पड़ेगा। ये जवान अब 60 वर्ष की आयु तक सेवा में बने रह सकेंगे। उल्लेखनीय है कि भारत में वर्तमान में अर्धसैनिक बलों में कार्यरत् जवानों की संख्या लगभग 10 लाख है। इनमें असम राइफल्स में 63 हजार 747 जवान, स्पेशल फ्रंटियल फोर्स (SSF) में 10 हजार, सीआरपीएफ में 3 लाख 13 हजार 678, बीएसएफ में 2 लाख 57 हजार 363, आईटीबीपी में 89 हजार 432, सीआईएसएफ में 1 लाख 44 हजार 418, एसएसबी में 76 हजार 337 जवान शामिल हैं। इसके अलावा विशेष सुरक्षा समूह (SPG) और राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) भी अर्धसैनिक बलों का ही हिस्सा हैं। एसपीजी में 3 हजार और एनएसजी में 7 हजार 350 जवान कार्यरत् हैं।

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